लक्ष्मण रेखा के लांघते ही सीता जी का हुआ हरण

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बैतूल। वन में वास के दौरान सीता जी को अचानक स्वर्ण मृग नजर आता है। वे भगवान राम से स्वर्ण मृग के लिए हट करती हैं। भगवान राम उनके हट को पूरा करने मृग के पीछे जाते हैं। उनके काफी समय तक नहीं लौटने पर सीता जी उन्हें ढूंढने के लिए लक्ष्मण जी को भिजवाती हैं। इस पर सीताजी की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण जी एक रेखा खींच कर जाते हैं। वे स्पष्ट हिदायत देते हैं कि किसी भी स्थिति में इस रेखा को न लांघे। इसके बाद वहां मायावी रावण साधु भेष में भिक्षा मांगने आता है। वह सीता जी से लक्ष्मण रेखा से बाहर आने का कहता है और रेखा पार करते ही हरण कर लेता है। उन्हें बचाने का प्रयास करने पर रावण जटायु का भी वध कर देता है।

श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति के तत्वावधान में रामलीला मैदान बैतूल गंज में चल रही रामलीला में आदर्श श्री इंद्रलोक रामलीला मंडल खजूरी के कलाकारों द्वारा शुक्रवार को केवट संवाद, दशरथ निधन, भरत मिलाप और सीता हरण प्रसंगों का मंचन किया गया। वनवास जाते समय केवट और भगवान राम के बीच आत्मीय संवाद होता है। इसके बाद श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी वन पहुंच जाते हैं। इधर कैकई के हट के आगे राजा दशरथ प्रभु श्रीराम को वनवास तो भेज देते हैं पर यह वियोग वे सहन नहीं कर पाते। उनके बारे में सोच-सोच कर ही उनके प्राण पखेरू उड़ जाते हैं। पिता के निधन का समाचार देने भरत जी भगवान राम को ढूंढने वन की ओर निकल पड़ते हैं। वे भाव-विभोर होकर यह गीत गाते हैं कि ‘बोलो रे जमीन, बोलो रे आसमान, कौनसी दिशा में गए मेरे भगवान।’ उन्हें इस अवस्था में अपने भ्राता की तलाश में जंगल-जंगल भटकते देख कर दर्शक भी भावविभोर हो जाते हैं। काफी भटकने और तलाश करने पर वे मिलते हैं। अपने अनुज से काफी समय बाद मिलने और दुखद समाचार सुनकर प्रभु श्रीराम भी शोकाकुल हो जाते हैं। साथ ही बड़े होने का कर्त्तव्य निर्वहन करते हुए गले लगाकर सांत्वना देते हैं। भरत जी उनसे वापस अयोध्या चलकर राजपाट संभालने का आग्रह करते हैं पर पिता को दिए गए वचन को पूरा करने का हवाला देते हुए रामजी अयोध्या जाने से इंकार कर देते हैं। इस पर भरत भी वचन देते हैं कि वे भी गद्दी नहीं संभालेंगे बल्कि उनके लौटने का इंतजार करेंगे और नम आंखें लिए अयोध्या के लिए निकल जाते हैं।

विधायकद्वय भी पहुंचे रामलीला देखने

गुरुवार रात में रामलीला देखने के लिए बैतूल विधायक निलय डागा और आमला-सारणी विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे भी रामलीला मैदान पहुंचे। विधायक श्री डागा ने अपने संबोधन में समिति को रामलीला के 62 वें आयोजन के लिए धन्यवाद प्रेषित किया और बताया कि उनका परिवार रामलीला के प्रारंभ होने से ही समिति के साथ जुड़ा है। आगे भी पूरा सहयोग श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति को प्रदान करता रहेगा। विधायक डॉ. पंडाग्रे ने श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति का आभार व्यक्त किया कि आज के समय में जब लोग संस्कृति को भूल रहे हैं तब समिति ने अपनी धार्मिक संस्कृति को जीवित रखा है। केबीसी में सोनाक्षी सिन्हा यह नहीं बता पाई कि हनुमान जी संजीवनी बूटी किसके लिए लाए थे। एेसा ही हमारी आने वाली पीढ़ी के साथ ना हो, इसलिए वे अपने पुत्र एवं धर्मपत्नी संजू पंडागरे को भी रामलीला देखने लेकर आए हैं। उनके साथ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप साहू एवं डॉ. कीर्ति साहू भी साथ रामलीला देखने पहुंचे।

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