दामजीपुरा इलाके में लंपी बीमारी का कहर,बड़ी संख्या में पशुओं की हो रही मौत

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राजेश साबले जिला ब्यूरो 

दामजीपुरा इलाके में लंपी बीमारी का कहर,बड़ी संख्या में पशुओं की हो रही मौत,दर्जनों गांव के फैली बीमारी,ईलाज के अभाव में ग्रामीण बीमारी को काकड़ नकाने की पुरानी परंपरा अपना रहे,दामजीपुरा पशु चिकित्सालय में 4 वर्षों से नही डॉक्टर
देश के कई राज्यों में पशुओं और मवेशियों में लंपी वायरस का कहर फैलता जा रहा है. यह एक तरह की स्किन की बीमारी है, जिसमें गाय या भैंस के स्किन पर गांठें नजर आने लगती है. यह वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि राजस्थान, यूपी, बिहार और एमपी में हजारों की संख्या में पशुओं की मौत होने की ख़बर है। बैतूल के दामजीपुरा क्षेत्र के दर्जनों गांव में लंपी वायरस ने तेज गति से अपने पैर पसार लिए है। इस क्षेत्र के कुछ गांव में बड़ी संख्या में पशुओं की मौत होने की ख़बर भी है। दामजीपुरा में पशु चिकित्सालय तो जरूर है लेकिन डॉक्टर नही होने से ईलाके के पशुओं का उपचार नही हो पा रहा है। ग्रामीणों को समझ ही नही आ रहा है कि इस बीमारी का कैसे उपचार करें। प्रशासन इलाके में फ़ैली बीमारी से बेख़बर है। ग्रामीण गांव के भगत के साथ बीमारी को काकड़ नकाने के अपने पुराने तरीके को अपना रहे है। जानकारी के अनुसार मालूर और बोरकुण्ड में यह परंपरा आज ग्रामीणों द्वारा अपनाई गई है। आदिवासी बाहुल्य इस ईलाके में खेती के बाद ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख व्यवसाय दूध पर ही आश्रित है वंही क्षेत्र में यादव समाज का मुख्य व्यवसाय पशुपालन करना ही है जिनकी बड़ी संख्या में दामजीपुरा ईलाके में है। ऐसे में लगातार फैल रहे लंपी वायरस ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि बैतूल कलेक्टर ने पशु बाज़ारो पर प्रतिबंध लगा दिया है और जिले लंपी वायरस की रोकथाम के लिए टिका लगाया जा रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए टीकाकरण का विशेष अभियान चलाकर वायरस को और अधिक फैलने से रोकने की जरूरत है। वंही पशु पालकों को लंपी वायरस के कैसे रोके और ईलाज के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।