जीवनदायिनी होने के साथ ही प्रथम शिक्षक भी है मां

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राजेश साबले जिला  ब्यूरो 

जीवनदायिनी होने के साथ ही प्रथम शिक्षक भी है मां
शिक्षक दिवस पर भीम सेना ने संघर्षशील मां का किया सम्मान
22 वर्षों से चाय बेचकर 7 बच्चों का किया पालन पोषण, दिलाई उच्च शिक्षा
बैतूल। जीवनदायिनी होने के साथ ही मां प्रथम शिक्षिका होती है, इसी भावार्थ को समझते हुए भीमसेना ने सोमवार को अनोखी पहल करते हुए जिले की एक संघर्षशील मां का एक श्रेष्ठ शिक्षक के रूप में सम्मान किया। यह वही मां है जिसने 22 वर्षों से चाय बेचकर 7 बच्चों का न सिर्फ पालन पोषण किया बल्कि उन्हें काबिल भी बनाया है।


सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन के जन्मदिन पर जहां पूरा देश शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरुओं का सम्मान कर रहा है। वहीं बैतूल जिले में भीम सेना के सदस्यों ने एक ऐसी माता का सम्मान किया जो वास्तव में पूरी दुनिया के लिए संघर्ष की प्रतिमूर्ति का एक जीता जागता उदाहरण है। आपको बता दें कि महिला कमला उईके पिछले 22 वर्षों से अपने परिवार का पालन पोषण बैतूल जिला न्यायालय के सामने एक छोटी सी गुमठी पर चाय बेचकर कर रही है। अपने पति के साथ उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर एक गुरु और ममता का जीता जागता उदाहरण पेश किया है। 2 वर्ष पूर्व पति की मृत्यु हो जाने के बाद महिला पर और ज्यादा जवाबदारी आ गई। उसके बाद भी उस महिला का दृढ़ निश्चय नहीं डगमगाया और निरंतर अपने परिवार के पालन पोषण के लिए प्रयासरत है।
–बच्चों को दिलाई उच्च शिक्षा–
कमला के 7 बच्चे हैं जिन्हें चाय बेचकर उन्हें उच्च शिक्षा दिलाई गई। मां के संघर्ष में बच्चे भी उनका साथ देते हैं।बच्चों का कहना है कि यदि दृढ़ निश्चय और लगन है तो बड़ी से बड़ी जंग जीत सकते है। महिला का उत्साहवर्धन करने के लिए भीम सेना ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ गुरु की तुलना देकर शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया। भीम सेना का कहना है कि कमला उईके का सम्मान कर संगठन के पदाधिकारी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। भीमसेना के जिला अध्यक्ष रवि सिंगारे ने बताया कि भीम सेना द्वारा समय-समय पर देश और समाज की उन विभूतियों का सम्मान करते है, जो वास्तव में बाबा साहेब के उन सपनों को पूरा करते हैं जो उन्होंने संविधान बनाते समय देखे थे।