सरकार से सवाल – आखिर इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है ….?

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मनोहर भोपाल /दिवाकर पांडेय सतना /सुनील यादव कटनी

उत्तरप्रदेश के बाद अब मध्यप्रदेश में भी आवारा लावारिस पशुओं का मुद्दा गहराने लगा है। जो सड़कों पर काल बन कर धूमते है। हम बचे तो वो गए , और वो बचे तो हम, यानी कुल मिला कर सड़क पर चलना यानी शतरंज के खेल शह और मात  से कम नहीं है। वही दूसरा यदि इनसे कोई सबसे ज्यादा परेशान है तो वो है हमारा किसान। जिनकी बेशकीमती खून पसीने की मेहनत की फसल को ये मवेशी आधीरात को इनके खेतों में घुस चट कर जाते है।

यह बहुत बड़ा विषय है, लेकिन सरकार का ध्यान पता नहीं कहां है। ऐसा नहीं की किसानों ने इसकी शिकायत नहीं की। कई बार  मुख्यमंत्री के नाम एस. डी.एम.को ज्ञापन भी दिए गए। लेकिन  इस ओर कोई विशेष ध्यान नही दिया गया। जिसकी परिणति जो हाल ही के सतना जिले में मवेशियों के प्रति क्रूरता की एक तस्वीर सामने आई। जिसमे आरोपियों को जेल भेज दिया गया। लेकिन वही दूसरी तस्वीर भी कटनी जिले के सामने आई  जिसमे एक ट्रक ने 12 मवेशियों को कुचल दिया। आखिर इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है। क्या लाखों का अनुदान लेने वाली गौशालाएं या स्थानीय प्रशासन या फिर वो मालिक जिन्होंने इन्हे सड़कों पर छोड़ दिया। जब तक इन जिम्मेदारों पर कोई कड़ी कारवाही नहीं होती ये व्यवस्था सुधरने वाली नहीं है। जुर्माने के साथ इनसे नुकसान की भी भरपाई होनी चाहिए।

अब आप ही बताइए ऐसे लावारिस मवेशियों से कितना नुकसान होता है,( 1) इंसानों की जान जाती है, (2) मवेशियों की जान जाती है,
और तीसरा नुकसान हमारे किसान भाई इतनी मेहनत से फसल उगाते हैं, जिनको फसल पकने तक यह भय बना रहता है कि ज्यादा बारिश होगी तो फसल नष्ट हो जाएगी, बारिश कम होगी तो फसल नष्ट हो जाएगी ,उसके बाद मवेशियों का सबसे बड़ा भय बना रहता है,आखिर किसान करे तो करे, क्या खेती करना बंद कर दे, हमारे मध्य प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का अकेले 47% योगदान है जिससे यह साबित होता है कि हमारा मध्य प्रदेश कृषि पर आधारित है लेकिन किसानों के प्रति सरकार का ध्यान क्यों नहीं आ रहा, सत्ता में इतने व्यस्त है कि अन्नदाता के समस्त के लिए समय नहीं है,