केएससी द्वारा पार्श्व गायकों की याद में “यादों के झरोखों से” कार्यक्रम हुआ संपन्न

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कैलाश पाटिल 

  • केएससी द्वारा पार्श्व गायकों की याद में “यादों के झरोखों से” कार्यक्रम हुआ संपन्न
  • कलाकारों ने एक से बढ़कर एक पुराने गीतों की प्रस्तुति देकर दी श्रद्धांजलि।

सारनी। रविवार को कराओके सिंगर क्लब सारनी के तत्वधान में कैलाश नगर शोभापुर के डोंगरे मैरिज लॉन में सिनेमा जगत के सुप्रसिद्ध गायकों की याद में एक संगीतमय कार्यक्रम यादों के झरोखों से शाम 7 बजे के लगभग प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विक्रांत गावंडे, रवि नागले, राजेश वरवड़े एवं केएससी के कलाकारों द्वारा विद्या एवं संगीत की देवी मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया गया।

कार्यक्रम के शुभारंभ में राजेश वरवड़े ने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर, मुकेश एवं भूपेंद्र सिंह के गाए हुए गीतों के मुखड़े गाकर समां को बांधा। तत्पश्चात राहुल गवई ने तेरे जैसा यार कहां, माला नागले ने तुम मुझे यूं भुलाना, विजय नागले ने आज मौसम बड़ा बेईमान है, विजय जावलकर ने एक अजनबी हसीना से, विक्रांत गावंडे ने गम का फसाना बन गया, दिलीप पुआर ने छलकाए जाम और कैलाश पाटिल पत्रकार ने ये रेशमी जुल्फें ये शरबती आंखें गाया।

संतोष नागले मेरी तमन्नाओं की, रवि नागले अगर तुम ना होते तथा रेखा मस्की ने तेरा मेरा प्यार अमर गाकर सभी सुनने वाले संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर झूमने को मजबूर कर दिया और लोगो ने खूब तालियां बजाई। वही केएससी के रवि नागले ने बताया कि फिल्मी जगत के महान पार्श्व गायक जो आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी मधुर आवाज आज हर दिलों में राज कर रही है और उनके द्वारा गाए गए गीतों को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सुने जाते हैं और लोग गुनगुनाते रहते हैं। देश के महान पार्श्व गायकों की याद में हम उन्हें श्रद्धांजलि उनके द्वारा गाए गये गीतों को गाकर ही दे सकते हैं।

यादों के झरोखों से कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। वहीं कार्यक्रम में बैतूल आकाशवाणी से आए नामदेव अतुलकर एवं उनके साथी ने भी कार्यक्रम की खूब प्रशंसा की। वही सिंथेसाइज़र पर सास्वत वरवड़े, ओजस वरवड़े, गिटार विजय जावलकर, दिलीप बाथरी, तबला अंकित चंदेलकर, जितेंद्र नामदेव, आक्टोपैड रवि तायवाड़े, ढोलक राकेश उपराले, कांगो दिलीप पुआर, बेंजो तुलसी चन्देलकर और डोगरे साउंड सर्विस अंशु डोगरे। कार्यक्रम सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रोतागण में उपस्थित थे।