झाँसी खजुराहो हाई वे — ख़ूनी सड़क

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Vinay Gupta

  • झाँसी खजुराहो हाई वे — ख़ूनी सड़क
    – सड़क पर चलने का टोल भी दो और मवेशियों के विचरण से मौत का सामना करो
    – एनएचआई और पीएनसी कंपनी पर दर्ज होना चाहिये गैर इरादतन हत्या का मामला

झाँसी खजुराहो हाई वे एक ओर हादसा जिसमे अग्रवाल दम्पति की मृत्यु हो गई। कारण वहीं पुराना जो मवेशियों के विचरण और हाई वे की देखरेख करने वाले जिम्मेदारो की लापरवाही से जुडा है। हाईवे पर चलने का टोल इसलिये ही दिया जाता है ताकि वाहन चालकों को सुविधा मिले लेकिन यह हाईवे ख़ूनी सड़क में बदलता जा रहा है।

प्रतिदिन सड़क हादसे हो रहे है जिसमे मौत हो रही है और हाईवे की व्यवस्था जिस कम्पनी और जिम्मेदार अधिकारियो पर है वह जानबूझकर लापरवाही बरत रहे है। तभी सवाल उठता है कि सड़क पर चलने का किराया देने के बाद भी मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाये होना, आखिर कौन जिम्मेदार है और इन पर गैर इरादतन हत्या का मामला क्यों दर्ज नहीं होता है।

झाँसी खजुराहो हाई वे यानि वाहनों की तेज रफ़्तार। सरकार इन हाई वे को बड़ी उपलब्धि मानती है। दावे होते है कि चिकनी सड़क से अधिक दूरी कम समय में पूरी होंगी। दावा करने वाले यह भूल जाते है कि यह तब संभव है जब वाहन चालकों को सुविधा मिले। एनएचआई की ठेकेदार कंपनी पीएनसी वाहनों से टोल वसूली ही सुविधा मुहैया कराने के लिये वसूलती है। वाहन चालक भी टोल के रूप में सुविधा शुल्क देते है लेकिन झाँसी खजुराहो हाई वे टोल देने के बाद भी ख़ूनी सड़क बन चुका है। पूरे हाई वे पर सैकड़ो मवेशियों का डेरा है जिससे रोज सड़क दुर्घटनाये हो रही है। तेज रफ़्तार वाहन के सामने अचानक मवेशी आ जाते है और वाहन चालक संतुलन खो बैठता है। हाई वे पर सड़क दुर्घटनाओ में रोज किसी ना किसी की मौत हो रही है और लोग गंभीर चोटिल हो रहे है। एक प्रकार से यह मानव कारित हत्या है जिसके लिये सीधे तौर पर एनएचआई के जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार कंपनी पीएनसी दोषी है। जो प्रतिदिन मवेशियों के कारण होती सड़क दुर्घटना में मौत के बाद भी जानबूझकर लापरवाह बने है। कानूनी जानकर बताते है कि हाई वे पर सुविधा देने के लिये टोल दिया जाता है। इसके बाद भी जिम्मेदारो की लापरवाहियो के कारण अगर सड़क हादसे में किसी की मौत होती है तो हाई वे की व्यवस्था सम्हालने वालो पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिये।