प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा महिला सशक्तिकरण का अनूठा कार्य – बी.के.डॉ. रीना

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हर्षिता वंत्रप भोपाल- 

  • विश्व शांति दिवस के रूप में मनाई गई ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 51 वीं पुण्यतिथि
  • दानिश नगर भोपाल 18 जनवरी

 

प्रजापिता ब्रह्मा बाबा प्रेरणा देते थे कि जगत की माताओं और कन्याओं अब जागो और ज्ञान की ललकार करो। तुम्हारे द्वारा ही जगत का कल्याण होना है। जब माता गुरु बनेगी, तभी भारत के संतानों का उद्धार होगा। तुम्हारे कारण ही भारत का उत्थान रुका है । भारत मां के लाल ज्ञान के बिना विकारों में ग्रस्त हैं आसुरियता से संत्रस्त हैं और दुख तथा शांति से कराह रहे हैं कितनी ही कन्याओं माताओं ने उनकी इस चुनौतीपूर्ण प्रेरणादायक ध्वनि से जागृत होकर राज ऋषि अथवा राजयोगिनी के आसन को ग्रहण किया और मन में अपने आप से प्रतिज्ञा की की अब हम अपने आप को पांच विकारों से मुक्त करके ही दम लेंगे और भारत भूमि पर निर्विकारी स्वराज्य स्थापित करके ही रहेंगे। बाबा की उन्हीं शिक्षाओं और प्रेरणाओं का ही मधुर फल है कि आज ब्रह्माकुमारी बहनों माताओं का इतना बड़ा शक्ति दल भारत को पवित्र बनाने में लगा है।

उक्त विचार ब्रह्माकुमारीज़ दानिश नगर सेंटर की मुख्य संचालिका बी.के. डॉक्टर रीना बहन जी ने पिताश्री प्रजापिता ब्रह्मा के 51 वें अव्यक्त आरोहण के अवसर पर आयोजित विश्व शांति दिवस के दिन व्यक्त किए।

विश्व शांति दिवस के रूप में मनाई गई ब्रह्माबाबा की 51वीं पुण्य तिथि

ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्माबाबा की 51वीं पुण्य तिथि 18 जनवरी, शनिवार को  विश्व शांति दिवस के रूप में मनायी गई। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के दानिश नगर सेवाकेंद्र में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों ब्रह्मावत्स शरीक हुए तथा अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
संस्था की दानिश नगर सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. डॉ. रीना बहन जी ने कहा कि 18 जनवरी को प्रजापिता ब्रह्माबाबा ने अपने नश्वर शरीर का त्याग किया था। इस अवसर पर सेवाकेंद्र में प्रात: काल से ही ध्यान साधना का दौर प्रारम्भ हो गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में आये लोग भी मौन साधना कर पूरे विश्व में शांति एवं सुकुन की कामना की।

परमात्मा के बताए हुए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की पुण्यतिथि

18 जनवरी का दिन हमारे लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण दिवस है। 18 जनवरी 1969 को  ब्रह्माकुमारी संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने अपने भौतिक शरीर का त्याग कर अव्यक्त वतनवासी बने थे। ब्रह्माकुमारी संस्था के देश-विदेश में स्थित हजारों सेवाकेंद्रों में उनकी 51 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पूरे विश्व में एक साथ और एक ही समय पर श्रद्घांजलि सभा का आयोजन किया गया । यह कार्यक्रम संस्था के मुख्यालय माउण्ट आबू स्थित पाण्डव भवन और शांतिवन में मुख्य रूप से आयोजित किए गया । इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए देश-विदेश से हजारों लोग संस्था के मुख्यालय पहुंचे। विश्व में शांति और सद्भावना के लिए कार्यरत ब्रह्माकुमारी संस्था ने आज पूरे विश्व में एक अलग पहचान बनायी है।

उनकी पुण्य तिथि को विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस हमें विशेष रूप से सम्पूर्णता की स्थिति को प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। प्रजापिता ब्रह्मा बाबा त्याग और तपस्या की जीती जागती मिसाल हैं। उन्होंने परमात्मा के बताए हुए मार्ग पर चलकर मानव जीवन को एक नई दिशा दी। जिस राह पर चलकर आज लाखों लोगों ने अपने जीवन की बगिया में खुशियों के फूल खिलाए हैं। जो उनके बताए हुए मार्ग पर चलकर आजीवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लेकर सतयुगी सृष्टि की स्थापना का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मानव को यही बताया कि जैसे हमारे  संकल्प होंगे वैसी हमारी सृष्टि बनेगी। यदि हमें पावन सृष्टि और नया भारत चाहिए तो हमें सदा श्रेष्ठ संकल्प करने होंगे। जिसमें हिंसा का कोई स्थान न हो। तभी मानव के साथ-साथ यह सृष्टि भी पावन बन  सकेगी।
ऐसे दिव्य महान विभूति की 51 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर हम उन्हें श्रद्घा सुमन अर्पित करते हैं और यही संकल्प करते हैं कि हम उनके बताए हुए मार्गों पर चलकर मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करेंगे।

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