मुर्गी खाने का प्रयास कर रहे अजगर को मारा, आदिल के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज

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Harshita wantrap

सारनी।
पाथाखेड़ा की बंद हो चुकी पीके टू माइन्स के सामने मौजूद पाथाखेड़ा स्थित बजरंग कॉलोनी में उस समय लोग दहशत में आ गए जब लगभग सात फिट लंबा अजगर मुर्गी को खाने का प्रयास कर रहा था। इसके बाद वहां भीड़ जुट गई और भीड़ में मौजूद एक शख्स ने अजगर को बेरहमी से डंडे से पीट-पीट कर मार दिया,

जिसका वीडियो वायरल होने पर सारनी निवासी वाइल्डलाइफ एंड नेचर कंजर्वेशन एक्टिविस्ट आदिल खान ने इसकी सूचना उत्तर वन मंडल बैतूल के वन मंडलाधिकारी को दी जिसके बाद मौके पर सारनी रेंज का वन अमला पहुंचा। आदिल पहले ही मौके पर पहुंच गए थे, वन विभाग के आने के बाद आदिल ने वन विभाग को अजगर की डेड बॉडी ज़ब्त करवाई, जिसके बाद वन विभाग मामले की जांच में जुट गया है।

आदिल ने बताया कि उन के माध्यम से अधिकांश सांपों के रेस्क्यू निशुल्क किए जाते हैं, परंतु फिर भी जागरूकता की कमी के चलते लोगों ने अजगर को मार दिया जबकि अजगर ज़हरीला भी नहीं होता। आदिल ने कहा कि वन विभाग को इस संबंध में मुहिम चलाना चाहिए और जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरुक करना चाहिए।

आदिल ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि अजगर को इंडियन रॉक पाइथन भी कहा जाता है और इसे वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत शेड्यूल एक में रखा गया है, आपको जानकारी के लिए बता दें कि बाघ और तेंदुआ भी शेड्यूल एक में ही आता है, अजगर को संरक्षण प्राप्त है और जितनी सज़ा किसी बाघ या तेंदुए को मारने पर होती है उतनी ही अजगर मारने पर भी होती है। आदिल ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि अजगर ज़हरीले नहीं होते और ज़्यादातर दलदली इलाकों के आसपास रहते हैं,

जहां यह अजगर निकला था वह क्षेत्र वन क्षेत्र से बिल्कुल सटा हुआ है और एक तरह से देखा जाए तो अजगर का नेचुरल हैबिटेट है फिर भी लोगों ने उसे सिर्फ इसलिए मार दिया क्योंकि वो उनकी मुर्गी को खा रहा था, जबकि अगर अजगर किसी का पालतू जानवर खा भी लेता है तो वन‌ विभाग के माध्यम से पशु के मलिक को मुआवजा राशि दिलवाई जाती है। वहीं आदिल ने वहां मौजूद लोगों को सांपों के संबंध में जानकारी दी और वहां मौजूद लोगों से सांपों के संरक्षण में सहयोग देने की अपील भी की है।