मध्यप्रदेश किरायेदारी अधिनियम में 16 अगस्त तक दे सकते हैं सुझाव/आपत्तियाँ

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मनोहर

भोपाल-भारत सरकार द्वारा जारी आदर्श किरायेदारी अधिनियम-2020 के आधार पर मध्यप्रदेश किरायेदारी अधिनियम-2021 तैयार किया गया है। अधिनियम का प्रारूप नगरीय विकास एवं आवास विभाग की वेबसाइट www.mpurban.gov.in पर उपलब्ध है।

प्रदेश के नागरिक, हितबद्ध व्यक्ति, संस्थाएँ प्रारूप पर अपने सुझाव या आपत्तियाँ 16 अगस्त, 2022 तक दे सकते हैं। सुझाव या आपत्तियाँ ई-मेल आई.डी. commissioner3@mpurban.gov.in एवं rkkartikey@mpurban.gov.in पर भेज सकते हैं।

किरायेदारी अधिनियम-

मध्यप्रदेश में जल्द ही आदर्श किरायेदारी कानून लागू होने जा रहा है. सरकार आदर्श  किरायेदारी अधिनियम-2020 (एमटीए) को जल्द ही लागू करने की तैयारी में है. जिसके अनुसार मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच एक लिखित कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जाएगा. जिसमें किराए से लेकर हर बड़ी से छोटी जिम्मेदारी तय की जाएगी. यहां तक की ये भी साफ रहेगा कि मकान की पुताई कौन करवाएगा, तो नल की टोटी से लेकर वॉश बेसिन और पंखे या खराब स्विच कौन बदलवाएगा.

केंद्र की मंशा इसे अक्टूबर में ही लागू करने की है. प्रदेश में ये अधिनियम पहले शहरी क्षेत्र में लाया जाएगा. कानून लागू होने के बाद मकान मालिक और किरायेदार के बीच किसी भी तरह कोई समस्या की सुनवाई किराया प्राधिकरण और किराया न्यायालय में की जाएगी.

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने मध्य प्रदेश समेत सभी राज्यों में किरायेदारी अधिनियम वाली गाइडलाइन भेजने के साथ ही 1 अक्टूबर से पहले आम लोगों के आवश्यक सुझाव सार्वजनिक पोर्टल पर डालने के निर्देश दिए हैं. मध्य प्रदेश में नगरीय आवास एवं विकास विभाग के विभागीय पोर्टल पर इस मॉडल टेनेंसी एक्ट (एमटीए) पर सुझाव के लिए डाला जाएगा.

नए कानून के अनुसार किराएदार और मकान मालिक की जिम्मेदारी?

मकान और दरवाजे, खिड़की के पेंट की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी. नलों की मरम्मत हो या पाइप में खराबी हो, इन सबको मकान मालिक ही कराएगा. साथ ही इलेक्ट्रिक वायरिंग और बड़े बिजली से जुड़े सभी काम भी मकान मालिक के जिम्मे होंगे. 

वहीं नल वॉशर और नलों को बदलने की जिम्मेदारी किराएदार की होगी. टॉयलेट, वॉश बेसिन, गीजर, बॉथ टब, नाली सफाई जैसे कार्य किराएदार को कराने होंगे. इलेक्ट्रिक सॉकेट, स्विच, पंखे और छोटे बिजली उपकरणों का मेंटनेंस भी किराएदार को स्वयं करानी होगी.

अधिनियम लागू होने पर क्या होगा बदलाव
* प्रत्येक जिले में किराया प्राधिकारी में डिप्टी कलेक्टर, रेंट कोर्ट के लिए अतिरिक्त कलेक्टर होंगे. हाईकोर्ट के परामर्श से सभी जिलों में किराया न्यायालय के संचालन के लिए जिला न्यायाधीश या अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नियुक्त किए जाएंगे.
* मकान मालिक और किराएदार का करारनामा उनकी मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होगा.
* किराएदार की मृत्यु के तत्काल बाद उत्तराधिकारी से जबरिया मकान खाली नहीं कराया जा सकेगा.
* मकान मालिक और किराएदार के बीच सहमति से ही किराया तय होगा.
* अधिनियम के लागू होने के बाद मकान मालिक अपनी मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे.
*अधिनियम लागू होने के बाद सिविल कोर्ट में अपील या वाद दायर नहीं हो सकेगा.
* मकान मालिक बिना डर के संपत्ति किराए पर दे सकेंगे.