अंजना नाथ के गीतों पर मंत्रमुग्ध हुए श्रोता, पाथाखेड़ा में शुरू हुआ दो दिवसीय कजरी महोत्सव एवं महिंदर मिसिर समारोह

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ब्यूरो रिपोर्ट

सारनी। भोजपुरी साहित्य अकादमी द्वारा पाथाखेड़ा के ऑफिसर क्लब में आयोजित कजरी महोत्सव की पहली शाम शास्त्रीय गायिका अंजना नाथ के नाम रही। पटियाला घराने की गायिका अंजना नाथ ने एक से बढ़कर एक कजरी गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दो दिवसीय कजरी महोत्सव एवं महिंदर मिसिर स्मृति समारोह का शुभारंभ विधायक डॉ योगेश पण्डागरे ने दीप प्रज्वल्लन कर किया।

इस अवसर पर डब्लू सीएल के क्रमिक प्रबंधक जितेंद्र प्रसाद,श्रमिक नेता कामेश्वर राय, भरत सिंह,प्रमोद सिंह,नपा उपाध्यक्ष भीम बहादुर थापा, सांसद प्रतिनिधि दशरथ सिंह जाट सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सुधा चंद्रा भोजपुरी एकता मंच के जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह संरक्षक अवधेश सिंह , भाजपा मण्डल अध्यक्ष नागेंद्र निगम , डब्ल्यूसीएल ऐपीएम जितिन प्रसाद नपा स्वच्छता निरीक्षक कमल किशोर भावसार, महामंत्री प्रकाश शिवहरे किशोर बर्दे सहित कई गणमान्य नागरिक मंच पर मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन स्थानीय समन्वयक कमलेश सिंह ने किया। भोजपुरी एकता मंच के पीके सिंह,जीपी विजेंद्र सिंह सुदामा सिंह मनोज ठाकुर,शिबू सिंह,धर्मेंद्र राय,सुनील सिंह,शिवा गुप्ता, लक्ष्मण साहू सुभाष चौरसिया मिंटू राय हलचल गुप्ता संजय सिंह भोला सिंह हरेंद्र भारती चेतन गुप्ता ने अतिथियों एवं कलाकारों का स्वागत किया।

इस अवसर पर कलकता की सुप्रसिद्ध गायिका अंजना नाथ ने अपने कजरी गीतों की शुरूआत-” सावन आया झूला डारो सखी बाजन लागे मोहन की मुरलिया” गीत से की। इसके बाद अंजना ने अलग अलग राग में कजरी गीतों की प्रस्तुति दी। उनके द्वारा प्रस्तुत कजरी गीत- “नीबूआ तले डोला रख दे मुसाफिर आई सावन की बहार” श्रोताओं ने खूब पसंद किया। अंजना नाथ द्वारा प्रस्तुत गीत- “भींग जाऊं तो गुइयां बचाए लाईयो, बरसन लागे बदरिया”पर देर तक तालियां बजती रही। श्रोताओं की फरमाइश पर अंजना नाथ ने कुछ ठुमरी गीत भी सुनाए। कार्यक्रम में सैकड़ो की संख्या में मौजूद संगीत प्रेमियों ने कार्यक्रम का आनन्द लिया।

दम तोड़ती जा रही लोक विधाएं-डॉ अकेला

सारनी। कजरी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर व्यख्यान देते हुए मेघालय यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक एवं लोक कला समीक्षक डॉ अकेला ने कहा कि न सिर्फ शहरी क्षेत्र बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी लोक विधाएं दम तोड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि कजरी सिर्फ एक गीत नही बल्कि सावन की सुंदरता और उल्लास का प्रतीक है। कृष्ण की प्रेम लीलाओं से लेकर आजादी की लड़ाई तक कई पौराणिक एवं ऐतेहासिक गाथाओं की झलक हमे कजरी गीतों में मिलती है। श्री अकेला ने लोक साहित्य में कजरी एवं नारी शक्ति विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया एवं भोजपुरी रचित कविताएं सुनाई।

लोक परम्पराओं का संरक्षण जरूरी- डॉ पण्डागरे

सारनी। कजरी महोत्सव के मुख्य अतिथि डॉ योगेश पण्डागरे ने कहा कि लोक परम्पराओं एवं लोक संस्कृतियों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ साथ लोक संस्कृतियों के संरक्षण के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। डॉ पण्डागरे ने कहा कि कोरोना काल के बाद आप सभी मांग पर संस्कृति विभाग के सहयोग से यह कार्यक्रम फिर से प्रारंभ किया गया है। विधायक ने उपस्थित जन समुदाय से एक दूसरे की संस्कृतियों का सम्मान सम्मान करने एवं सामाजिक सौहाद्र बनाये रखने की अपील की।