TV और कम्प्यूटर खरीदी के मामले ने पकड़ा तूल,जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने ऊपर लगे आरोपो को किया सिरे से खारिज

Scn news india

 

विनय गुप्ता जिला ब्यूरो 

छतरपुर-जिले के 17 स्कूल में हुई खरीदी के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी HC दुवे ने अपनी सफाई देते हुए कहा है TV और कम्प्यूटर खरीदी के जो आरोप लगाए जारहे पर निराधार है,डीईओ हरिश्चचंद्र दुबे और लोकसेवक रामहित व्यास को दोषी बनाने के पीछे जेडी सागर मनीष वर्मा और संतोष कुमार शर्मा की भूमिका दिखाई दे रही है,जेडी सागर ने जिस शिकायत पर जांच कर फर्जी प्रतिवेदन बड़ी तत्परता से 7 दिन में मांगा है उसके यह मुख्य विंदु है

1.वही जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया 1.75 करोड़ यह घोटाला संतोष कुमार शर्मा के डीईओ के पद पर रहने के दौरान नीति आयोग के निर्देशों के अनुपालन में 123 स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने के नाम पर उपकरणों की खरीदारी करने का घोटाला है,जिस पर कोई कार्यवाही नही हुई

2. डीईओ दुबे और रामहित व्यास को प्राप्त नोटिस में लिखा गया है कि टीवी पर कंपनी का स्टिकर नहीं लगा है जबकि टीवी लगाते समय के वीडियो में कंपनी वीडियोकॉन लिखा हुआ

3. नोटिस में यह भी लिखा कि configurarion में Intel i5 लिखा लेकिन खरीदा कुछ और गया है तो मनीष वर्मा की चुनी गई तकनीकी टीम को यह तक नही पता कि configuration में intel/AMD खरीदने के निर्देश थे और Intel i5 अथवा equivelent लेने को कहा गया

4. नोटिस में जांच केवल 16 स्कूलों की ही की गई, जबकि 17 स्कूलों में सामान खरीदा गया। एक स्कूल अयूब खान वाला शासकीय उ मा वि वाला,अतरार। अयूब खान की राइटिंग में जहां इसी बिंदुओं पर शिकायत के पन्ने सोशल मीडिया पर दौड़ लगा रहे है, वही अयूब खान ने खुद नियम विरुद्ध तरीके से सामान gem portal से न खरीदते हुए लोकल की दुकान से सामान खरीदा है और गजब तो तब हो गया साहब, जब सामान का मूल्य बराबर यानी 60000 की टीवी और 60000 का कंप्यूटर, लेकिन जेडी सागर अयूब खान के स्कूल को जांच में लेना ही भूल गया इससे साफ जाहिर होता है कि जेडी मनीष वर्मा ओर अयूब खान की साठगांठ है

5. तकनीकी सत्यापन हेतु समिति जिला स्तर से नही राज्य स्तर से निर्धारित की गई थी जो कि हर ब्लॉक स्तर पर अलग अलग व्यक्तियों की थी और इन तकनीकी समितियों के सामग्री के सत्यापन करने के उपरांत ही भुगतान की नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई। भुगतान में डीईओ दुबे और एडीपीसी आर एस भदौरिया के संयुक्त हस्ताक्षर से ifms पोर्टल से भुगतान होता है

6. वही DEO ने सामान अपात्र फर्मों से खरीदने के मामले में कहा मनीष वर्मा जी आप एक बार gem portal के नियम तो पड़ लेते। शासन के Gem पोर्टल पर कोई भी अपात्र कंपनी बिना जीएसटी के रजिस्टर्ड ही नही होती और न BID की प्रक्रिया में शामिल हो सकती है, न सामग्री प्रदान कर सकती है। वेबसाइट स्वयं अपात्र फर्मों को शामिल होने से तकनीकी रूप से रोक देती है

सूत्रों की माने तो संतोष कुमार शर्मा पूर्व डीईओ जिनकी 03 साल की ऑडिट कराए बिना जेडी सागर अनेकों जांच लंबित होने पर, अनेकों जांचों में दोषी पाए जाने पर भी संतोष शर्मा जैसे भ्रष्ट कर्मचारी को बचाते हुए, उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही न करके संतोष कुमार शर्मा को क्लीन चिट देने का धूर्त काम कर रहे है, लेकिन अब मनीष वर्मा भी अनेकों मामलों में लपेटे में आयेंगे। उनके कार्यालय में पदस्थ अमला भी उनके विरोध में है और उनके बहुत से मुद्दों पर चुप्पी तोड़ते हुए कार्यवाही की मांग करते नजर आ रहे है। भ्रष्टाचार में संतोष कुमार शर्मा के साथ संलिप्तता ही मनीष वर्मा के पतन का कारण बनेगा और जल्द ही एक बड़ा खुलासा होगा