मानवी लिपि के जनक सेवा निवृत प्रधान पाठक श्री रामगिरी शंकर गोस्वामी जी का निधन

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राजेश साबले जिला ब्यूरो 

बैतूल – ग्राम खेड़ी सावली गढ़ – मानवी लिपि के जनक सेवा निवृत प्रधान पाठक श्री रामगिरी शंकर गोस्वामी  का  शाम 4:00 बजे दुःखद निधन हो गया

वे 90 वर्षीय के थे। शाम गोधुली बेला में श्री राम गिरी गोस्वामी ने अंतिम सांस ली।  शिक्षा के आधुनिकरण के चलते एक और जहां आए दिन नए-नए सॉफ्टवेयर तैयार किए जा रहे हैं वही एक रिटायर्ड शिक्षक ने नई वर्णमाला ही जात की थी।  इस वर्णमाला में मात्र 10 अक्षर और 2 अंक रखे थे 3 अक्षरों और अंको से पूरी भाषा और गणित तैयार हो जाते थे।

इस लिपि का नाम मानवी लिपि रखा गया था श्री गोस्वामी ने वर्षों की मेहनत के बाद यह सफलता पाई थी इस लिपि में 10 अक्षर बनाए गए थे जिनकी आकृति बिल्कुल भिन्न है सभी अक्षरों के मुख ऊपर की ओर हैं लिपि की प्रत्येक आकृति का मुख दिशा क्रम से ऊपर नीचे दाएं दाएं 4 तरफ लिया जाता है इसमें स्वर और व्यंजन का अलग से नहीं बल्कि 10 आकृतियों के दिशा क्रम से सभी वर्णो अक्षरों का उच्चारण हो जाता है इस लिपि में मात्राएं नहीं सिर्फ एक रेखा(-) चिन्ना होता है लिपि में दो प्रकार की ध्वनि का उच्चारण होता है जिसे स्वतंत्र ध्वनि और अर्ध ध्वनि नाम दिया जाता है क्रश चिन्ह लगाने से ध्वनि का आधा उच्चारण होता है इस लिपि से अन्य भाषाओं को समझने में आसानी होती है इसके अलावा अंकों के ज्ञान के लिए मात्र 2 अंक लिए है इन अंको से एक से लेकर 100 और हजारों तक की गिनती आसानी से सीखी जा सकती है 1 अंक में मात्र 1 लाइन का प्रयोग कर अन्य अंक बनाए जाते हैं।

खेल खिलौने रंगोली कसीदा पकवान गुलदस्ते आदि में भी इस आकृति को उभार कर मानवी लिपि को सरलता से सीखा जा सकता है श्री गिरी की नातिन ने इस लिपि से आकृति बनाकर व्यंजन पुष्पगिरी गुलदस्ते रंगोली की पुस्तकें भी बनाई है इन पुस्तकों में बनी हर आकृति का एक मानवीय अर्थ है श्री गिरी ने बताया था कि कि धर्म भाषा बोली जाती उच्च नीच भेदभाव इनमें अलग बिखरे मानव समुदाय में एकता का स्वरूप लाने मानव ध्वनि एकमात्र आधार है उनका मानना था कि मानवीय लिपि अपनाकर समाज को एकता की दिशा प्रदान कर सकते हैं यह लिपि कम समय में सीखी जा सकती है गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया मिनिस्ट्री आफ हुमन रिसोर्स डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन एंड हायर एजुकेशन नई दिल्ली में उन्होंने इसका रजिस्ट्रेशन करा चुके थे इतने बड़े ज्ञानी आज हम सब को छोड़ कर चले गए हैं सबको साथ लेकर चलने की हिम्मत देने वाले श्री राम गिरी गोस्वामी को एस सी एन न्यूज़ परिवार श्रद्धांजलि देता है