निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद भी हो रहा उलंघन, प्रत्याशियों को होगा नुकसान

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राजेश साबले जिला ब्यूरो 

जैसे ही जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। वैसे ही प्रमुख राजनैतिक दल कांग्रेस और भाजपा से जुड़े नेता एवं कार्यकर्ताओं ने जिपं सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए अपनी-अपनी पार्टी के राजनैतिक आकाओं से समर्थन के लिए भागदौड़ करना शुरू कर दी थी। दोनों दलों ने भी जोरशोर से अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी थी।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा ने 9 जून को जिला पंचायत सदस्यों के 23 चुनाव क्षेत्रों में से लगभग 16 क्षेत्रों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। वहीं भाजपा ने भी उसी दिन जिलाध्यक्ष आदित्य बबला शुक्ला के द्वारा 19 जिला पंचायत सदस्यों को पार्टी के समर्थन की सूची जारी कर दी। और इन सूचियों में अनारक्षित क्षेत्र से दोनों ही पार्टी के प्रमुख नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा गया।
कल ही जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी का एक आदेश सामने आया है। जिसके अनुसार पंचायत चुनाव में कोई भी प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में किसी भी राजनैतिक दल से अपनी संबंद्धता या समर्थन का प्रचार नहीं करेगा।
इस आदेश का यह भी अर्थ निकाला जा रहा है कि अब प्रत्याशी अपने विज्ञापनों, पर्चे, पोस्टर, फ्लैक्स और अन्य प्रचार सामग्री में किसी भी नेता या सहयोगी कार्यकर्ता और फोटो और नाम का उल्लेख नहीं कर पाएगा। यदि यह सही है तो अब जिन उम्मीदवारों ने ऐसी प्रचार सामग्री तैयार करवा ली है उनको दोहरा नुकसान उठाना पड़ेगा। एक तो पैसा पानी में गया और दूसरा उनके चुनाव क्षेत्र में उनकी पार्टी के समर्थक मतदाताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।

कांग्रेस ने अपने जिन उम्मीदवारों को समर्थन की घोषणा की थी उनमें से वरिष्ठ नेता और क्षेत्र क्रमांक 2 से चुनाव लड़ रहे नारायण सरले, क्षेत्र क्रमांक 7 से लड़ रही संगीता परते और क्षेत्र क्रमांक 10 से चुनाव लड़ रहे हर्षवर्धन नारायण धोटे को छोड़कर बाकी सभी उम्मीदवार क्षेत्र के लिए नए हैं और उन क्षेत्रों में कांग्रेस समर्थित मतदाता भी इन प्रत्याशियों को वोट देने के पहले असमंजस में रहेगा। क्योंकि अब ये प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, सुनील शर्मा और निलय डागा के नाम और फोटो का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

इसी तरह से भाजपा ने भी अपने जिन समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी करी थी उनमें क्षेत्र क्रं. 2 से शैलेंद्र कुंभारे पिछले 2 वर्षों से व्यक्तिगत रूप से परिश्रम कर रहे थे लेकिन भाजपा का झंडा-डंडा और फोटो हटने से इन्हें भी नुकसान हो सकता है।

भाजपा समर्थित उम्मीदवारों में क्षेत्र क्रंं. 5 शाहपुर से लड़ रहे पूर्व विधायक एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मंगल सिंह धुर्वे, क्षेत्र क्रं. 8 से लड़ रही सीमा तपन विश्वास एवं मुलताई क्षेत्र क्रं. 10 से चुनाव लड़ रहे राजा पंवार को छोड़कर बाकी अन्य उम्मीदवार जिपं सदस्य के लिए चुनाव मैदान में पहली बार उतरे हैं। और अब इस नए आदेश के बाद उन क्षेत्रों में भाजपा समर्थित मतदाता भी इन प्रत्याशियों को वोट देने से भ्रम की स्थिति में रहेगा क्योंकि ये सभी प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान, डीडी उइके, हेमंत खण्डेलवाल, डॉ. योगेश पंडाग्रे एवं आदित्य बबला शुक्ला का नाम और फोटो का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

आदर्श आचार संहिता का होगा उल्लंघन
सोशल मीडिया पर कल रात से कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी बैतूल का 13 जून 2022 का चुनाव आवश्यक पत्र वायरल हो रहा है। यह पत्र निर्वाचन अधिकारी द्वारा रिटर्निंग आफिसर/सहायक रिटर्निंग आफिसर(पंचायत) सर्व जिला बैतूल को भेजा गया है। इसपत्र की प्रति जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को देना बताया गया है।

इस पत्र में यह उल्लेख है कि पंचायत निर्वाचन दलीय आधार पर नहीं होते हैं। यदि कोई अभ्यर्थी या राजनैतिक दलों के पदाधिकारी/पार्टी के पदाधिकारी के द्वारा पंचायत चुनाव में दलों के संबंंध में कोई प्रचार-प्रसार या समाचार पत्रों में विज्ञापन करते हैं तो उनके विरूद्ध आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के तहत कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें।