कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में तीन दिवसीय ग्रीष्म ऋतु सर्वेक्षण का आयोजन-10 राज्यों के 55 पक्षी विशेषज्ञ शामिल

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योगेश चौरसिया जिला ब्यूरो 
कान्हा टायगर रिजर्व के अंतर्गत दिनांक 10 से 12 जून, 2022 तक प्रथम ग्रीष्म ऋतु पक्षी सर्वेक्षण का सफल आयोजन किया गया। यह पक्षी सर्वेक्षण कार्य श्री सुनील कुमार सिंह, क्षेत्र संचालक, कान्हा टायगर रिजर्व के निर्देशन एवं वाईल्डलाईफ एंड नेचर, इंदौर की संस्था के सहयोग से किया गया। यह इस साल का दूसरा पक्षी सर्वेक्षण है,अलग अलग ऋतु में सर्वेक्षण करने से पक्षियों की विभिन्न प्रकार की जातियों के बारे में जानकारी मिलती है.


ग्रीष्म ऋतु में पहली बार किया गया, पक्षी विशेषज्ञ को यह मेहसूस हुआ कि इस सीजन के पक्षी की गणना छूट रही है और जब तक हर ऋतु के पक्षी की गणना ना कि जाये तब तक डाटा संपूर्ण नहीं हो सकता इसी को ध्यान में रखकर यह सर्वे किया गया. और सर्वे में काफी संख्या में पक्षी दिखाई दिए जो कि फरवरी में हुए सर्वे में दिखाई नहीं दिए थे. Drongo cuckoo,
Gray bellied cuckoo Indian cuckoo, Brown hawk cuckoo,
Scaly bellied woodpecker
Palla’s fish eagle
White rump munia
Tawny eagle
Ruddy breasted crake
Puff thraoted babbler
Emerald dove
Black headed cuckoo shrike
Crimson sunbird
Blue beareded bee eater
Lesser yellow nape woodpecker
Green munia
Sirkeer malkoha

संयुक्त संचालक श्री नरेश सिंह यादव द्वारा प्रतिभागियों को कान्हा के बारे में जानकारी दी गई। संस्था के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र बागड़ा ने बताया कि इस सर्वेक्षण कार्य में स्वयंसेवकों का रुझान बहुत अधिक था और अनुभव को आधार बनाते हुए देश के 10 राज्यों से 55 पक्षी विशेषज्ञ को चुना गया हैं। उन्होंने बताया कि दोनों सर्वे के डाटा का आकलन करके एक विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंप दी जाएगी।


पक्षी सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की गणना करना है, इस तरह के सर्वेक्षण से पक्षियों के बारे में अधिक जानकारी इकट्ठा करना है, उनके प्राकृतिक आवास, व्यवहार में कोई बदलाव आदि का अध्ययन करना है। कान्हा के पार्क अधीक्षक श्री सुनील सिन्हा ने बताया कि सर्वेक्षण में 2 से 3 समूह को कान्हा टायगर रिजर्व के अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया। इस तरह के सर्वेक्षण से विभाग को पक्षियों के आकड़ों को एकत्रित करने में सहायता मिलती है, तथा निष्कर्ष के अनुसार पक्षियों के संरक्षण हेतु योजना तैयार की जा सकेगी।