बूंदी की शौकीन पंचायत -“जिला एवं जनपद पंचायत सीईओ की सरपंच सचिवों पर मेहरबानी से नहीं रुक रहा भ्रष्टाचार”

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ओमकार पटेल तहसील ब्यूरो (पंचायत की उलटी सीधी परिक्रमा)

“अंधा बांटे रेवड़ी अपने ही दो दो हाथ” वाली कहावत बिछिया जनपद पंचायत में बिलकुल सटीक बैठती है। जहाँ सचिव सरपंच बिंदास मीठा खा रहे है और स्वाभाविक है अधिकारियों को भी खिला रहे होंगे लेकिन  बिल बेचारी जनता के नाम फाड़ा जा  रहा  है। ये हम नहीं कह रहे , इनके बिल पावती बता रही है।  बिछिया जनपद पंचायत में  एकमात्र ग्राम पंचायत दिवारा ऐसी पंचायत है जहां की जनता सरपंच सचिव की कृपा से पेटभर बूंदी, मीठा, नमकीन,फल्लीदाना,चिरौंजीदाना का साल भर लुफ्त उठाती है यहाँ बड़ी मात्रा में सरकारी राशि खर्च कर मीठा खिलाकर सरपंच सचिव जनता को खुश रखने का प्रयास करते हैं विकास हो या न हो मीठा फूटा सालभर कोई न कोई उत्सव के बहाने जनता को बांटा जाता है. फिर सरपंच सचिव को फर्जी बिल ही क्यों न लगाना पड़े।

जानकारी अनुसार पंचायत व्दारा जो बिलों का भुगतान किया जाता है वह भी बिना बिल क्रमांक और दिनांक के सादे बिल पर हजारों रुपये का बिल भुगतान करती है जानकारी अधिकारियों को भी है परन्तु अधिकारी चुप कैसे रहते हैं पता नहीं वही ग्रामीणों का कहना है किसी भी उत्सवों में ऐसा नहीं होता है कि हजारों रुपये का मीठा बांटा जाता हो सरपंच सचिव क्या करते हैं उन्हें मालूम नहीं किसी भी पर्व पर जनता बहुत कम एकत्र होती है पंचायत कमेटी के अलावा दस लोग एकत्र हो जाये तो बहुत बड़ी बात है फिर ये भंडारा जाता कहाँ है किसी को मालूम ही नहीं जनता की बात सही भी हो सकती है तभी तो बिलों पर गोलमाल स्पष्ट नजर आता है बिलों में न दिनांक होती है और न क्रमांक और हो जाता है हजारों सरकारी रुपये का लेन देन बिलों पर गौर किया जाये तो बड़ी असमानता नजर आती है 50-60 किलो बूंदी किसके लिए आता है और 10-15 किलो मीठा किसके लिए आखिर सरकारी आयोजनों पर जनता और व्हीआईपी में कैसा अंतर इतना ही नहीं जब कोरोना काल में सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए राष्ट्रीय पर्व मनाने की बात कही गई थी तब उस समय भी इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद बांटना मीठा खिलाना यह सावित करता है कि कोरोना गाइडलाइन का उल्लघंन कर भीड़ जुटाई गई उस दौरान कौन व्हीआईपी मेहमानों या नेताओं को इतना मीठा खिलाया जाता रहा है।

आखिर मुख्यअतिथि भीड़ एकत्र करने से रोका क्यों नहीं समझ से परे है दिवारा पंचायत में पदस्थ सचिव अईया लाल साहू मानते हैं कि इस तरह की गड़बड़ी पूर्व सचिव ने की है मैं तो बाद में 2019-20 में दिवारा का पदभार संभाला हूँ यहाँ तक तो ठीक है परन्तु 2019-20 से लेकर अभी भी इसी तरह की परम्परा जारी क्यों रखी गई गड़बड़ी हो रही थी तो उस पर सुधार करना था जो नहीं हुआ सचिव साहू कुछ भी कहें उनके समय के कारनामे भी कम नहीं हैं इन सारी बातों की जानकारी होने के बाद भी संबधित अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।

अधिकारियों का चुप्पी साधना कहीं न कहीं सरपंच सचिव को खुला संरक्षण देना हो सकता है आखिर अनियमितताओं पर संबधित अधिकारी कोई एक्शन लेते क्यों नहीं कुछ लेना देना तो नहीं है उनका वही जाने लेकिन जनता ऐसे बिलों को सिरे से नकारती है जिस पंचायत में सिर्फ नास्ता पर हजारों रुपये खर्च होते हो वहाँ विकास कैसे हो सकता है विगत कुछ दिन पहले भी दिवारा में पदस्थ सचिव अईया लाल साहू पर ड्रोन सर्वे निर्धारित राशि से ज्यादा राशि के हेरफेर और सरकारी खजाने से खाने के तेल के 2 जार खरीदने का आरोप लगने का मामला समाचार पत्र और सोशलमीडिया पर जमकर उछला था इस तरह के मामले पर संबंधित अधिकारी को निश्पक्ष जांच करना चाहिए लेकिन जवाबदार अधिकारियों की उदासीनता का फायदा सरपंच सचिव उठा रहे हैं.

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