वृक्षों की कटाई के मामले में शिकायत के बाद बैठक आयोजित

Scn news india

हर्षिता वंत्रप 

सारनी में चल रहे पंप हाउस के निर्माण कार्य में पर्यावरणीय हितों को दरकिनार कर बड़े स्तर पर पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही थी। दरअसल पंप हाउस में बिजली पहुंचाने हेतु सतपुड़ा जलाशय के किनारे वाले घने जंगल से बिजली लाइन ले जाई जा रही है। इस संबंध में सारनी निवासी पर्यावरणविद आदिल खान ने जैव विविधता बोर्ड मध्यप्रदेश, नगरपालिका सारनी, मुख्य अभियंता सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, वन परिक्षेत्र अधिकारी सारनी एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की थी जिसके बाद एसडीओ विजय मोरे के माध्यम से 12 मई को नगरपालिका सारनी के अधिकारियों और आदिल खान के साथ इस संबंध में अपने कार्यालय में बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें शिकायकर्ता आदिल खान ने बताया कि सतपुड़ा जलाशय किनारे बड़ी संख्या में वृक्षों को काटा जाना प्रस्तावित है जबकि उक्त स्थान पर विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों मौजूद हैं, आदिल ने यह भी बताया कि घने जंगल में ट्रैक्टर ले जाया गया था और बहुत से छोटे बड़े पेड़- पौधों को उखाड़ा गया है। जिसके बाद बैठक में दुबारा सर्वे कराने और अन्य विकल्प तलाशने हेतु सहमती एसडीओ विजय मोरे की अध्यक्षता में बनीं।

गुरुवार को इस संबंध में एसडीओ विजय मोरे, रेंजर अमित साहू, सीएमओ सी•के मेश्राम, आदिल खान इत्यादि के माध्यम से मौका स्थल पर पहुंच कर चर्चा की गई। जिसमें सीएमओ सारनी सी•के मेश्राम के माध्यम से बताया गया कि कुछ स्थानों से अंडरग्राउंड बिजली की लाइन ले जाएंगे, परंतु अन्य स्थानों पर पहले से ही बिजली की लाइन, पाइप लाइन इत्यादि अंडरग्राउंड गए हुए हैं, जिस वजह से वहां से अंडरग्राउंड बिजली लाइन ले जाना संभव नहीं है एवं पंप हाउस का जल्दी निर्माण भी किया जाना है ताकि लोगों को पानी मिल सकें।
इसके बाद आदिल ने बताया कि यहां कुछ दुर्लभ वन्य प्राणी भी रहते हैं, यह इलाका जैव विविधता से समृद्ध है और वृक्षों का होना हमारे लिए भी बहुत आवश्यक है, इसलिए अगर जंगल से ही बिजली की लाइन ले जाना एकमात्र विकल्प रह गया है तो कम से कम पेड़ों को काटा जाना चाहिए‌। इस पर एसडीओ विजय मोरे और रेंजर अमित साहू के माध्यम से कहां गया कि दुबारा वन विभाग की देखरेख में वृक्षों का सर्वेक्षण करवाया जाएं, कम से कम वृक्षों को काटा जाएं। वहीं काटे जाने वाले वृक्षों के एवज़ में वृक्षारोपण करने पर भी चर्चा हुई जिसपर आदिल ने कहां कि ऐसे पौधे लगाए जाएं जिनसे वन्य प्राणियों को भोजन मिल सकें।