आदिगुरु शंकराचार्य जी के अद्वेद जीवन दर्शन पर हुई कार्यशाला

Scn news india

म.प्र.जन अभियान परिषद घोड़ाडोंगरी द्वारा आदिगुरु शंकराचार्य जी के प्रकटोत्सव सप्ताह के अंतर्गत घोड़ाडोंगरी में आदिगुरु के जीवन दर्शन पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें विशेष अतिथि मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपनिदेशक श्री अमिताभ श्रीवास्तव जी मुख्य वक्ता के रुप में श्री वीरेंद्र बिलगैया जी गौ ग्राम संरक्षण समिति के संस्थापक एवं माधव गौशाला रानीपुर के संचालक एवं श्री कौशलेश तिवारी जी संभाग समन्वयक मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद नर्मदापुरम ,तथा पंडित श्री कृष्ण केशव शुक्ला जी विशेष रूप से उपस्थित हुए।

इस अवसर पर ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्यों सामाजिक कार्यकर्ताओं नवांकुर संस्था के साथियों एवं प्रबुद्ध जनों को संबोधित करते हुए श्री अमिताभ श्रीवास्तव जी द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य जी के अद्वैत वेदांत दर्शन की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत में दर्शन की समृद्ध परंपरा रही है। भारतीय प्राचीनतम दर्शन वैदिक दर्शन है, जिसका आधार चार वेद हैं – ऋग्वेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद, सामवेद। वैदिक दर्शन के पश्चात के दर्शन को वेदोत्तर दर्शन कहा जा सकता है। वेदोत्तर दर्शन को आस्तिक और नास्तिक दर्शन में विभाजित किया जा सकता है। कि आस्तिक दर्शन वे हैं जो वेदों को सत्य मानते हैं जबकि नास्तिक दर्शन वेदों में विश्वास नहीं करते।


षड्दर्शन में सम्मिलित वेदांत दर्शन का मूल आरंभिक उपनिषदों में पाया जाता है। ईसा पूर्व दूसरी सदी में संकलित बादरायण का ब्रह्मसूत्र इस दर्शन का मूल ग्रंथ है। बाद में इस पर दो प्रख्यात भाष्य – शंकराचार्य द्वारा नवीं सदी में और रामानुजाचार्य द्वारा बारहवीं सदी में – लिखे गए भाव यही है हमें एकता के सूत्र में बांधकर सबको मिलकर रहना है वैगर किसी भेदभाव के इस अवसर पर श्री वीरेंद्र बिलगैया जी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य जी के द्वारा भारत को एक सूत्र में बांधने के लिए मात्र 13 साल की उम्र में केरल से निकलकर भारत के चारों कोनों पर भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए चार मठों की स्थापना की जिसमें शारदा ,श्रृंगेरी, द्वारिका और ज्योतिर्यमठ है तथा पूरे भारतवर्ष की चार बार परिक्रमा की उस समय के भारत के समस्त विद्वानों से शास्त्रार्थ किया तथा सभी को पराजित कर उनकी विसंगतियों को दूर करते हुए सभी को एक सूत्र में बांधते हुए हमारी संस्कृति की रक्षा की तथा हमें एकात्म वाद की ओर चलना सिखाया इस अवसर पर श्री कौशलेश तिवारी जी एवं जिला समन्वयक श्रीमती प्रिया चौधरी ने भी विचार रखे अंत में विकासखंड समन्वयक संतोष राजपूत ने उपस्थित समस्त अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।