सत्संग करने से रोकता है कलयुग : पं. अशोक शर्मा

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40 मिनट 40 दिन तक कोई भी मंत्र करने से होता है सिद्ध
बैतूल। जिस तरह द्वापर, त्रेता युग का प्रताप रहा है। ठीक इसी तरह से कलयुग का भी अपना प्रताप है। कलयुग हर अच्छे कार्यों को करने से रोकता है। इसमें विशेषकर जब-जब सतसंग में जाने की बात होगी तो कलयुग किसी ना किसी रूप (आलस, मन, चिंता) में आपको वहां तक जाने से रोकने का काम करता है जहां सतसंग चल रहा है। लेकिन जब आप जहां सतसंग हो रहा है उस परिक्षेत्र के भीतर पहुंच जाते हैं तो फिर कलयुग का प्रभाव आप पर नहीं रहता है। उक्त उद्गार प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य पं. अशोक शर्मा ने श्रीमद् भागवत कथा वाचन के दौरान कहे। श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्री हनुमान, माता मंदिर नई पुलिस लाइन, टैगोर वार्ड, एलआईजी 1 के पास किया जा रहा है।
कोई भी मंत्र 40 मिनट, 40 दिन में होता है सिद्ध
पं. आचार्य अशोक शर्मा ने कहा कि कोई भी मंत्र 40 मिनट प्रतिदिन 40 दिनों तक करने से सिद्ध हो जाता है। उन्होंने कहा कि आप जिस भी दिन व्रत करते हो विशेषकर एकादशी के दिन जरूर हरे कृष्णा-हरे कृष्णा, हरे रामा-हरे रामा का भजन भी करें। आचार्य श्री शर्मा ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा एक ऐसा ग्रंथ है जो कि मुक्ति प्रदान करता है।
सिर्फ साथ जाता है सत्संग
कलयुग की व्याख्या करते हुए आचार्य श्री शर्मा ने कहा कि एक व्यक्ति के तीन मित्र थे। इन तीनों पर वह बेहद भरोसा करता था। हर काम इन्हीं से पूछकर करता था। लेकिन एक दिन व्यक्ति को पत्र आया कि तुम्हें यम के द्वार जाना है। मृत्यु अटल सत्य है। व्यक्ति ने कहा कोई बात नहीं मेरे तीन मित्र है। पहले के पास गया और उसे पत्र पढ़ाया तो उसने जवाब दिया कि मैं आपके साथ नहीं चल सकता हूं। व्यक्ति दूसरे के पास गया तो उसने कहा कि मैं तुम्हें द्वार तक छोडऩे साथ चल सकता हूं। दोनों परम मित्रों से यह सुनकर व्यक्ति उदास हो गया और घबराने लगा। उदास मन से उसने सोचा दो ने साथ छोड़ दिया है चलो तीसरा तो है। ऐसा सोचकर वह तीसरे मित्र के पास आया और वही पत्र दे दिया। पत्र पढऩे के बाद तीसरा मित्र मुस्कुराया और उसने कहा कि घबराते क्यों हो मैं हूं ना? मैं तुम्हारे साथ चलूंगा। वह तीनों मित्र थे संपत्ति जो व्यक्ति के मरते ही घर पर ही छूट जाती है। दूसरा मित्र परिवार होता है जो कि श्मशान घाट (द्वार) तक ले जाकर अग्रि देने के बाद लौटकर आ जाता है। लेकिन जो तीसरा मित्र होता है वह होता है सत्संग जो अंतिम समय तक ना सिर्फ आपके साथ होता है बल्कि आपका जन्म कहां, किस कुल में होना है? यह भी तय करता है। इसलिए सत्संग अवश्य करें। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से श्रीमद् भागवत कथा का पुण्य लाभ उठाने की अपील की है।