अंचल की संस्कृति को मिलेगा नेशनल-इंटरनेशन मंच- कलेक्टर

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 आरडी पब्लिक स्कूल द्वारा जिले के कलाकारों की कला को नेशनल और इंटरनेशन स्तर पर पहचान के लिए सराहनीय शुरुआत
बैतूल। जिले की लोक कला एवं यहां के कलाकारों द्वारा बनाए जा रहे चित्रों एवं कलाकृतियों को सही प्लेटफार्म मिलने से यहां के अंचलों की संस्कृति और कलाकारों के साथ कलाकृतियों को भी पहचान मिलेगी। आरडी पब्लिक स्कूल द्वारा जिले के कलाकारों की कला को नेशनल और इंटरनेशन स्तर पर पहचान देने के लिए की गई शुरुआत सराहनीय है। आज कला और कलाकार के बारे में बहुत कम लोग सोचते है। स्थानीय कला और कलाकार के साथ जिले का नाम अंतराष्ट्रीय पटल पर लाने की सोच जिले को नई पहचान देगी।
यह बातें कलेकटर अमनबीर सिंह बैंस ने आरडीपीएस स्कूल में आयोजित टेलेंट सर्च वर्कशॉप में कही। जिले की कला और कलाकारों को उम्दा मंच देने के महत्वाकांक्षी प्रयास को मूर्त रुप देने के प्रयास के लिए आज उदयपुर के स्निक नो मोर आर्गनाईजेशन के संचालक अंजना सिंघवी एवं प्रणव शर्मा द्वारा टेलेंट सर्च वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप की शुरुआत कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस, पूर्व सांसद हेमंत खण्डेलवाल, महेन्द्र कुमार तूतीगोरिन तमिलनाडू,आरडीपीएस संचालक रितु खण्डेलवाल, डॉ कैलाश वर्मा जिला समन्वयक, गायत्री परिवार एवं साऊथ जोन प्रमुख उत्तम गायकवाड़ द्वारा की गई। इस अवसर पर मंडला जिले के भी कलाकार वर्कशॉप में शामिल हुए। कलाकारों को दो घंटे का टास्क दिया गया था, 20 से अधिक कलाकारों ने इस टास्क को बखूबी निभाया और उम्दा कलाकृतियां पेश की।
जबलपुर में होने वाली वर्कशॉप बैतूल में
आरडी पब्लिक स्कूल में आयोजित टेलेंट सर्च वर्कशॉप में जिले के दो दर्जन से अधिक कलाकारों ने आमद दी। पूर्व सांसद एवं आरडीपीएस के चेयरमेन हेमंत खण्डेलवाल ने बताया कि जिले की संस्कृति समृद्ध है, यहां एक से बढ़कर एक कलाकार है, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिल पाता जिसकी वजह से अंचल की प्रतिभाएं जहां जन्म लेती है वहीं दम तोड़ देती है। स्निक नो मोर द्वारा राजस्थान, गुजरात एवं मध्यमप्रदेश में टेलेंट सर्च के लिए वर्कशॉप की जा रही है। यह वर्कशाप मध्यप्रदेश में जबलपुर में होने वाली थी, लेकिन उनके आग्रह पर इसे बैतूल में किया गया है। जून माह में दूसरे चरण में आयोजित होने वाली वर्कशॉप में कलाकारों को सीखने का मौका भी मिलेगा और उनके द्वारा बनाएं चित्रों एवं कलाकारों को राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय पटल पर पहचान भी मिल सकेगी।
जिले की संस्कृति और कलाकारों से हो सकेंगे परिचित
आरडीपीएस की पहल पर अब कलाकारों द्वारा बनाए गए चित्र एवं कलाकृतियों राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय बाजार भी मिल सकेगा। कलाकृतियों पर कलाकारों के नाम के साथ जिस भी पोर्टल पर यह बेचने के लिए उपलब्ध होगी वहां कलाकार का परिचय भी होगा। जिले में यह पहली बार हो रहा है जब स्थानीय कलाकारों को रोजगार एवं पहचान दोनों एक साथ देने के उद्देश्य से कदम बढ़ाएग गए है। आरडीपीएस की यह पहल बैतूल की संस्कृति को अक्षुण्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।