मोहाना, फरस्वाहा,सुनहरा, बीरा, जिंगनी ,चांदी पाटी, राम नई में संचालित हो रही अवैध रेत खदानें

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  • अजयगढ़ क्षेत्र को तबाह कर रहा राजनैतिक संरक्षण प्राप्त लालची प्रशासनिक अधिकारी व रेत माफिया
  • मछली पालक हुए बेरोजगार

मोहम्मद आज़ाद 

अजयगढ़ = रेत की लूट मचाने बाले रेत माफियाओं को व उनको संरक्षण देने में प्रशासनिक अमला का मुख्य हांथ बताया जा रहा है किसी भी प्रकार की रोकटोक करने बाले ग्रामीणों या समाजसेवक को ही धमका कर शांत कर दिया जाता है रेत माफियाओं के तांडव दिन पे दिन बढ़ता जा रहा है एक पंचायत की खदान में तीन तीन घाट बना कर प्रतिवन्धित मशीनों से नदी के पानी के अंदर से उत्खनन कर केन नदी के अस्तित्व को खत्म किया जा रहा है मोहाना फरस्वाहा सुनहरा बीरा जिंगनी रामनई आदि जगहों में दिन रात प्रशासनिक अधिकारियों के संरक्षण में अवैध उत्खनन किया जा रहा है।

जिले के अजयगढ़ क्षेत्र की जीवन रेखा केन नदी की धारा को रोककर प्रतिबंधित मशीनों से दिन-रात छलनी करने वाले रेत माफिया का तांडव इतना बढ़ चुका है कि रेत के लालच में क्षेत्र को लगातार तबाही की ओर ढकेला जा रहा है। वर्तमान में लालची रेत माफिया द्वारा उत्तर प्रदेश कर सीमा और केन नदी के तट पर बसे ग्राम रामनई के सुरक्षा कवच की भूमिका निभाते हुये प्राकृतिक प्रलय बाढ़ से गांव की सुरक्षा करने वाले किला रूपी रेत के टीलों को दैत्याकार मशीनों से ध्वस्त किया जा रहा है। जानकारों के अनुसार यह टीले 50 फीसदी तक खुदने के बाद लहरों का भार झेलने के काबिल नहीं रहेंगे और लहरें तोड़ते हुए गांव को अपनी चपेट में लेकर तबाही मचा सकती है। अब तक 35 प्रतिशत तक टीले चालची रेत माफिया द्वारा ध्वस्त किये जा चुके है। ग्राम वासियों द्वारा अनेकों बार मौखिक और लिखित रूप से तहसील और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत, आवेदन और ज्ञापन सौंपा जा चुका है। इसके बावजूद कार्यवाही के बजाय शिकायत कर्ताओं को ही प्रताड़ित किया गया है।


मछली पालक केवट समाज जो कि पूरी तरह से
मछली के नद्दी से पकड़ कर मार्केट में बेचती थी नदी के खाली होने से उनके रोजगार में संकट पैदा हो गया है एक ग्रामीण ने बताया कि केन नदी में बहुतायत से मछली मिलती थी अब नही मिलती कारण पूछने में बताया कि जब से रेत का अवैध उत्खनन सुरु हुआ है तक से नदी नाले में तब्दील होती जा रही है नदी में पानी के अंदर से रेत निकाली जाती है मछली के अलावा जलीय जीव जंतुओं के नामो निशान देखने नही मिलेंगे ऐसी हालत की है रेत माफियाओं ने

नेता और अधिकारी रेत के अवैध उत्खनन में शामिल

सूत्रों के अनुसार रामनई सहित क्षेत्र की अधिकतर रेत की वैध और अवैध खदानों में नेता और अधिकारियों की मिली भगत चल रही है, इसी के चलते कार्यवाई नहीं हो रही, निरीक्षण दल द्वारा पहुंचने से पहले ही अपने आने की सूचना उत्खननकर्ताओं को दे दी जाती है, और नदी से घाटों से मशीनों को हटा कर छिपा दिया जाता है। टीम नदी के तट पर खड़े होकर फोटो खिंचवा कर किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन नहीं होने की सूचना भेज देते हैं और टीम के आते ही उत्खनन पुनः प्रारंभ हो जाता है। इस प्रकार मीडिया और वरिष्ठ आधिकारियों व आम नागरिकों को गुमराह करते हुये जिम्मेदार अधिकारी रक्षक के भेष में भक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। जिससे क्षेत्र वासियों का ऐसे अधिकारियों के प्रति विस्वास कम होता जा रहा है।

दजर्नो प्रतिबंधित मशीनों से चल रही खुदाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां ग्राम पंचायत को आवंटित खदान में कई प्रतिबंधित मशीनें चल रही हैं। इसके अलावा लगभग आधा दर्जन अवैध खदानें भी संचालित हैं जहां दर्जनभर से अधिक संख्या में दैत्याकार मशीनें दिन रात केन नदी की धारा रोककर और रामनई के सुरक्षा कवच रुपी टीलों को ध्वस्त कर रेत निकालने में लगी हैं। ग्रामीणों द्वारा रोके जाने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जा चुकी है।

सूत्रों के अनुसार यहां से प्रतिदिन लगभग आधा सैकड़ा डम्फर और ट्रक रेत से लोड होकर उत्तर प्रदेश की ओर भेजे जाते हैं। इसके अलावा इतने ही पन्ना, सतना एवं अन्य स्थानों की ओर भेजे जाते हैं। रेत माफिया के ताण्डव को शीघ्र नही रोका गया तो रामनई के सुरक्षा कवच नष्ट कर दिये जायेंगे ऐसे में तबाही को रोकना नामुमकिन हो सकता है।

 

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