जो पिता बेटी के जन्म पर रोता है वह पिता इस संसार का सबसे बड़ा अभागा व्यक्ति – जगद्गुरु धिरेंद्राचार्य महाराज

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भरत साहू तहसील ब्यूरो आठनेर 
धामनगांव – रेणुका सिद्ध पीठ धामनगांव में चैत्र शुक्ल नवरात्रि के पावन अवसर चल रहे शत् चण्डी महायज्ञ के पांचवें दिन श्रीरामचरितमानस के व्यासपीठ कथा वाचक जगद्गुरु धिरेंद्रचार्य महाराज ने अपनी अमृत वाणी से बेटी का सुन्दर वर्णन किया जिससे सुनकर कथा में उपस्थित सभी श्रृदालू भक्तो के आंखों से आंसु निकल आएं। कथा वाचक धिरेन्द्रचार्य महाराज ने कहा कि इस संसार में वह पिता सबसे बड़ा अभागा होता है जो अपने घर बेटी के जन्म पर रोता है। बेटीया तो ईश्वर का वरदान है।उनका जन्म उसी घर होता है जहां परमात्मा चहाता है। वरना आप भगवान से लाख प्रार्थना करीए आप ईश्वर के हर चौखट पर जाकर माथा टेके परन्तु आपको कन्या रत्न की प्राप्ति नहीं होगी।इस संसार में करोड़ों माता पिता हैं जो बेटी के जन्म के लिए तरस रहे हैं। जिनके घर बेटी की किलकारियां गूंजती है वह घर स्वर्ग जैसा लगता है। बेटी आंगन की तुलसी होती है बेटी पिता का मान सम्मान होती है बेटी मां का स्वभीमान होती है।

पिता का कर्ज चुकाती बेटीया
जब किसी घर बेटे का जन्म होता है तो उस घर में उत्सव मनाया जाता है। मिठाई बांटी जाती है माता कहती हैं देखो हमारे घर कन्हैया आया है पिता कहता है मेरे उम्र का सहारा आ गया परन्तु जब समय बीत जाता है पुत्र का विवाह होता है उसे अपना नया परिवार मिल जाता है माता पिता अब घर में बैठे बोझ लगते हैं।बेटे कि खुशियों के लिए कर्ज को चुकाने समय आता है तब बेटा आप से दुर हों जाता है।दो वक्त की रोटी आपको नसीब नहीं होती आपकी खैरीयत पुझने वाला तक नहीं होता है तब बेटीयों की याद आती है। यह संसार इस बात का गवाह है जब भी पिता पर विपत्ति आई है बेटी ने हर क़दम पर पिता का साथ दिया है। ससुराल में रहकर मां और पिता का हाल जानती है, पिता पर कर्ज हो तो अपने गहने तक बेच देती। फ़र्ज़ दो घर के बखुबी निभाती है ना पति का स्वभीमान खोने देती और ना अपने पिता के सम्मान को झुकने देती। माता पिता के मृत्यु पर सबसे अधिक आंसू केवल बेटी के आंखों से ही निकलते हैं।बेटा शहर में रहकर साल में एक दो बार ही संदेश पुछता है परन्तु बेटी रोज हाल जानती है।

बेटी अपने पिता से कभी कुछ नहीं मांगती

बेटी एक ऐसा धन है जो अपने पिता से कभी कुछ नहीं मांगती जो आपने दे दिया उसे स्विकार कर लेती है आप विवाह के लिए जिस लड़के को उसके लिए चुन लेते हैं उसे कभी भी नहीं नकारती उसे मालूम है मेरे पापा ने जो फैसला लिया होगा वह सोच समझ कर ही लिया होगा। पिता भाई के द्वारा किया कन्या दान का फर्ज पुरी उम्र ससुराल में हंसते हुए निभाती है लेकिन यह प्रमाण है सत्य है कि बेटे कभी पिता के फैसले से सन्तुष्ट नहीं रहते । बेटे अपने फैसले खुद लेते हैं। इस संसार में बेटीयों का स्थान सबसे ऊंचा है। जिनके घर बेटीयों का जन्म हो तब भगवान से प्रार्थना करते हुए कहे की हे भगवान मैं आज धन्य हो गया जो आपकी कृपा से मेरे घर लक्ष्मी का जन्म हुआ। बेटीयों का सम्मान करें उन्हें भरपूर प्रेम करें उन्हें हर खुशी दे वह कभी मांगती नहीं उसे बिना मांगे दे।

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