मां शीतला दरबार में शीतला सप्तमी का पर्व मनाया गया,धन्यधान्य से भरपूर और रोग मुक्त जीवन देती है माँ की कृपा

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राजेश साबले ब्यूरो बैतूल 

खेड़ी सांवलीगढ़ – आज ब्रम्हमुहूर्त में प्रातः मां शीतला दरबार में शीतला सप्तमी का पर्व  मनाया गया। बता दे की इस दिन माँ की असीम कृपा अपने भक्तों पर बरसती है।  इस दिन का इंतजार साल भर से माँ के भक्तों को रहता है। धन्यधान्य से भरपूर और रोग मुक्त जीवन देती है माँ की कृपा।  आज भी प्रातः सभी भक्त  सुबह 3:00 बजे से मां शीतला दरबार में एकत्रित होने लगे थे। पुरे विधि विधान से माँ की पूजा अर्चना की गई वहीँ  माता शीतला रानी को आज बासा  यानि ठंडा भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसमे  खीर दही आदि का भोग लगाया जाता है। उसी के मद्देनजर आज चमत्कारिक मां शीतला मंदिर में भी लोगों ने माता रानी को दही खीर का भोग लगाया  और समिति द्वारा प्रातः 5:00 बजे माता रानी की आरती कर  प्रसादी का वितरण किया गया।

बता दे कि हिंदू धर्म में केवल शीतला सप्तमी या शीतला अष्टमी के दिन ही बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इस दिन महिलाएं शीतला माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता की कृपा से धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है व बीमारियों से मुक्ति मिलती है। इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता है। भोजन रात में बना कर रख लिया जाता है। और यही भोग सुबह माता को प्रसादी के रूप में अर्पण किया जाता है।

शीतला सप्तमी के दिन घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इनमें हलवा, पूरी, दही बड़ा, पकौड़ी, पुए रबड़ी आदि बनाया जाता है। अगले दिन सुबह महिलाएं इन चीजों का भोग शीतला माता को लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन शीतला माता समेत घर के सदस्य भी बासी भोजन ग्रहण करते हैं। इसी वजह से इसे बासौड़ा पर्व भी कहा जाता है।  मान्यता है कि इस दिन के बाद से बासी खाना खाना उचित नहीं होता है।

यह सर्दियों का मौसम खत्म होने का संकेत होता है और इसे इस मौसम का अंतिम दिन माना जाता है। इस पूजा को करने से शीतला माता प्रसन्न होती हैं और उनके आर्शीवाद से दाहज्वर, पीतज्वर, विस्फोटक, दुर्गंधयुक्त फोड़े, शीतला की फुंसियां, शीतला जनित दोष और नेत्रों के समस्त रोग दूर हो जाते हैं।

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