कथा के दौरान पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने बताया जीवन उद्धार का रहस्य

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कामता तिवारी
संभागीय ब्यूरो रीवा
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  • कथा के दौरान पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने बताया जीवन उद्धार का रहस्य
  • राष्ट्र के विकास में धर्मनिरपेक्षता सबसे बड़ी बाधा: देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
  • ईश्वर से जुड़ने का एकमात्र माध्यम गुरू हैं : देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
  • -सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा आयोजन का तृतीय दिवस

रीवा-पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के पावन सानिध्य में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को तीसरा दिन था। विश्व शांति सेवा समिति रीवा एवं विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भी श्रद्धालु भक्ति रस में डुबकी लगाते नजर आए। 9 मार्च तक जे. एन.सिटी कॉलेज रतहरा बाईपास रीवा, मध्य प्रदेश में चलने वाली इस कथा की शुरुआत तीन मार्च से हुई।
तीसरे दिन की कथा की शुरुआत विश्व शांति की प्रार्थना से हुई। इस मौके पर पूज्य देवकी नंदन जी महाराज ने ईश्वर से जुड़ने के लिए गुरु को एकमात्र माध्यम बताया। पूज्य महाराज जी ने इसी प्रसंग को और प्रासंगिक बनाते हुए “मेरा तार प्रभु से जोड़े, ऐसा कोई संत मिले” भजन सुनाया, जिसे सुनकर वहां मौजूद हज़ारों भक्त भक्ति भाव से झूमने लगे। उन्होंने ईश्वर तक पहुंचने के लिए गुरु का होना परम आवश्यक बताया।
श्री ठाकुर जी महाराज ने कथा के दौरान देश की धर्मनिरपेक्षता पर भी चर्चा की। उन्होने कहा कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष हैं, हम इस पर गर्व करते हैं। लेकिन सच्चाई ये भी है कि धर्मनिरपेक्षता से हमारे देश का कई मायने में अहित भी हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “भारत में धर्म निरपेक्षता के चलते देश में स्कूली शिक्षा में रामायण नहीं पढ़ाई जा सकती, क्योंकि हमारा राष्ट्र धर्म निरपेक्ष है, जबकि इंडोनेशिया मुस्लिम देश होते हुए भी वहां रामायण पढ़ाई जाती है, ताकि वहां के बच्चे राम और सीता के चरित्र को समझकर उनके गुणों को अपने जीवन में आत्मसात कर सकें। मलेशिया में विश्व की सबसे श्रेष्ठ रामायण का मंचन होता है जबकि वे हिन्दू देश नहीं हैं”।
पं. देवकनंदन ठाकुर ने राजा परीक्षित का प्रसंग बताते हुए कहा कि “श्राप के चलते जब उन्हें पता चला कि उनकी मृत्यु सर्पदंश से 7 दिन के भीतर हो जाएगी तब वे महल त्याग कर जंगल चले गए। जहां ऋषि संगी ने उन्हे जीवन के उद्धार के रहस्य के बारे में बताया। उन्होने बताया कि 7 दिन के अल्पकाल में केवल भगवत श्रीमद भागवत पढ़ने- सुनने से ही उनको मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, ऋषि संगी से मिले इसी ज्ञान से उनका कल्याण हो गया।
श्री ठाकुर महाराज ने कथा के दौरान राज धर्म के बारे में भी विस्तार से बताया, उन्होने बताया कि राजा को धर्मात्मा होना चाहिए। वैसे भी कहा गया है कि ‘यथा राजा तथा प्रजा’। उन्होंने जीवन की सार्थकता बताते हुए कहा कि बेशकीमती समय का सदैव सदुपयोग करना चाहिए क्योंकि बिना उपयोगिता के जीवित रहना भी मृत्यु के समान ही है। उन्होंने कहा कि मृत्यु की कोई आयु नहीं होती, लेकिन जब तक हम जीवित हैं तब तक हमें ईश्वर भक्ति और समाज सेवा में ही अपने जीवन को लगाना चाहिए।
कथा पंडाल में मुख्य यजमान के रूप में श्री रामनरेश गुप्ता सह यजमान ब्रज लाल सोनी एवं गोवर्धन दास (गोदू भईया ), श्रीमती पुष्प पाण्डेय जी, जे. एन.सिटी कॉलेज के चेयरमैन सत्यनारायण चतुर्वेदी , पूर्व मंत्री एवं रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई एवं महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

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