शासकीय अतिथि विद्वान की भांति सेल्फ फाइनेंस विद्वानों को भी वेतन दे सरकार: निलय डागा

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राजेश साबले
शासकीय अतिथि विद्वान की भांति सेल्फ फाइनेंस विद्वानों को भी वेतन दे सरकार: निलय डागा
विधायक ने उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर की मांग
विधायक ने कहा शासन समस्त जिला कलेक्टर एवं प्राचार्य को करें निर्देशित
बैतूल। विधायक निलय विनोद डागा ने शासकीय अतिथि विद्वान की भांति सेल्फ फाइनेंस (स्ववित्त) विद्वानों को भी वेतन देने की मांग प्रदेश सरकार से की है। उल्लेखनीय है कि सेल्फ फाइनेंस विद्वानों का वेतनमान जनभागीदारी समिति से दिया जाता है और इस समिति में जिला कलेक्टर अध्यक्ष होते हैं वहीं अतिथि विद्वानों को शासन द्वारा वेतनमान प्रदान किया जाता है। ऐसी स्थिति में विधायक ने उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर शासन से समस्त जिला कलेक्टर एवं कॉलेज प्राचार्य को सेल्फ फाइनेंस विद्वानों के न्यूनतम वेतनमान 35 हजार देने संबंधी निर्देश देने की भी मांग की है।
–आधे से भी कम वेतन देकर करवा रहे अतिरिक्त कार्य–
विधायक श्री डागा ने बताया कि वर्तमान में सेल्फ फाइनेंस विद्वान सरकारी अतिथि विद्वान से आधे वेतनमान पर कार्य कर रहे है। अतिथि विद्वानों को न्यूनतम वेतन लगभग 35 हजार रुपए शासन द्वारा दिया जा रहा है, वहीं सेल्फ फाइनेंस विद्वानों को महज 15 से 17 हजार दिए जा रहे हैं। इसमें भी इन सेल्फ फाइनेंस विद्वानों से महाविद्यालय के अतिरिक्त कार्य करवाए जा रहे हैं। इन अतिरिक्त कार्यों का उन्हें कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है। विधायक ने कहा कि जब दोनों अतिथियों का काम बराबर है तो सेल्फ फाइनेंस विद्वानों के साथ भेदभाव क्यों? इन्हें भी न्यूनतम वेतन 35000 दिया जाना चाहिए।
–जेएच कॉलेज में 27 सेल्फ फाइनेंस विद्वान–
वर्तमान में सेल्फ फाइनेंस विद्वान सरकारी अतिथि विद्वान से आधे वेतनमान पर कार्य कर रहे है। जेएच कॉलेज में 27 व कन्या महाविद्यालय में 6 अतिथि विद्वान है जिन्हें इतने कम वेतनमान पर कार्य लिया जा रहा है।
–दोयम दर्जे की नीति अपना रहा शासन–
विधायक का कहना है कि सेल्फ फाइनेंस विद्वानों के वेतन संबंधी शासन द्वारा कोई योजना में पढ़ाने वाले स्ववित्त अतिथि विद्वानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति निर्मित हो गई है। प्रदेश सरकार की दोयम दर्जे की नीति इन विद्वानों के लिए आर्थिक एवं मानसिक प्रताड़ना का सबब बन गई है।
–स्ववित्त योजना में संचालित होते हैं ये कोर्स–
सरकारी कॉलेजों में बीबीए, एमबीए, बीसीए, पीजीडीसीए, एमएससी के माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, फूड टेक्नोलॉजी सहित कुछ अन्य प्रोफेशनल कोर्स स्ववित्त योजना से ही संचालित होते हैं। इन कोर्सेस को पढ़ाने नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती है। छात्रों से जो फीस आती है उससे ही स्ववित्त अतिथि विद्वान को मानदेय दिया जाता है। शिक्षा विभाग के नियमों के तहत स्ववित्त अतिथि विद्वान को पीरियड के हिसाब से वेतन देने का प्रावधान है। महीने में अधिकतम 20 दिन कक्षाएं लगती हैं। ऐसी स्थिति में एक शिक्षक को नाम मात्र का वेतन मिलता हैं।