बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए 100 दिनों तक होंगी पठन गतिविधियाँ ,जनवरी से अप्रैल तक चलेगा रीडिंग कैम्पेन

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हर्षिता वंत्रप 

भोपाल-स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार ने 5 जुलाई 2021 को NIPUN भारत के माध्यम से मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान के लिए एक राष्ट्रीय मिशन की शुरूआत की है। मिशन का उद्देश्य 3 से 9 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों की सीखने की जरूरतों को पूरा करना है। रीडिंग को बच्चों के मध्य बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2022 से अप्रैल 2022 तक 100 दिवसीय रीडिंग कैम्पेन का आयोजन किया जा रहा है।

प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस बात पर जोर देती है कि प्राथमिक विद्यालयों में सार्वभौमिक आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता हासिल करना उच्चतम प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा इसमें कहा गया है कि यदि सबसे बुनियादी शिक्षा यानी बुनियादी स्तर पर पढ़ना, लिखना और अंकगणित का ज्ञान पहले हासिल नहीं किया जाता है, तो इस नीति का बाकी का हिस्सा हमारे छात्रों के एक बड़े हिस्से के लिए काफी हद तक अप्रासंगिक हो जाएगा। इसी संदर्भ में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग एक राष्ट्रव्यापी पठन अभियान शुरू कर रहा है, जिससे प्रत्येक बच्चा पढ़ना सीखे और उसके बाद सीखने के लिए पढ़ सके।

बच्चों में आजीवन पढ़ने की आदत डालने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम पढ़ने को मनोरंजक और रोचक बनाएँ। इसलिए गतिविधि आधारित अध्ययन की विधि और पढ़ने के अनुभव को रोमांचक और आनंदमय बनाने में सबसे प्रभावी है। रीडिंग अभियान के 100 दिवसों को कुल 14 सप्ताह में विभाजित करते हुए साप्ताहिक गतिविधियाँ चिह्नांकित की गईं हैं। जिसमें प्रयास है कि बच्चे को पढ़ने के अवसर मिले और बच्चों की पठन क्षमता में वृद्धि के लिए शाला, पालक/अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। मातृभाषा के महत्व को समझते हुए बच्चे को ऐसे अवसर मिलें कि उसकी पढ़ने के प्रति रूचि जागृत हो सके। इस तारतम्य में आयु के आधार पर 14 सप्ताह की गतिविधियाँ शालाओं को उपलब्ध कराई गईं हैं। इसमें कक्षा 1 व 2 के लिए, कक्षा 3 से 5 के लिए और कक्षा 6 से 8 के लिए विभिन्न गतिविधियों को समाहित किया गया है। मध्यप्रदेश राज्य द्वारा इस 100 दिवसीय रीडिंग कैम्पेन कार्यक्रम में कहानी सुनाना, बच्चों को क्षेत्रीय भाषा में पढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना, व्हाट्सएप के द्वारा फ्लिप बुक साप्ताहिक रूप से उपलब्ध कराना, बाल-चौपाल का आयोजन करना आदि कार्यक्रम भी सम्मिलित करने की योजना है।