“अफसोस दिवस” आज – #हमें ख़ुशी है मगर #अफ़सोस भी

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युवा संघर्ष मंच

उजड़ती विधुत नगरी सारनी को फिर से गुलजार करने का बीड़ा अब नगर के युवाओं ने उठाया लिया है। “अफ़सोस दिवस” के रूप में एक छोटी से पहल की चिंगारी  सोशल मीडिया के माध्यम से पुरे देश में फ़ैल गई है। देश के कोने कोने में पंहुचे प्रोफेशनल्स सारनी के निवासरत युवा भी इस अभियान का हिस्सा बन गए है। जिन्होंने भी इस अभियान में अपने स्तर से सहभागिता देते हुए सारनी के वैभव को बचाने के संकल्प को दोहराया है।

अफ़सोस दिवस किसी सरकार का विरोध नहीं है , और ना अफ़सोस दिवस कोई प्रदर्शन है। ये सिर्फ सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के समक्ष नगर की जनता का अपनी भावनाओं को अपनी पीड़ा को प्रदर्शित करने का अभिव्यक्त करने का  एक माध्यम है।

कि “हमें अफ़सोस है आपने कहा था लेकिन समय सीमा में नहीं किया।” 

हमें ख़ुशी  है कि समय के साथ भोपाल ,इंदौर,जबलपुर ,ग्वालियर  मेट्रो सिटी  हो गया। मगर अफसोस है कि सारनी खंडहरों में तब्दील हो गया। 

हमें ख़ुशी है कि प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ गया। मगर अफ़सोस है की सारनी से लोगों का पलायन हो गया।   

हमें ख़ुशी है कि प्रदेश का बजट कई गुना हो गया। मगर अफ़सोस है कि  सारनी का व्यापार ठप्प हो गया। युवा बेरोजगार हो गया। 

हमें ख़ुशी है कि हबीबगंज  “रानी कमलापति” हो गया।  लेकिन अफ़सोस  हमारा छोटा सा बस स्टेण्ड वीरान हो गया। 

हमें ख़ुशी है कि  आपको होशंगाबाद में पर्यटन की अपार संभावना नजर आई। लेकिन अफ़सोस है कि  घोषणा के बाद भी सारनी की उपेक्षा नजर आई। 

हमें ख़ुशी है की पातालपानी में भगवान् बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा का अनावरण हुआ। मगर अफ़सोस है की घोषणा के बाद भी बाबा मठारदेव शिखर तक रोप  वे का निर्माण नहीं हुआ। 

हमें ख़ुशी है की बुधनी के आसपास पॉवर हब ओधोगिक क्षेत्र से क्षेत्र को गति मिली युवाओ को काम मिला। लेकिन अफसोस है की सुखाढाना में ओधोगिक नगरी का विकास नहीं हुआ। 

हमें ख़ुशी है कि हमारे यहाँ उत्पादित कोयले से अन्य संयंत्रों में बिजली उत्पादन हो रहा है। लेकिन अफ़सोस की हमारी खदानें बंद होने की कगार पर है।  नई खुल नहीं रही। 

हमें गर्व है की हम भारत के दिल हृदयप्रदेश यानी मध्यप्रदेश के नागरिक है -मगर  अफ़सोस की आँखों के सामने उजड़ती सारनी के लिए हम कुछ कर नहीं पा रहे। 

क्योंकी करता धरता आप है – जिस पर विश्वास होता है उम्मीदें भी उसी से की जाती है। यदि हम आपसे उम्मीद रखते है इसका सीधा मतलब की हम आप पर भरोसा करते है। “आपने बुरहानपुर में आवाज दे कर कहा था -मै सारनी आ रहा हूँ।” 

तो मुख्यमंत्री जी सारनी में लोग पलक पावड़े बिछा कर आप की राह तक रहे है – “क्या इस बात का भी हमें अफसोस जाताना होगा।”