तो क्या कानूनी फेर में उलझ सकते है चुनाव … ?

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मनोहर

त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन वर्ष 2021-22 के लिये निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा  के बाद अब सत्तापक्ष और विपक्ष के एक दूसरे पर आरोप तेज हो गए है।  कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा की -जब परिसीमन और आरक्षण को लेकर न्यायालय में विभिन्न याचिकाएँ पहुँची है तो आज अचानक आधे अधूरे में , जल्दबाज़ी में पंचायत चुनाव की घोषणा समझ से परे ? वही यह भी लिखा है कि – “हम तो पिछले कई समय से यह माँग कर रहे है कि प्रदेश में जल्द नगरीय निकाय व पंचायत के चुनाव हो लेकिन लगता है कि सरकार इन चुनावों से डरी हुई है , वह चुनाव करवाना नही चाहती है , वह चुनावों से भाग रही है।”

“पता नही क्यों वर्ष 2014 के आरक्षण के आधार पर वर्ष 2021-22 में चुनाव करवाये जा रहे है ? 

रोटेशन पद्धति से आरक्षण प्रक्रिया के नियम का पालन क्यों नही किया जा रहा है ? 

लोकतांत्रिक अधिकारो का दमन क्यों किया जा रहा है ?”

वहीँ विवेक तन्खा ने भी लिखा है कि – “मप्र में पंचायती राज के चुनाव की घोषणा विचित्र क़ानूनी परिस्थिति में। कॉन्स्टिटूशन प्रक्रिया और प्रावधान की पूर्ण अनदेखी कर प्रदेश सरकार द्वारा पारित अध्यादेश जनता के साथ धोका। जनता का विश्वास कोर्ट के साथ। क़ानून द्वारा स्थापित राज का संदेश देना हम सब का दायित्व।”

विवेक तन्खा ने कहा  है  कि इस चुनाव में  अपनाई जा रही प्रक्रियाओं में  विसंगतियों को लेकर जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर पीठ में याचिकाएं दायर की गई है। सबसे बड़ा सवाल है कि जनपद अध्यक्ष से लेकर सरपंच का चुनाव पुराने (2014-15) आरक्षण से कराए जा रहे है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से आरक्षण की प्रक्रिया 14 दिसंबर को की जा रही है।

वहीँ मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन चरणों में  जनवरी और फरवरी तक । इसके ऐलान पर कांग्रेस ने हैरानी जाहिर की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा ने कहा कि इस मामले को लेकर अदालत जाएंगे।