अनजान हैं एमपी के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव, खतरे को बताया काल्पनिक

Scn news india

एड फैजान पटेल 

कोरोना के नये वेरिएंट ने जहां देश-दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. कई जगहों पर पाबंदियां लगाने की मांग हो रही है. इस बीच मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने खतरे को काल्पनिक बताया है. दरअसल, कॉलेजों के खुलने के बाद संक्रमण बढ़ने के आसार पर सवाल पूछे जाने पर मंत्री मोहन यादव ने इसे काल्पनिक बताया. हालांकि कहा अगर परिस्थितियां बदली तो उसके हिसाब से निर्णय लिया जाएगा.

भोपाल। दक्षिण अफ्रीकी देशों में कोरोना के नये वेरिएंट पाये जाने के बाद विश्व में एक बार फिर से हाहाकार मच गया है. वहीं कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र में कॉलेज खुलने के बाद में लगातार छात्र कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं. ऐसे मध्यप्रदेश में भी इसका खतरा बढ़ गया है. लेकिन प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव इस खतरे को काल्पनिक बता रहे हैं. उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में वैक्सीनेशन अच्छा हो चुका है, ऐसे में यह सभी बातें काल्पनिक हैं. वही मंत्री मोहन यादव का कहना है कि वह भगवान से कामना करते हैं कि ऐसा ना हो.

कोरोना का खतरा काल्पनिक!

कोरोना की दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर के खतरे के चलते मध्य प्रदेश सरकार ने लगातार कोरोना गाइडलाइन फॉलो करने की बात कर रही है. वहीं दूसरी ओर कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में कॉलेज खुलने के बाद कई छात्र कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं. इसमें वैसे छात्र भी शामिल हैं जिनको कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं. कोरोना की इस आहट को लेकर मध्यप्रदेश में संचालित हो रहे कॉलेजों में कहीं खतरा तो नहीं है, इस सवाल के जवाब में मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री ऐसी बातों को काल्पनिक बता रहे हैं.उनका कहना था कि यह सभी बातें काल्पनिक है. मध्यप्रदेश में ऐसी स्थिति होने की उम्मीद नजर नहीं आती.

‘बाद में हालात देखकर लेंगे निर्णय’

मध्य प्रदेश की सीमा से लगे राज्यों में कोविड के मामले बढ़ने पर प्रदेश में मंडरा रहे खतरे को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में 8 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लग चुकी है ऐसे में यह सभी बातें काल्पनिक है.साथ ही कि वह इसको लेकर भगवान से भी कामना करते हैं. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि अगर ऐसा होता है तो फिर, तो इसके जवाब में मंत्री मोहन यादव कहते हैं कि उसके बाद अगर ऐसा कुछ होता है तो स्थिति देखकर निर्णय लिया जाएगा. ऐसे में कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग भगवान भरोसे ही है, क्योंकि कॉलेजों में किस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है इसकी जानकारी सभी को है.