अजब गांव की गजब दास्तां का विमोचन आज

Scn news india

अल्केश साहू ब्यूरो 
बैतूल, वाल्मीकि रामायण के एक श्लोक में लिखा है कि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥ इस श्लोक का अर्थ यह है कि लक्ष्मण ! यद्यपि यह लंका सोने की बनी है, फिर भी इसमें मेरी कोई रुचि नहीं है। क्योंकि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं। बैतूल जिले के नि:शक्त पत्रकार ने अपनी लेखनी से अपनी जन्मभूमि की यश कीर्ति को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए अपने गांव की हर छोटी – बड़ी बात को एक पुस्तक का रूप दे दिया और आज उसी पुस्तक का उसी गांव में विमोचन होने जा रहा है। 23 मई 1964 को ग्राम रोंढ़ा में जन्मे रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढ़ावाला की यूं तो तीन किताबे अभी तक छप चुकी है। बैतूल जिले की पत्रकारिता पर उनकी लिखी किताब बेतूलवी पत्रकारिता के बाद उनकी दुसरी किताब जो कि बेतूल जिले की 200 वीं स्वर्ण जयंती पर बेतूल जिले का एतहासिक दस्तावेज के रूप में छप कर आ चुकी है। तीसरी किताब काला गुलाब जो उनकी कहानियों का संग्रह है। चौथी किताब ग्राम रोंढ़ा को समर्पित है। अजब गांव की गजब दास्तां में लेखक रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढावाला ने अपने गांव के अतित और वर्तमान की तुलनात्मक जानकारी दी है। किसी समय में गांव का हर परिवार का सदस्य सरकारी नौकरी में था लेकिन आज गांव में बेकारी पांव पसारे हुई है। गांव का शिक्षा स्तर जहां पर बाहर गांव के लोग पढऩे आते थे, आज उसी गांव के बच्चे दुसरे गांव पढऩे जा रहे है। किसी समय गांव के किसानो को गेहूं और गन्ना के उत्पादन के लिए बड़े – बड़े मान – सम्मान मिले थे लेकिन आज उसी गांव में गेहूं और गन्ना का उत्पादन जल स्तर के नीचे गिरने और सिंचाई के साधनो की कमी की वजह से औंधे मुंह गिरा गया है। गांव तक जगदर से लेकर पारसडोह बांध की नहरो के सब्जबाग दिखाये गए लेकिन गांव में आज तक न तो जगदर डेम का पानी पहुंचा और न गांव तक पुण्य सलिला मां सूर्य पुत्री ताप्ती की जलधारा आई। गांव की समस्याओं के साथ – साथ गांव के बेटो का कीर्तिमान भी इस किताब के पन्नो में पढऩे को मिलता है। इस गांव से चपरासी से लेकर कलैक्टर तक और साहित्यकार से लेकर पत्रकार तब निकले है। गांव के बेटे ने पीएमओ से लेकर सीएमएचओ कार्यालय तक में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। गांव में रंगदार से लेकर थानेदार तक बनने तथा गांव के गुरू द्रोणाचार्यो तक की जानकारी दी गई है। गांव के एक मस्ताना कुआं से लेकर गांव के पनघटो का जिक्र तक पढऩे को मिलता है। लगभग सौ पेज की दो सौ रूपये मूल्य की इस किताब में लेखक रामकिशोर पंवार ने 300 साल पुराने चम्पा का पेड़ और उस पेड़ के नीचे विराजमान खेड़ापति बीजासन वाली माता मैया से लेकर गांव की सती माता और तीन पौढ़ महिलाओं द्वारा अपने पति की याद में बनवाए गए शिव मंदिर तक की जानकारी दी गई है। गांव में जन्मे राष्ट्रपति पुरूस्कार प्राप्त शिक्षक से लेकर संगीत विद्यालय में प्राचार्य रहे संगीतकार तक के बारे में जानकारी दी गई है। गांव में सभी जातियो के शासकीय सेवाओ में कार्यरत सपूतो का जिक्र भी इस किताब में पढऩे को मिलता है।
बैतूल जिले में राष्ट्रीय स्तर के दैनिक समाचार पत्र दैनिक पंजाब केसरी एवं पंजाब केसरी टीवी के बैतूल ब्यूरो रामकिशोर दयाराम पंवार बीते चार दशक से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में कार्यरत है। ग्राम रोंढ़ा में आज 28 नवम्बर 2021 दिन रविवार को प्रात: 11 बजे शासकीय उमा विद्यालय ग्राम रोंढ़ा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जिले के सासंद श्री दुर्गादास उइके से लेकर बैतूल विधायक श्री निलय विनोद डागा तक को आमतिंत्र किया है। इस कार्यक्रम में जिले के साहित्यकार , पत्रकार , तथा सहयोगियों एवं शुभचिंतको को भी आमंत्रित किया है। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए महाकौशल की संस्कारधनी नगरी जबलपुर से कवि माथुरकर जबलपुरी भी आ रहे है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्तर के कवि श्री माथुरकर जबलपुरी के बड़े पापा स्व. नारायण राव माथुरकर ग्राम रोंढ़ा में शिक्षक के पद पर कार्यरत रहे। कुछ शिक्षा – दीक्षा उनकी भी गांव रोंढ़ा में हुई है।