खबर का असर -पालक महासंघ मध्यप्रदेश ने स्कूल खोले जाने पर सरकार को चौतरफ़ा घेरा -सीएम से लेकर पीएम तक को भेजा ज्ञापन

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हर्षिता वंत्रप 

भोपाल-मध्य प्रदेश में एक ओर  जहाँ स्कूल संचालकों के दबाव के बाद आननफानन में स्कूल खोले जाने एवं 100 % उपस्थिति के आदेश के बाद जहाँ बच्चों के स्वस्थ को ले कर अभिभावक चिंतित है और  कोरोना को ले कर दूसरे राज्यों से आने वाली खबरों से भी असमंजस्य की स्थिति में है की बच्चों को स्कूल भेजें या नहीं।

वहीँ दूसरी ओर  निजी स्कूल संचालकों  के सामने  अपने संस्थान को बचाने की भी विडम्बना हैं। पुरे दो सालों से संस्थान कोरोना से प्रभावित काल होने से न्यायालय की गाईड लाईन अनुसार बंद ही है। जिसका खामियाज़ा स्कूलों के शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। संस्थान भी चौपट होने की कग़ार पर है।

तो वही राज्य की अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने एवं लोगों की कोरोना से प्रभावित आजीविका को सँभालने सरकार ने सभी प्रतिबन्ध हटा  लिए है। लेकिन कोरोना की तीसरी लहर की आशंका अभी टली नहीं है।  जरा सी भी लापरवाही का बड़ा खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।  ऐसे में स्कूलों को  पूरी उपस्थिति से खोले जाने को लेकर दो फाड़ हो गए है। एक तबका इसके समर्थन में है तो दूसरा विरोध में।

पालक महासंघ मध्यप्रदेश ने भी स्कूल खोले जाने पर सरकार को चौतरफ़ा घेरा है। उन्होंने सरकार के  100 % उपस्थिति के आदेश को आईना दिखते हुए सरकार को अपने फैसले पर विचार करने का निवेदन किया है। महासंघ का कहना है की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जो स्कूल में उपस्थिति को ले कर प्रतिबन्ध  आदेश जारी किये गए थे वे वर्तमान में भी यथावत है। क्योंकि न्यायालय द्वारा अभी प्रतिबन्ध हटाने जैसे कोई आदेश जारी नहीं किये गए है । ऐसे में संस्थानों को पुरे प्रभाव से संचालित करना न्यायालय के आदेश की अवहेलना  होगी ।

बता दे की आगामी माह में पंचायत चुनाव प्रस्तावित है ऐसे में चुनावी शोर और स्कूल भवनों को मतदान केंद्र के लिए बड़ी संख्या में उपयोग में लिया जायेगा। जिससे कहीं ना कही स्कूलों से संचालन पर भी असर पड़ेगा। और तो और सत्तापक्ष चुनाव से पहले जनता को नाराज करने जैसा कोई काम नहीं करना चाहेगा। अब देखना होगा की सरकार क्या रास्ता अपनाती है।