एमएलबी स्कूल को सशक्त सुरक्षा पेड बैंक की मिली सौगात मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों से कराया अवगत

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हर्षिता वंत्रप- सहयोगी पत्रकार गौरी बालापुरे  
बैतूल। मासिक धर्म को लेकर समाज में अनेकानेक भ्रांतियां व्याप्त है। इससे जुड़े अंधविश्वास की वजह से आज भी महिलाओं एवं बालिकाओं को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मासिक धर्म के प्रति जागरुकता के लिए बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा सशक्त सुरक्षा बैंक प्रकल्प के माध्यम से कैम्पेन चलाया जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण अंचलों एवं स्कूलों में पेड बैंक भी खोले जा रहे है जिससे बालिकाओं को स्कूल में और महिलाओं को उनके ग्राम में ही आसानी से कम कीमत पर पेड उपलब्ध हो सके। इसी क्रम में शासकीय एमएलबी स्कूल में समाजसेवी अलका वागदे्र सहयोग से सशक्त सुरक्षा बैंक की एक शाखा बुधवार को खोली गई। अब एमएलबी स्कूल की छात्राओं को आसानी से कम दरों पर पेड उपलब्ध हो सकेंगे। इस अवसर पर शाला की प्रभारी प्राचार्य अजंना रावत, समिति अध्यक्ष एवं सशक्त सुरक्षा बैंक की संस्थापक गौरी बालापुरे पदम, उपाध्यक्ष एवं सशक्त सुरक्षा बैंक संयोजक नीलम वागदे्र, सशक्त सुरक्षा बैंक एमएलबी शाखा की संयोजक अलका वागद्रे सहित शिक्षिका सोनाली मिश्रा, कविता माथनकर, ममता यादव प्रमुख रुप से मौजूद थी। कार्यक्रम के दौरान सभी बालिकाओं को कोविड वैक्सीन से वंचित रह गए परिवार एवं आसपास के लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए प्रेरित किया गया साथ ही अनिवार्य रुप से मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंस का पालन करने एवं कोराना के प्रति सतर्क एवं सुरक्षित रहने समझाईश दी गई।


जमीन लगाते है बिछौना, तीन दिन अछूत जैसे रहते है घर में
स्कूल में बालिकाओं के साथ सशक्त सुरक्षा बैंक की टीम ने विभिन्न भ्रांतियों एवं कुरीतियों पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान छात्राओं ने भी अपने अनुभव सांझा किए। छात्राओं ने चर्चा के दौरान यह बातें सामने आई कि करीब 90 प्रतिशत छात्राओं को मासिक धर्म आने से पहले इस बात की जानकारी नहीं थी कि मासिक धर्म क्या होता है। छात्राओं ने बताया कि मासिक धर्म के दिनों में उन्हें जमीन पर ही बिछौना बिछाकर सोना होता है। किचन में और पूजा घर में प्रवेश वर्जित होता है। तीन दिनों तक घर में अछूत जैसा व्यवहार होता है। खाना, पानी अलग से दिया जाता है। ग्रामीण अंचलों की छात्राओं ने बताया कि उन दिनों में उन्हें और परिवार की अन्य महिला सदस्यों को घर के अंदर से बाहर या पीछे के आंगन में जाना भी वर्जित होती है। उनके गांव में भी मासिक धर्म के दिनों में दो घरों के बीच से बनी गलियों होकर ही जाना होता है।


स्वास्थ्य के प्रति किया जागरुक
सशक्त बैंक की संस्थापक गौरी बालापुरे पदम, संयोजक नीलम वागदे्र एवं अलका वागद्रे ने बालिकाओं को मासिक धर्म के दिनों में आराम करने और परिवार में मम्मी एवं दीदी को भी भारी काम करने से मना करने की समझाईश दी। अनियमित मासिक धर्म आने पर डॉक्टर से चेकअप कराने की सलाह भी दी गई। छात्राओं ने भी अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि उन्हें मासिक धर्म की जानकारी नहीं होने पर जब स्कूल में ही पहली बार मासिक धर्म आया तो समझ नहीं आ रहा था। ऐसे में स्कूल की शिक्षिकाओं ने मदद की। स्कूल में पेड बैंक होने से छात्राएं बेझिझक पेडबैंक प्राप्त कर सकेगी।