आचार्य श्री 108 कुलरत्न भूषण ने पत्रकारों को किया सम्बोधित

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संवाददाता सुनील यादव कटनी

कटनी-आचार्य श्री 108 कुलरत्न भूषण ने पत्रकारों को सम्बोधित किया कटनी नगर के इतिहास में सैकड़ो वर्ष के उपरांत दिगम्बर जैन परम्परा अनुसार उपनयन मुंडन संस्कार किया जाएगा साथ ही भव्य पिच्छिका परिवर्तन का लाभ भी पुण्यशाली श्रावको को प्राप्त होगा।
उपनयन संस्कार प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भारत के पिता प्रथम तिरतेश आदिनाथ रिषभ देव के समय से होता चला आ रहा है उनके द्धारा ही वर्ण व्यवस्था का विस्तार किया गया था। जो जन्म गत न होकर के कार्यप्रणाली अनुसार वर्ण व्यवस्था की गई थी जिसका वर्तमान में विकृत रूप हो गया है।जबकि वर्तमान में हर मनुष्य प्रति दिन चारो वर्णों में निहित उसकी आत्मिक और शारीरिक शुद्धि हेतु उपनयन आदि संस्कार अतिआवश्यक बताए गए है जिनके माध्यम से हर मनुष्य अपने आत्मिक गुणों को प्राप्त कर सकता है।एवं चातुर्मास स्थापना के समय पीछी परिवर्तन जीवो की विधिवत रक्षा और श्रावको के आत्म कल्याण हेतु किया जाता है।मयूर पंख पीछी के गुणों को बताते हए आचार्य श्री ने कहा कि इसके विभिन्न विशेताओ के कारण दिगम्बर मुनि राज्य जीवो की रक्षा और आत्म शुध्दि हेतु ग्रहण करते है यह बहुत हल्की होतो है चिट्टी के ऊपर भी रख जाने पर उसे भार महसूस नही होता अति मुलायम होती है मयूर उसे स्वयं त्याग देता है त्यागने से उसे कष्ट नही होता है। जीवो का परिमार्जन करने से जीव की मृत्यु नही होती।ऐसी अनेक विशेताओ के कारण इसे ग्रहण किया जाता है।
कार्यक्रम का संचालन पंडित शैलेन्द्र जैन ने मंगला चरण पूर्वक किया।कार्यक्रम के संयोजन राकेश जैन कक्का के द्धारा किया गया जिसमें समाज के मगन जैन शरत जैन,मनीष जैन,मयूर जैन,श्रीमती रोशनी जैन,तारा जैन एवं समाज के लोग उपस्तिथ थे।