शुभ संकल्पों के दीपक जलाने से ही संसार से अज्ञान अंधेरा दूर होगा- बी.के.डॉ. रीना

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हर्षिता वंत्रप 

ब्रह्माकुमारीज रोहित नगर मे दीपोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न

भोपाल-प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय रोहित नगर सेवाकेंद्र पर दीपावली के पावन अवसर पर बड़े ही हर्षोल्लास के साथ दीपोत्सव मनाया गया । इस अवसर पर महालक्ष्मी जी का बड़ी श्रद्धा भाव से आरती व पूजन किया गया। उपस्थित जन समूह ने महालक्ष्मी से प्रार्थना की कि वर्तमान समय हर प्राणी कोरोना महामारी से सुरक्षित रहें। सेवाकेंद्र प्रभारी बी के डॉ रीना दीदी ने सभी को शुभ संकल्पों के दीपक जलाते हुए संकल्प दिलाया कि इस दिवाली पर घर की साफ सफाई के साथ मन के विकारों को भी साफ करें एवं मन को अज्ञान अंधकार से मुक्त कर आध्यात्मिक अलौकिक प्रकाश से रोशन करें। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि सभी इस समाज में प्रेम ,शांति , सदभावना, खुशी के दीपक सदा ही जगमगा कर रखें। दीपावली मिलन के साथ साथ संस्कार मिलन की रास करें। दीदी ने सभी से अपील की है कि कोरोना का खतरा अभी गया नहीं है ऐसे में अपने आप को सुरक्षित रखें। इस अवसर पर सभी ने मिलकर शुभ संकल्पों के दीपक जलाएं तथा एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दी ।

आपने कहा की हम सब मिलकर आत्म ज्योति को जगाकर सच्ची सच्ची दीपावली मनायें।। साथ ही कहा कि अंदर के अंधकार को मिटाने के लिए हमें शुभ संकल्पो के दीप जलाना होगा। स्वर्णिम भारत का निर्माण करने के लिए शांति का धर्म, प्यार की भाषा, सम्मान की सभ्यता, एकता की संस्कृति के साथ पर्व मनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि दिवाली पर विशेष एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं जो रिश्तो में मिठास भरने का प्रतीक है वास्तव में हर त्योहार हमारे आपसी रिश्तो को मजबूत बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि अपने पुराने हिसाब किताब व कार्मिक अकाउंट को आत्म स्मृति का दीप जला परमात्मा से शक्ति ले खत्म कर श्रेष्ठ कर्मों के जमा का खाता खोलने का दृढ़ संकल्प लें मनाएं दिवाली तभी हर घर दिव्य गुणों की खुशबू से महकेगा व दिव्य शक्ति से रोशन होगा।  दीया जलाना अर्थात देने की भावना तो हमें प्यार, खुशी, सम्मान सबको देते जाना है जिससे हमारा समाज एकता के सूत्र में बंध स्वर्णिम बनेगा। दीपावली वास्तव में ज्ञान के द्वारा आत्मिक ज्योति जगने की निशानी है। जिस प्रकार दीपक जगने से अंधकार समाप्त हो जाता है, ठीक उसी प्रकार ज्ञान के दीपक से अज्ञान का अंधेरा भी समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस दिवाली पर प्रतिज्ञा करें कि हम सदा ही सबके प्रति शुभ भावनाएं एवं शुभ कामनाएं बनाएं रखेंगें।

उन्होंने बताया कि जब बाहर की स्वच्छता के साथ-साथ हम आन्तरिक स्वच्छता पर भी ध्यान देंगे तभी सच्ची दिवाली मनेगी। उन्होंने कहा कि असली दीपक तो हमें अपने मन में प्रकाशित करने है। अपने मन को ज्ञान से इतना प्रकाशित करें कि इससे घृणा, नफरत, ईष्र्या, द्वैष और वैमनुष्यता जैसे दुर्गुण सदा के लिए दूर भाग जाएं। उन्होंने कहा कि दिवाली वास्तव में सतयुग का यादगार है। सतयुग में एक धर्म, एक राज्य, एक भाषा और एकमत था। विश्व में प्रेम, शान्ति और खुशी तभी हो सकती है जब सभी में वैचारिक, सैद्धान्तिक, राजनीतिक और धार्मिक एकता हो। अब वही समय है,जब हमें जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक मुल्यों को समावेशित कर श्रेष्ठ विश्व की रचना करनी है।

इस अवसर पर रंगोली सजाई गई तथा मां लक्ष्मी की झांकी आकर्षण का केंद्र रही तथा कुमारी पारुल द्वारा प्रस्तुत लक्ष्मी जी के नृत्य पर सभी थिरकने पर मजबूर हो गए।