103 वर्षीय दादी जानकी ने बताए सफल जीवन के सूत्र

scn news india

मनोहर

  • निःस्वार्थ प्रेम ही संसार में लाएगा खुशहाली : दादी जानकी
  • – तीन दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग एवं उद्घाटन समारोह का दूसरा दिन 
  • – 103 वर्षीय दादी जानकी ने बताए सफल जीवन के सूत्र 
  • –  देशभर से पधारीं चार सौ से अधिक बालब्रह्मचारी ब्रह्माकुमारी बहनों का किया सम्मान
  • – प्रदेशभर से चार हजार से अधिक भाई-बहनों ने लिया भाग 

 

भोपाल।

सारे संसार में कोई बात मुश्किल नहीं है। परमात्मा पिता पर विश्वास हो तो सब आसान है। ब्रह्माकुमारी बहनें जो संकल्प करती हैं वह पूरा हो जाता है क्योंकि सब कार्य परमात्मा शिव बाबा कराते हैं। ये सब शिव बाबा का कार्य है, ब्रह्माकुमारियां तो निमित्त हैं। करनकरावनहार तो बाबा है। भगवान कहते हैं- मेरे बच्चों तुम कोई भी फिक्र मत करो, सिर्फ मुझे याद करो, मैं तुम्हारे सारे कार्य आसान कर दूंगा। खुशी सबसे बड़ा गहना है, सदा खुशी में नाचते रहो। खुशी जीवन का शृंगार है।

उक्त उद्गार माउंट आबू से पधारीं ब्रह्माकुमारीज संस्थान की मुख्य प्रशासिका 103 वर्षीय राजयोगिनी दादी जानकी ने व्यक्त किए। वह ब्रह्माकुमारीज के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन के उद्घाटन एवं आध्यात्मिक सत्संग महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को सभा को संबोधित कर रही थीं। दादी ने कहा कि सुख-शांति भवन से भोपाल के भाई-बहनें सुख-शांति की अनुभूति कर सकेंगे।

दादी जानकी ने सुखमय जीवन के ये मंत्र भी दिए….

– जैसे हाथ में पांचों अंगुलियों की अपनी विशेषता है, जब सभी मिलकर कार्य करती हैं तो सब आसान हो जाता है, वैसे इस दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है। जब हम मिलकर कोई कर्म करते हैं तो वह आसान हो जाता है और सफल होता है।

  • – जीवन में सच्चाई से चलेंगे तो सुख मिलेगा।
  • – पांच बातें हर एक के दिल में छपी हों- पवित्रता, सत्यता, धैर्यता, नम्रता और मधुरता।
  • – यदि जीवन में त्याग-तपस्यामूर्त बनेंगे तो ही आत्मा का विकास होगा।
  • – सदा धीरज रखो, शांति से रहो।

आध्यात्म ही एकमात्र मार्ग: आईजी

आईजी लॉ एंड आर्डर जयदीप प्रसाद ने कहा कि समाज में कई तरह के दु:ख, समस्याएं और तनाव है। ऐसी स्थिति में आध्यात्म ही एकमात्र ऐसा मार्ग है जिससे सभी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। आज समाज में ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा की जा रहीं सेवाएं को और बड़े स्तर पर चलाने की जरूरत है।

 

सबका मालिक एक है: शहर काजी

 

शहरकाजी सैयद मुस्तक ने कहा कि सबका मालिक और परमात्मा एक है। उस मालिक की वंदना और आराधना करने के मार्ग अलग-अलग जरूर हैं लेकिन सभी धर्मों का मूल उद्देश्य अमन-चैन और शांति है। जब एक-एक व्यक्ति नेक नहीं बनेंगे तब तक शांति नहीं हो सकती है। हम उस मालिक को याद करेंगे तो वह हमें याद करेगा। परमात्मा की याद से जीवन सुख-शांति से गुजरेगा। उसे एक मानें और सब एक बनें।

भोपाल जोन की निदेशिका बीके अवदेश दीदी ने अभिनंद पत्र का वाचन किया। सुख-शांति भवन की निदेशिका बीके नीता बहन ने कहा कि भगवान के कार्य में हम कितना भी बड़ा संकल्प करें वह पूरा अवश्य होता है। राजयोग मेडिटेशन से मन की सुख-शांति मिलती है। भवन में सभी तरह के कोर्स आम नागरिकों के लिए नि:शुल्क कराए जाएंगे।

कॉलेज के विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों से बांधा समां

महोत्सव में आरडी मेमोरियल कॉलेज के विद्यार्थियों ने नमो…नमो गीत की धुन पर नौ देवियों की जोरदार प्रस्तुति दी, जिसे देखकर पूरा पांडाल तालियों से गूंज उठा। वहीं आकृति बहन एवं गु्रप के सदस्यों ने गली में आज चांद निकला गीत पर दादी के सम्मान में नृत्य की प्रस्तुति की। इसके अलावा बच्चों ने नंदिनी-वंदिनी, चलते-चलते…, आया नया रंग छाया आदि गीतों की धुन पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। समापन पर सभी अतिथियों ने मिलकर केक काटा और दादी जानकी का 103वां जन्मदिन मनाया। संचालन चंडीगढ़ से पधारीं बीके अनीता दीदी ने किया।

ये भी अतिथि के रूप में रहे उपस्थित….

दादी की सहयोगी माउंट से पधारीं बीके हंसा बहन, कलेक्टर डॉ. सुदाम खाडे, आयुष विभाग की पूर्व प्रिंसिपल सेक्रेटरी शिखा दुबे, इंदौर से क्षेत्रीय निदेशिका बीके हेमलता, छतरपुर से बीके शैलजा, भोपाल से डॉ बी के रीना, आरडी मेमोरियल गु्रप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन हेमंत सिंह चौहान, एनएचडीसी के चीफ एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एजी अंसारी, डीएसीआईडीएस के वीएसएम यशवंत कुमावत, रेलवे विजिलेंस से आईपीएस एसएन शुक्ला, सिख समाज से ज्ञानी दिलीप जी, बौद्ध समाज से वंते सुमित सहित पूरे मध्यप्रदेश से पधारे चार हजार से अधिक नागरिकगण उपस्थित रहे।

महोत्सव के अंतर्गत देश भर से आये हुई बाल ब्रह्मचारिणी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बहनों का सम्मान किया गया इस अवसर पर भोपाल गोविन्दपुरा क्षेत्र की विधायक कृष्णा गौर जी ने सभी बहनों को अपनी शुभ कामनायें दी साथ ही उन्होंने दादी जानकी जी से आशीर्वाद भी प्राप्त किया। इस अवसर पर डी ज़ी होम गार्ड महान भारत सागर जी भी उपस्थित थे
जब ब्यक्ति के मन में किसी कार्य को करनें की दृढ़ इच्छा होती है तो वह व्यक्ति उस कार्य को करनें के लिए हर संभव प्रयास करता है। मानव सेवा के लिए वैसे तो कई मिसालें मिलती हैं लेकिन दादी जानकी जी नें 103 साल की उम्र में सम्पूर्ण विश्व में मानव सेवा की जो मिसाल प्रस्तुत की है उसनें वैज्ञानिकों को भी सोचनें पर मजबूर कर दिया है।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की अंतर्राष्ट्रीय मुख्य प्रशासिका दादी जानकी जी योग एवं तपस्या की जीती जागती प्रतिमूर्ति हैं। अपनी योग एवं तपस्या की शक्ति से आपनें लाखों लोंगों का जीवन परिवर्तित किया है। आप 103 वर्ष की उम्र होते हुए भी ब्रह्माकुमारीज की मुख्य प्रशासिका हैं एवं लगभग 150 देशों के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज की लगभग 10000 शाखाओं का कुशल संचालन कर रही हैं।

आप प्रतिदिन 4 बजे सुबह से खुद भगवान का ध्यान करती हैं। एवं साथ ही विश्व शांति के लिए प्रतिदिन सुबह एवं सायं सामूहिक रूप से योग साधना करवाती हैं। आप संस्था के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू में समाज के हर वर्ग के लोगों को साल में एक बार विशेष रूप से आमंत्रित करती हैं। एवं उन्हे जिंदगी की भगदौड़, तनाव से मुक्त जिन्दगी के कुछ अमूल्य दिन बितानें का अवसर प्रदान करती हैं।

आपके अंदर दया भाव कूट कूटकर समाया हुआ है। किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय आप ब्रम्हाकुमारीज की ओर से विशेष मदद के लिए तत्पर रहती हैं। दादी जानकी के बारे में महिमा करना सूरज को दीपक दिखानें के समान है। दादी जानकी के विषय में उक्त जानकारी देते हुए ब्रह्माकुमारीज भोपाल की बी. के. डा. रीना बहन नें दादी जानकी जी के भोपाल आगमन के तारतंम्य में दी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!