हमारे बारे में

Scn news india

(नोट -कृपया समय हो तो ही लेख पढ़े अन्यथा अपना वक्त और हमारी मेहनत जाया ना करें )

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संस्थापक/संपादक - राजेंद्र वंत्रप
   संस्थापक/संपादक       राजेंद्र वंत्रप 
चैनल हेड - हर्षिता वंत्रप
चैनल हेड – हर्षिता वंत्रप

एससीएन न्यूज इंडिया  परिचय

एससीएन न्यूज इंडिया का नाम ही पत्रकारिता में तकनिकी मिश्रण का नवीनतम प्रयोग है। भारत सरकार की “डिजिटल इंडिया” मुहीम में डिजिटल मिडिया को बढ़ावा देने हेतु 2007 से संचालित सतत अनवरत एक नवीन आयाम है। हमारा उदेश्य त्वरित गति से जनसरोकार की हर छोटी से छोटी खबर को   शासन प्रशासन तक पंहुचा  रूबरू करना एवं शासन प्रशासन द्वारा  जारी योजनाओं से संबधित महत्वपूर्ण बिंदुओं -विषयों -सूचनाओं  को जनता तक पंहुचना।

यूँ तो भारत में इंटरनेट की शुरुआत 14 अगस्त सन 1995 में हुई थी हालांकि इसे शुरू 15 अगस्त के दिन किया गया था। विदेश संचार निगम लिमिटेड अपने अपने टेलीफोन लाइन ब्रॉडबैंड से के जरिए दुनिया से भारत के कंप्यूटरों को जोड़ा था। लेकिन प्रचलन में आते आते कई साल लग गए। 2 G से 3 G में तकनिकी के 2009 में आने के बाद मोबाईल पर इंटरनेट का चलन बढ़ गया। और 2015 में 4 G टेक्नोलॉजी ने तहलका मचा दिया। साल 2019 में भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 65 करोड़ थी जो 2020 में और बढ़ने की संभावना है।

हमने 2 G तकनिकी में डिजिटल मिडिया की शुरुआत की , स्वाभाविक है जब हमारा खूब मजाक उड़ा होगा।  किन्तु हम विचलित नहीं हुए।  हम जानते थे की एक दिन यही लोग हमारा उत्साह बढ़ाएंगे। और जिस गति से सुचना प्रसारण की तकनिकी विकसित हुई हमने  उसी  गति से  अपने पाठकों तक अपडेट समाचारों को पंहुचने हेतु नई  नई  तकनिकी का प्रयोग किया ,पाठकों व् दर्शकों तक त्वरित समाचारों के संप्रेषण का प्रयास किया है। और करते रहेंगे।

” महत्वपूर्ण ये नहीं है की हम कौन है , महत्वपूर्ण ये भी नहीं है कि हम किस (प्रिंट /इलेक्ट्रॉनिक ) मिडिया से , महत्वपूर्ण ये है की हमारे पास जो सुचना है वो कितनी महत्वपूर्ण है। “

आज का युग सुचना संचार क्रांति प्रौद्योगिकी का युग है। और यूजर्स भी आज अपडेट चाहता है। अब समाचार  प्रिंट और टेलीविजन से निकल इंटरनेट पर आने लगे है। व्हाट्सएप और फेसबुक ने जिस गति को 100 गुना बढ़ा दिया है। मोबाईल के माध्यम से  सोशल मिडिया – फेसबुक , ट्विटर ,व्हाट्सएप , ईमेल आदि द्वारा पाठकों तक पंहुच रहे है। जो आज की जरूरत है। जो इसे आज नहीं मानते उन्हें कल मानना पड़ेगा।

अमूमन देखा गया है कि वेबसाइड , पोर्टल को छोटा आँका जाता है। इनमे कार्यरत पत्रकारों को तव्वज्जो नहीं दी जाती , उसकी सिर्फ एक ही वजह है “कापी पेस्ट” आसान और कम खर्चीला होने की वजह से  इस क्षेत्र में हर कोई युवा जो तकनिकी क्षेत्र व् इंटरनेट की जानकारी रखता है पत्रकारिता का अनुभव ना होने पर भी हाथ आजमाता है। ये बात और है कि  कुछ समय चलने के बाद उसका उत्साह ठंडा पड़ जाता है और कई कई दिनों तक वेबसाइड अपडेट ही नहीं होती या बंद हो जाती है।

“शुरू करना आसान है लेकिन चलाना कठिन है” शुरुवाती दिनों में कम खर्च में लोग वेबसाइड बना तो लेते है लेकिन आगे जब स्पेस बढ़ाने और अन्य अपग्रेडेशन की आवश्यकता पड़ती है और खर्चे बढ़ने लगते है तो ऐसे में अधिकांश वेब पोर्टल दम तोड़ देते है। और यही कारण है जो वेब आधारित डिजिटल मिडिया की विश्वसनीयता को कम करता है।

जिसके लिए सरकार को एक निर्धारित मापदंड की गाइडलाईन  बनाने की आवश्यकता है। ऐसा नहीं है की सरकार ने डिजिटल मिडिया  हेतु गाइडलाईन नहीं बनाई है , पंजीकरण से लेकर विज्ञापन एवं अधिमान्यता तक नियमावली है जिसका पालन करना अनिवार्य है। लेकिन जानकारी के आभाव में नौ-सिखिये जो पत्रकारिता का  मजाक उड़ाते है इन पर सख्ती नहीं है।

वेब पर ही नहीं प्रिंट और टीवी चैनलों में भी यही हाल है –

ऐसा ही समाचार पत्रों के साथ भी है लाखों की संख्या में भारत के समाचारों के पंजीयक से दैनिक , सांध्य दैनिक ,साप्ताहिक ,पाक्षिक ,मासिक ,त्रैमासिक ,छैमासिक और वार्षिक समाचार पत्र पत्रिका पंजीकृत है। जो सैकड़े की संख्या को छोड़ बाकी सब 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही नजर आते है। किन्तु 2019 में RNI के फटके में हजारों समाचार पत्र के पंजीयन निरस्त कर दिए गए। और कुछ पर तलवार लटकी है। जो कभी भी निरस्त हो जाएंगे। बचेंगे वही जो नियमित प्रकाशन करते है।

ऐसा ही टेलीविजन न्यूज चैनल के साथ भी है ,1000 से ज्यादा चैनलों में कई ऐसे भी है जिन्हे कोई देखता तक नहीं है। कई तो बंद हो गए और कुछ ने अपने राइट्स दूसरों को बेच दिए है। कोई किसी अन्य के टेलीपोर्ट पर अपना राग आलाप रहा है।

इन दोनों की तुलना में देखें तो वेबसाइड कम ही नजर आती है। और आने वाले समय में जल्द ही इसकी गुणवत्ता की गाइडलाईन भी सामने आएगी। जब धीरे धीरे बड़े पत्रकार प्रिंट और टेलीविजन से निकल वेब पर आने लगेंगे । जिसकी शुरुआत हो गई है।

 एससीएन न्यूज इंडिया  वेब पोर्टल , मोबाईल ऐप  , युटुब चैनल  व् सोशल मिडिया के माध्यम से विगत सन -2007 से सतत कार्यरत है। 

 दैनिक समाचार कंटेंट  हेतु भारत सरकार की नई  वेबनीती  के तहत समाचार एवं विज्ञापन प्रकाशन सम्बन्धी सभी गाइडलाईन के  परिपालनार्थ पंजीकृत वेब पोर्टल है। जिसके समस्त दस्तावेज प्रमाण पत्र चैनल के पास उपलब्ध है। आज 20 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स  हमें फॉलो करते है। रीजनल न्यूज वेब पोर्टल में सबसे बड़ा नेटवर्क है। जहाँ नई  प्रतिभाओं को अवसर व्  संवाददाताओं को सम्मान मिलता है। समाचारों के संपादन से ले कर संवाददाताओं की नियुक्ति के सभी अधिकार भारत सरकार की इंटरनेट वेब नीती अंतर्गत पंजीकृत एवं सुरक्षित है। 

मकसद 

एससीएन न्यूज इंडिया की स्थापना 2007 में संस्थापक राजेंद्र वंत्रप   के द्वारा मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल  जिले  बैतूल से एक सकारात्मक दृष्टिकोण को लेकर की गई। हमारा मकसद  सनसनी फैलाना नहीं बल्कि गंभीर पत्रकारिता के माध्यम से उन परिदृश्यों को सामने लाना है , जो जनहित में ज्वलंत है।

सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक  एवं प्रशासनिक अव्यवस्थाओ को उजागर करना व् गरीब असहाय एवं जरूरतमंद की आवाज जिम्मेदारों के कानों तक पंहुचना साथ ही   समाज एवं व्यवस्था के सकारात्मक पहलुओं को भी जनता तक त्वरित गति से पहुँचाने का लक्ष्य ले कर हम आज भी समाज के सजग प्रहरी की भूमिका में डट कर खड़े है ।

स्थापना 

2007 में भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक द्वारा  पंजीकृत शीर्षक “सतपुड़ा सिटी नेटवर्क” साप्ताहिक समाचार पत्र द्वारा स्वछंद पत्रकारिता की शुरुआत की । जो भोपाल से प्रादेशिक स्तर  पर प्रकाशित किया जाता रहा।

किन्तु हमारा  मकसद समाचारों को और तीव्रता से लोगों तक पहुंचना चाहते थे , जो समाचार पत्र से संभव नहीं हो पा रहा था।

बड़े समाचार चैनलों की पंहुच से बाहर कई गाँव ऐसी दशा में थे जिनका चित्रण शब्दों में करा पाना मुमकिन ही नहीं था। ऐसे में उन अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति की आवाज को जिम्मेदारों के कानों तक एवं भारत की निर्णायक जनता के समक्ष लाने समाचारों को सीडी पर निकल एक विजन क्रांति की शुरुआत की।

सीडी पर निकला समाचार बुलेटिन 

2009 में पत्रकारिता में तकनिकी का अभिनव प्रयोग  कर जरुरत मंदों की दबी कुचली आवाज को सीडी के माध्यम से साप्ताहिक समाचार बुलेटिन द्वारा निकलना शुरू किया और जन्म हुआ “सतपुड़ा सिटी नेटवर्क” से “एससीएन न्यूज” का जिसकी समाचारों की सीडी प्रदेश के अधिकांश जिलों के केबल नेटवर्क पर प्रसारित की जाने लगी। यह सेवा Telecom Regulatory Authority of India के केबल संचालक नेटवर्क अधिनियमों के तहत पंजीकृत थी। सीडी में उन समस्याओं को समाचार माध्यम से प्राथमिकता के साथ उठाया जाता जिनका सरोकार जनता व् सरकार से होता।

2009 से  सोशल मिडिया पर सक्रियता 

धीरे धीरे हमारे इस प्रयास की चहु ओर  प्रशंसा होने लगी और तेजी से हम लोकप्रियता के शिखर की ओर बढ़ते चले गए। किन्तु ये सीडी भी साप्ताहिक समाचारों के बुलेटिन की हुआ करती थी। लोगों की आपेक्षाएँ अब हमसे बढ़ने  लगी थी।  जिसके फलस्वरूप हमने केबल नेटवर्क संचालकों के साथ मिल लोकल चैनलों पर दैनिक समाचार बुलेटिन निकलना शुरू कर दिया। हमारा मकसद था हर छोटी से छोटी गली मोहल्लो तक की खबर को शासन प्रशासन के संज्ञान में लाना जो प्रमुख समाचारों की भीड़ में खो जाती थी । और इस प्रयोग में हम काफी हद तक सफल रहे। व्यवस्थाओ में बहुत कुछ बदलाव दिखाई देने लगा।

वहीँ अब इन्ही समाचारों को हमने 2009 से ही सोशल मिडिया प्लेटफार्म पर लाना शुरू कर दिया था। फेसबुक -ट्विटर -यूटूब चैनल  इस बात के गवाह है। लेकिन इंटरनेट की गति इनमे सबसे बड़ी बाधा थी। जिसके चलते और कुछ नया करने की ललक और लालसा बढ़ती गई।

और फिर साथ  जन्म हुआ सन 2010  वेब साइड  www.scnnewsindia.com  का जो  आज मध्यप्रदेश के समस्त जिले / तहसील/ ब्लॉक/ग्राम/गली /कस्बों  में लोकप्रिय बन गई । हमें ख़ुशी है कि आज हमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी  पढ़ा जाता है।

हमारी मेहनत, लगन , सच्चाई  व्  ईमानदारी  ने जनता का विश्वास  हासिल करने में हमारी मदद की। जनता के अटूट विश्वास की वजह से लोकप्रिय लोकल न्यूज चैनल में हमारी पहचान बन गई। हमने कई स्थानीय ज्वलंत समस्याओं  मुद्दों पर काम करना शुरू कर दिया।   प्रायः हमारा फोकस उन क्षेत्रों पर रहा जो प्रकाशन से अछूता मिला ,जिसे हाईलाइट करने की जरूरतें दिखी।  गरीब  जो दो जून की रोटी के लिए दिन भर पसीना बहाते लेकिन रोटी को मोहताज थे , वो लोग जो पढ़े लिखे होने के बाद भी बेरोजगारी के अँधेरे में जीने को मजबूर थे। और वो लोग जो पात्र हो कर भी सरकारी योजनाओं से महरूम थे। हम उनकी आवाज बने।

यदि कोई कहता है की आपने क्या कमाया , तो निश्चित ही हम स्वीकार करते है की हमने पैसा नहीं कमाया। लेकिन जो हमने कमाया शायद वो पैसे से नहीं खरीदी जा सकता । 

इसी वजह से हम विगत 10  वर्षों से टिके हुए है। बहुत से लोगों को आते जाते देखा है। जरा सोचिये यदि हमारे देश के वे तमाम क्रांतिकारी ,वीर , शहीद होने के पहले ये सोचते की देश की क्रांति की लड़ाई में उन्हें क्या मिलेगा, क्या कमाएंगे , तो शायद आप और हम आज भी गुलाम होते। उन्होंने निस्वार्थ क्रांति की उस लड़ाई में अपना बलिदान दिया और देश से अंग्रेजों को खदेड़ आने वाली पीढ़ी को नई  दिशा दी ,खुली हवा दी,  ये जज्बा हर किसी में नहीं होता कुछ खास ही इसके लिए बने है।

SMS स्क्रेच कार्ड ने मचाया  तहलका (पत्रकारिता में नई तकनिकी की थी विकसित )

सामाजिक दायित्व निभाने की हमारी महत्वकांक्षाये और लोगों की आपेक्षाएँ हमसे बढ़ती गई थी  और एयरकंडीशनर कमरों में बैठे जिम्मेदारों तक मजलूमों की बात पहुँचाने का जूनून सिर  चढ़ कर बोलता रहा। अब सवाल था की हमारी आवाज इस भीड़ में उन जिम्मेदारों तक कैसे पंहुचेगी , हमने मोबाईल तकनिकी का सहारा लिया और शुरू को 2010  में SMS  सेवा  जो ब्रेकिंग न्यूज  माध्यम से रजिस्टर्ड मोबाईल यूजर्स को भेजी जानी लगी , यह सेवा टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इण्डिया से रजिस्टर्ड थी।

जो क्रांतिकारी पहल साबित हुए लोग पंजीकरण वाऊचर ढूंढते नजर आते थे । हमारी ये सेवा अब मंत्रालयों के कमरों तक पंहुच गई। मंत्रियों के बंगलों तक पहुंच गई। पुरे प्रदेश में फैले नेटवर्क में हमारे जांबाज पत्रकार रात दिन एक कर त्वरित सूचनाओं को लेकर आते और हम क्रांतिकारी तकनिकी माध्यम से ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट SMS द्वारा लोगों तक पंहुचा देते।

जिनमे समाचार ,घटनाएं ,समस्याएं ,योजनाओं को प्रमुखता से लाया जाता। और मिडिया कंटेंट के अधिनियम की  जरुरत के आधार पर हमने scn media privete  limited कंपनी बनानी पड़ी। राजधानी भोपाल से शुरू हुआ ये सफर अन्य राज्यों में भी लोकप्रिय होता चला गया। जिसकी प्रसंशा स्वयं तात्कालिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता सहित अन्य मंत्रियों द्वारा की गई।

SMS  सेवा काफी प्रभावी थी , जिसके त्वरित सकारात्मक परिणाम भी मिले , हमारी यह सेवा पुलिस विभाग के लिए  काफी कारगर साबित हुई , इस सेवा में थाना प्रभारियों से ले कर गृहमंत्रालय तक के नम्बर जुड़े थे।  इसके आलावा प्रदेश के लगभग 10 लाख से भी ज्यादा लोग इस सेवा में पंजीकृत थे।  जिसकी वजह से गली गली एससीएन न्यूज SMS सेवा के वाउचर बिकने लगे पर पत्रकारों को आय का जरिया भी मिल गया। आपको बता दे यह स्क्रेच वाउचर द्वारा SMS सेवा प्रदान करने वाला ब्रेकिंग न्यूज चैनल पुरे भारत में एक मात्रा ब्रेकिंग न्यूज देने वाला पहला और आखरी चैनल रहा।

चूँकि TRAI के नियमानुसार यह सेवा  केवल पंजीकृत मोबाईल नम्बरों पर ही  प्रदान की जा सकती थी अभी भी एक बड़ा तबका त्वरित समाचारों को पाने ने महरूम था और हमारा लक्ष्य उन्हें भी जोड़ना था। जिस हेतु 2013 में इंटरनेट माध्यम से ब्रेकिंग न्यूज नोटिफिकेशन भेजने की अभिनव प्रक्रिया शुरू की गई जो पूर्णतः निशुल्क थी। जिस वजह से अपेक्षा से भी अधिक हमें लोगों का प्रतिसाद मिला। और तेजी से मोबाईल तकनिकी से समाचारों का सम्प्रेक्षण बढ़ता चला गया। हालांकि इस बीच कई उतार चढाव से गुजरना पड़ा। पर जिसका लक्ष्य निर्धारित हो वह अपने पथ से कैसे डीग सकता है। जो सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।

2013 में किया मोबाईल एप लांच 

एससीएन न्यूज इंडिया समय के साथ बदलती तकनिकी माध्यमों को स्वीकार कर आगे बढ़ने का नाम है। समय की मांग को देखते हुए एससीएन मिडिया द्वारा एंड्रॉइड और आई फोन यूजर्स हेतु मोबाईल एप लांच किया। जो अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्म पर ख्याति प्राप्त हुआ।