सिद्धो की आराधना से सुख समृद्धि और सभी परेशानियां होती है दूर- मुनिश्री विमलसागर जी

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अभिषेक जैन संभाग ब्यूरों 

दमोह। सर्व श्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के’ शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी मुनि अनंत सागर जी मुनि श्री धर्म सागर जी मुनि श्री अचल सागर जी मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री सिद्धचक्र सोलह मंडल विधान के द्वितीय दिन श्री दिगंबर जैन नन्हे मंदिर से श्री जी की शोभायात्रा प्रारम्भ होकर उमा मिस्त्री तलैया प्रांगण पहुँची वहाँ धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु जी की कृपा से अचेतन भी चेतन धाम बनते हैं। आपके नगर गौरव मुनिश्री  निर्मोहसागर जी दमोह से मोह छोड़कर आचार्य श्री के चरणों में सिद्धों की आराधना कर रहे हैं। सिद्धो की आराधना के लिए मोह को छोड़ना आवश्यक है। आप लोगों ने तपो में भी विधान करने का मन बनाया है यह बहुत खुशी की बात है। जो नहीं कर पाएंगे वह पछताएंगे। बहुत सारे लोगों की विधान करने की भावना रहती है लेकिन हो नहीं पाते है पंचकल्याणक तो आचार्य श्री के आशीर्वाद से बहुत हो जाते हैं लेकिन विधान करने के लिए बहुत पुण्य की आवश्यकता होती है। जो इस विधान में सम्मिलित होगा उसको सुख-समृद्धि और सभी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।

आचार्य श्री ने कहा था कि सिद्धचक्र विधान कर लो और एक जीव को अभय दान दे दो दोनों में अभय दान भारी है। धर्म की शुरुआत दया से होती है। प्रदर्शन तो ऊथला दर्शन गहराता है यह विधान प्रदर्शन के लिए नहीं आत्म दर्शन के लिए है। जितने भी सिद्ध बने है उन्होंने सिद्ध चक्र की आराधना की है। हम लोग भी सिद्ध चक्र की आराधना में लगे हुए हैं। चक्कर से छुड़ाने वाला होता है सिद्धचक्र। जब भी किसीको उपदेश दो तो लोगों को अच्छे से आराधना करना है यह उपदेश दो। गिरने वाले कार्य नहीं करना है उठने वाले कार्य करना है। जिनका कोई नहीं होता है उनका भगवान होता है आपकी दान राशि किसी के प्राण बचा लेती है तो आप उसके भगवान हो गए। सभी मंदिरों के लोग इसी समवसरण में प्रतिदिन पूजन करें तो अच्छा रहेगा। सोने वालों को जगाते रहना।

युवाओं को भी जगाना है और यहाँ बुलाना है ।शाम को मुनिश्री भावसागर जी ने कहा कि जल और विद्युत का दुरुपयोग रोकना जरूरी है। ’जल है तो कल है। जल है तो जीवन सफल है। जल की सोचे , कल की सोचे’ आने वाले दिनों में हम सभी बूंद-बूंद जल को तरस जाएंगे। इसलिए हम प्रत्येक कार्य में जल बचाएं तो ही आगे हमें जल प्राप्त होगा। हम पानी की टंकी भर जाने के बाद भी बंद नहीं करते है और अन्य माध्यम से पानी बर्बाद करते रहते हैं। जल प्राप्ति के साधन सीमित है लेकिन खर्च असीमित है। इसी प्रकार विद्युत का भी दुरुपयोग ना करें। मुनिराज का कमंडल यह संदेश देता है कि जल रखो तो कमंडल भरकर लेकिन खर्च सीमित करो। इसी प्रकार धन कमाओ तो लेकिन खर्च सोच समझ कर करो। ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी ने बताया कि सिद्धचक्र विधान में यह पहला विधान है जिसमें लगभग 5 लाख राशि के श्रीफल चढ़ाए जाएंगे इस विधान की राशि गौशाला को जाएगी आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कहा था कि जिस नगर में गौशाला रहती है वहां सुख समृद्धि रहती है।5 मुनिराजों के सानिध्य में दमोह में प्रथम बार विधान हो रहा है। मैं बहुत खुश हूं कि मुनिराजों के सानिध्य में रहने का अवसर प्राप्त हो रहा ळें यह चमत्कार है कि आचार्यश्री ने दमोह की समाज को आशीर्वाद दे दिया। पूरा परिसर कम पड़ जाएगा। पशुओ को टीनसेट बनाकर छाया दोगे तो तुम्हे छाया प्राप्त होगी। यह सिद्धचक्र विधान सभी परिवार समाज के साथ मिलकर कर रहे है। राजेंद्र जैन अटल प्रचार प्रसार का कार्य कर रहे है यह प्रसंशनीय है।

 


16 मंडलों में सौधर्म इंद्र करेंगे सिद्धों की आराधना- सिद्ध चक्र महामंडल विधान अवसर पर मिस्त्री की तलैया विधान परिसर में 16 भव्य मंडलो की स्थापना की गई है। जिनमे सौधर्म इंद्र परिवार के साथ श्रीपाल मैना सुंदरी बने पात्र पूजन अर्चन करके सिद्धों की आराधना करेंगे। मंच पर पांच मंडलो के लिए पूर्व में ही पात्रो का चयन हो गया था। आज शेष 11 मंडलो के लिए सौधर्म इन्द्रो का चयन मुनि संघ के सानिध्य में किया गया। इन मण्डलो में सौधर्म इंद्र बनकर श्रीजी स्थापना करने का सौभाग्य अटल राजेन्द्र जैन परिवार, अर्पित अशोक जैन परिवार, दुलीचन्द जैन अथाई, अशोक जैन बरंडा, श्रीमति नीलू बजाज परिवार भोपाल, विनोद कापड़िया परिवार, कस्तूरचंद नीरज जैन मोबाइल जॉन, महेंद्र जैन गुड़िया फोटो, मुकेश जैन मम्मा, सुरेंद्र कुमार बनवार, संतोष सौरभ जैन, अभय जैन वकील, जितेंद्र कुमार भारिलय और अंकित जैन खजरी परिवार ने अर्जित किया है।
नसिया जी एवं नन्हे मन्दिर से आये श्री जिनबिंब- शनिवार को प्रातः बेला में नसिया जी मंदिर एवं नन्हे मंदिर मन्दिर जी से श्री जिन विंब प्रतिमाओं को शुध्दि के बस्त्रो में श्रावक जन विधान स्थल उमा मिस्त्री की तलैया लेकर पहुंचे। जहां विधानाचार्य संजीव भैया के निर्देशन में अभिषेक शांति धारा संपन्न हुई। तत्पश्चात सौधर्म इंद्र बने पात्रो ने मंडलों में श्री जिन प्रतिमाओं की स्थापना करके पूजन किया।

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