सागर में EVM को लेकर बवाल 48 घंटे बाद पंहुची मशीने

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अभिषेक जैन  

सागर – सागर जिले की खुरई विधानसभा से 5 फोर व्हीलर एक स्कूल बस में भारी मात्रा में एवीएम मशीनें सागर इंजीनियरिंग कॉलेज मैं 2 दिन बाद जमा होने आई जबकि सागर कलेक्टर द्वारा प्रेस नोट जारी कर उल्लेख किया गया था की आठों विधानसभाओं से एबीएम मशीनें आ चुकी है जो सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में ताला लगा कर सील बंद कर दिया गया था परंतु 2 दिन बाद उक्त मशीनें कहां से आई आमजन मानस भी सोच में  है,  उक्त मशीनों की चर्चा सुनते ही जिले भर के कांग्रेसी इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचकर हंगामा मचाने लगे, कांग्रेसियों ने गंभीर आरोप लगते हु कहा हैं कि  अगर निष्पक्ष जांच होती है स्थिति सामने आ जाएगी।

मध्य प्रदेश में मतदान के बाद अब मतगणना का इन्तजार है, ईवीएम मशीनों को सुरक्षा के घेरे में रखा गया है, इस बीच मशीनों से छेड़खानी की आशंकाओं की खबरे भी आनी शुरू हो गई है| कांग्रेस ने मतगणना से पहले इसकी आशंका जाहिर की है, भोपाल में स्ट्रांग रूम के बाहर लगी एलईडी बंद होने की शिकायत चुनाव आयोग से की गई| वहीं सागर के खुरई विधानसभा क्षेत्र में मतदान खत्म होने के 48 घंटे बाद ईवीएम मशीनों को जमा करने का मामला सामने आया है | इस पर कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया| जिस पर प्रशासन ने घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही का आश्वासन दिया है|

खुरई विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत संदिग्ध रूप से बड़ी संख्या में सागर पहुंची ईवीएम मशीन को लेकर विवाद की स्तिथि बन गई| इसकी जानकारी लगते ही सैकड़ों की संख्या में कांग्रेसियों ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर सागर के कार्यालय की घेराबंदी | कांग्रेस का आरोप है कि बिना नंबर के जिस स्कूल वाहन में यह ईवीएम मशीनें पहुंची उसमें कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कोई सही जवाब नहीं दे पाया| कांग्रेस का आरोप है कि मशीनों में गड़बड़ी करते हुए उन्हें गुपचुप ढंग से स्ट्रांग रूम में जमा कराया जा रहा था।

कांग्रेस ने मांग की है कि इन मशीनों का भौतिक सत्यापन उनके सामने कराया जाए तथा यह मशीन मतगणना समाप्त होने तक अलग सुरक्षित रखी जाएं। इसके साथ ही नियम विरुद्ध रूप से 48 घंटे तक इन मशीनों को रोक के रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारी को तत्काल बर्खास्त करते हुए अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ संदीप सबलोक ने इसे गंभीर चूक मानते हुए सवाल उठाते हुए कहा है कि यह लापरवाही नहीं बल्कि सोची समझी साजिश का परिणाम है और निर्वाचन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।

 

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