रोमांचक हुआ भोपाल लोकसभा चुनाव – साध्वी ने कहा चुनाव नहीं धर्म युद्ध है

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मनोहर

भोपाल – 2019 का चुनाव का मुख्य रोमांचक पुरे देश में राजधानी भोपाल हो गया है  कांग्रेस ने जहाँ एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उतार बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी , तो वही अब बीजेपी ने भी नहले पर दहला खेला है और भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को प्रत्याशी बना मैदान में कतार कांग्रेस को चुनौती दी है।  इस संसदीय सीट पर साध्वी प्रज्ञा का सीधा मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से होगा।  जो बड़ा ही दिलचस्प और रोमांचक होने वाला है।
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी को भोपाल सीट पर  दिग्विजय सिंह के टक्कर का कोई नेता नहीं मिल रहा था।  पहले शिवराजसिंह चौहान को पार्टी मैदान में उतरने जा रही थी , किन्तु उन्होंने भी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर साफ़ कर दिया की वे तैयार नहीं है।

इसके बाद पार्टी ने उमा भारती का नाम सुझाया।  लेकिन उन्होंने भी सफाई से , बच निकलने का रास्ता अपना कर बात को ताल दी।  अब बची साध्वी प्रज्ञा लेकिन प्रज्ञा  पार्टी की सदस्य नहीं थी , ऐसे में बीजेपी ने संघ के दबाव में उन्हें पार्टी की सदस्य्ता दे ते हुए टिकट भी दे दिया।

गौरतलब है की इन दिनों जमानत पर चल रहीं  है , प्रज्ञा ठाकुर प्रत्याशी  ऐलान से चंद घंटे पहले ही भाजपा में शामिल हुई थीं।  उनको टिकट देना इस बात की ओर इशारा करता है कि भगवा दल का यही प्रयास है कि हिंदुत्व को ही केंद्रीय मुद्दा बनाए रखा जाए. यह सीट कई चुनावों से भाजपा के पास ही है.

एनआईए अदालत ने मालेगांव मामले में उनके खिलाफ सख्त मकोका कानून के तहत लगे आरोपों को हटा लिया था लेकिन उनके सहित अन्य लोगों पर अभी भी दूसरे आरोप चल रहे हैं।

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का जन्म मध्य प्रदेश के कछवाहाघर में हुआ था. इतिहास में पोस्ट ग्रैजुएट प्रज्ञा ठाकुर अपने शुरुआती समय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रहीं. 2007 में उन्होंने संन्यास ले लिया था. उन्हें भारत भक्ति अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर बनाया गया और उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णचेतनानंद गिरी के नाम से जाना जाता है.

प्रज्ञा ठाकुर पर आरोप 

  • 29 सितंबर, 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव बम धमाके में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को आरोपी बनाया गया था. इस बम धमाके में 8 लोग मारे गए थे.
  • इस मामले में उनके साथ लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को भी आरोपी बनाया गया था.
  • साध्‍वी प्रज्ञा का नाम आरएसएस नेता सुनील जोशी हत्‍याकांड में भी सामने आया था. हालांकि, इस मामले में उन्हें बरी कर दिया गया था.
  • महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस ने प्रारंभिक जांच के बाद प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया था.
  • इसके बाद धमाके की जांच एनआईए को सौंप दी गई थी. एनआईए ने जांच में पाया था कि बम धमाके की साजिश भोपाल में ही रची गई थी.
  • प्रज्ञा ठाकुर करीब 9 वर्षों तक जेल में रही थीं. फिलहाल इस मामले में वह जमानत पर बाहर हैं.
  • जेल से बाहर आने के बाद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था कि उन्हें 23 दिनों तक यातना दी गई थी.
  • साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने ‘हिंदू आतंकवाद’ का जुमला गढ़ा था और भगवा आतंकवाद कांग्रेस का षड्यंत्र था.
  • इसे साबित करने के लिए कहानी रची गई और उन्हें झूठे केस में फंसाया गया।

चुनाव नहीं धर्म युद्ध है 

प्रत्याशी बनाये जाने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया लेकिन लड़खड़ा गई ,बचाव हेतु शिवराज सिंह चौहान को बीच में बोलना पड़ा। वैसे साध्वी प्रज्ञा सिंह ने ये स्वीकारा है की राजनीती में वह नई है , अपने वरिष्ठों के सहयोग से चुनाव जीतेगी।  दूसरा उन्होंने ये भी कहा है कि ये चुनाव धर्म और अधर्म के बीच  है। वो यह चुनाव हिंदुत्व को बचने के लिए एवं दिग्विजय को हारने के लिए लड़ेगी।

साध्वी कोई चुनौती नहीं 

साध्वी को भोपाल से प्रत्याशी बनाये जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा है की साध्वी कोई चुनौती नहीं है। साध्वी प्रज्ञा सिंह के आने से उनका रास्ता और साफ़ हो गया। वे प्रचंड मतों से जीतेंगे।

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