म प्र फुटबॉल संघ में घपलेबाजी , आरटीआई  एक्टिविस्ट ने लगाया 1 करोड़ की घपले बाजी का आरोप

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सुबीर मुख़र्जी जबलपुर

  • म प्र फुटबॉल संघ में घपलेबाजी 
  • आरटीआई  में सामने आया 1 करोड़ से अधिक की आर्थिक चोरी का खुलासा । 
भोपाल। आर्थिक चोरी के मामले अब खेल संघ में भी सामने आ रहे  है । जी हां हम बात कर रहे एक ऐसे मामले  की  जिसमे दो तीन लाख नही बल्कि 1 करोड़ से अधिक का घपला सामने आ रहा है । पैसो के लालचियो  ने खेलो संघ तक को नही छोड़ा ।  जी हां ताजा मामला मध्यप्रदेश फुटबॉल संघ से जुड़ा है । जिसमे पैसो के लालचीयो  ने खिलड़ियों के हक पर डाका डाल करोड़ो की हेराफेरी कर दी और किसी को भनक तक नही लगने दी ।  आज हम सबसे बड़ा खुलासा करने जा रहे है जिसमे कैसे  फ़ुटबाल  खेल के नाम पर करोड़ो रूपये का घपलेबाजी की गई है । चलाये आपको सिलसिलेवार बताते है .
क्या है पूरा घटनाक्रम –
यह है सुबीर मुख़र्जी जबलपुर हाई कोर्ट में वकील है उन्हने  एक  आरटीआई में आल इंडिया फ़ुटबाल फेडरेशन से जानकारियां मांगी जिसमें मुखर्जी ने अपने आरटीआई आवेदन में मांग की मध्यप्रदेश में हुवे सेकंड डिविज़न  फुटबॉल प्रतियोगिता के लिए मध्यप्रदेश फ़ुटबाल संघ को कितना रुपया दिया गया ।  जिसके जवाब के एवज में यह सामने आया कि करीब एक करोड़ से भी अधिक की राशि मध्यप्रदेश फ़ुटबाल संघ को दी गई है। और चौकाने वाली बात यह है कि मध्यप्रदेश फुटबॉल संघ के सचिव अमित रंजन देव ने आज तक सेकंड डिविशन फ़ुटबाल टूर्नामनेट करवाने वाले डीएफए सचिवो को किसी भी तरह का कोई भुगतान किया ही नही गया।
इंदौर और सिंगरौली इन दोनों जिलों में यह सेकंड डिविशन फ़ुटबाल प्रतियोगिताओ को संम्पन कराया गया था बाकायदा उसके लिए इन दोनों जिलों के सचिवों ने अपने जेब से 16 से 18 लाख रुपये खर्च कर इस प्रतियोगिता को सम्प्पन कराया है। लेकिन मध्यप्रदेश फ़ुटबाल संघ के सचिव अमित रंजन देव  ने फर्जी बिल लगा कर आल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन से एक करोड़ से अधिक की राशि इस प्रतियोगिता के लिए ले गई । जब इस सबंध में इंदौर और सिंगरोली के डीएफए सचिवों  आरटीआई में जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि उन्हें किसी भी प्रकार कोई राशि नही दी गई है। तो सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि , जब आल इंडिया फ़ुटबाल फ़ेडरेशन से एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया तो   इंदौर और सिंगरोली ज़िला फ़ुटबाल सचिवों से बिल क्यो नही मांगे गए।  उनके द्वारा खर्च की गई राशि भुगतान  अमित रंजन देव ने उन्हें क्यो नही किया ,कहा गया इतना पैसा । एक करोड़ से अधिक की राशि का  ऑडिट रिपोर्ट मे उल्लेख क्यो नही किया गया।
मध्यप्रदेश फ़ुटबाल संघ के सचिव अमित रंजन देव ने बड़ी चालकी से पूरे घपले को अंजाम दिया है।  और भी कई अनियमितताओं के मामले भी इस अमित रंजन देव  पर लग रहे है शोशल मीडिया पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है । संतोष ट्राफी में मध्यप्रदेश टीम से बाहरी राज्यो के खिलड़ियों को पैसे लेकर खिलाने और एमपी में टूर्नामनेट करवाने वाले आयोजको से 35 से 40 हाजर रुपये वसूलने के  मामला भी गरमाया हुआ है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2018 में मध्यप्रदेश में केवल 6 अखिलभारतीय फुटबॉल स्पर्धाओं की अनुमति Aiff द्वारा दी गई जबकि सत्र 2018 में लगभग 20 अखिभारतीय स्पर्धाओं का आयोजन हुआ है। अतः यह स्पष्ट है कि अमित देव द्वारा केवल 6  अखिल भारतीय स्पर्धाओं  की राशी  A.I .F.F. में प्रेषित की है बाकी स्पर्धाओं का एआईएफएफ में पंजीयन नही है। इससे स्पष्ठ होता है कि राशी के साथ हेराफेरी की गई है। इन टूर्नामनेट से प्रप्ति राशि को भी गबन कर दिया जाता है ।
वही  प्रदेश के फ़ुटबाल खिलड़ियों को विक्रम अवार्ड एवं द्रोणाचार्य अवार्ड  आज तक नही मिला उसको लेकर भी अमित देव पर उंगलियां उठती नजर आरही है।  जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तो ऐसे में क्या होगा । मध्यप्रदेश में फ़ुटबाल खिलाड़ीयो को आगे बढ़ाने बजाए उन्ही के पैसे से अपना घर भरने में लगे  संघ के सचिव,  पैसे का लालच खेलो को भी दीमक की तरह चाट रहा है।  जब अमित रंजन देव जैसे लोग खेल संघो पर काबिज हो जाए तो  खिलाड़ीयो का भविष्य क्या होगी ।  इसकी कल्पना कैसे की जा सकती है । इस मामले को लेकर एडवोकेट सुबीर मुखर्जी ने खेल मंत्री जीतू पटवारी और मुख्यमंत्री कमलनाथ से शिकयत करने की बात भी कही है।

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