मॉ खड़ेरा वाली के यहा आस्था का मेला

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अभिषेक जैन संभाग ब्यूरों 

  • मॉ खड़ेरा वाली के यहा आस्था का मेला  ,
  • तेज धूप -गर्मी होने के बाद भी नंगे पैर सिर पर जवारे लेकर आस्था के साथ मेले मै पहुची महिलाए ,
  • युवतियो के साथ युवको ने वाने छेदकर किया भक्ति का प्रदर्शन

विकासखंड बटियागढ़ के भिलोनी खमरिया गॉव के पास किले के पास स्थित मॉ खड़ेरा वाली के दरवार मै चैत दशमी को लगने वाले मेले मै जिले के अलावा दूसरी जिले के श्रद्धालु गण शामिल रहे स्थानीय निवासी जगदीश अवस्थी ने बताया की मॉ खड़ेरा वाली का मंदिर सैकड़ो साल पुराना है मेले मै दूर दूर से आस्था के साथ श्रद्धालु गण अपनी अपनी मुरादें लेकर आते हैं और मां के दरबार मेहर मुराद पूरी होती है 9 दिनों से माता रानी की आराधना में व्रत रखकर पूजन अर्चन करने वाले हजारों भक्ति अपने अपने दीवालों के घट लेकर मॉ खंडेरा वाली यहां पहुंचते हैं जवारे की कलश बेकर चलने बाली युक्तियां की संख्या इतनी अधिक होती है।

यह जुलूस का रूप धारण कर लेती है वहीं पुरुष वर्ग भी मां के प्रति अपनी भक्ति की आस्था प्रकट करने के लिएकीलों की खड़ाऊ पहनकर बाना अपने चेहरे के आर पार करदातो से दवाए हुए अपनी आस्था प्रिगट कर रहे थे वुन्देलखन्ड की एक प्रचलित प्रथा है जिसे देवी मॉ की आस्था का सवसे प्रमुख प्रतीक माना जाता है लोहे की बाना को गले में छेद दिया जाता है लेकिन जब उसे निकालते हैं सोना कोई छेद होता है नाखून निकलता है बुंदेलखंड में सालों पुरानी परंपरा आज भी प्रचलित है जिसे हजारों लोग अपना तो चले आ रहे हैं मेले में जवानों के साथ महिला पुरुष भाव खेलते देखें मेले का शुभारंभ दो अष्टमी से हो जाता है दशमी को अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है जो दिन के अलावा पूरी रात चलता है मेले में सोने चांदी बर्तनों की दुकानों के अलावा सभी छोटी-बड़ी दुकानों का संचालन किया जाता है मेले की सभी व्यवस्थाएं ग्राम खमरिया के लोग करते हैं।

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