पांचवे दिन भी वन विभाग के हाथ खाली – तो क्या बाघ ने बदली लोकेशन ……..?

हर्षिता वंत्रप 

सारनी – नगर पालिका क्षेत्र में  बाघ की दस्तक और लोगों में अनजाना डर  बरक़रार है ,आज  पांचवे दिन शाम तक के बाद भी वन विभाग के हाथ खाली ही रहे , जबकि वनविभाग का दावा था की हाथियों के आने के बाद  जल्द ही बाघ की लोकेशन ढूंढ ली जायेगी। लेकिन शाम तक सर्चिंग अभियान किसी मुकाम पर नहीं पंहुच सका , वही वन मंडलाधिकारी उत्तर बैतूल श्रीमती राखी नंदा ने बताया कि सारनी शहरी क्षेत्र में विगत चार दिनों से बाघ की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। सारनी शहरी क्षेत्र में 4 दिसंबर को बाघ प्रत्यक्ष रूप से देखा गया था किन्तु 5 दिसंबर को बाघ की उपस्थिति अभी तक दर्ज नहीं की गई है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र संचालक एवं मुख्य वन संरक्षक श्री एसके सिंह, टाइगर रिजर्व क्षेत्र के रेस्क्यू दल एवं उत्तर वन मंडल बैतूल की टीम द्वारा भी सतत् गश्ती की जा रही है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व होशंगाबाद से दो हाथी भी सारनी पहुंच चुके हैं, जिनके द्वारा बाघ की स्थिति का आंकलन किया जा रहा है। वन मंडलाधिकारी उत्तर बैतूल श्रीमती राखी नंदा ने सारनी शहरी क्षेत्र तथा आसपास के गांवों के सभी नागरिकों से इस कार्य में सहयोग करने तथा रात्रि के समय में अति आवश्यक न हो तो घर से बाहर न निकलने की अपील की है।

चूँकि अभी तक लोगो द्वारा ही विभाग को बाघ के होने की सुचना ,फोटो व् वीडियो एवं मोबाईल के माध्यम से दी जा रही थी , किंतु क्षेत्र में धारा 144 लगाने एवं बाघ की लोकेशन वाले क्षेत्र में आवाजाही पर प्रतिबन्ध लगाने से अब लोगों के द्वारा आने वाली सूचनाएं भी बंद हो गई है। सुरक्षा की दृष्टी से ये ठीक भी है।

लेकिन आज पांचवे दिन भी जो लोग डर के मारे घरों में दुबके हुए है। उनका क्या …… ? उन्हें राहत  कब मिलेगी।  वन विभाग की माने तो पांचवे दिन सर्चिंग में बाघ की उपस्थिति ही दर्ज नहीं हुई। तो क्या बाघ ने लोकेशन बदल दी है। जबकि बाघ तीन दिनों तक लगातार  1  नंबर गेट से  सीएचपी , एबी टाइप गार्डन और फिर शांतिनगर की लोकेशन पर ही दिखा है।  और  यदि लोकेशन बदल दी है तो अब कहाँ है।  क्या फिर से लौट कर तो नहीं आएगा। ये सभी सवालों के जवाब वन विभाग को  तलाशने  होंगे।  जब तक कोई पुख्ता राहत भरी खबर लोगों को नहीं मिल जाती , तब तक जनमानस में अज्ञात भय बना रहेगा ।

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