नाबालिग बालिका के साथ,अश्‍लील हरकत करने वाले,अभियुक्‍त को 4 वर्ष के कारावास की सजा

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मोहम्मद आज़ाद

अजयगढ, में पीडिता उम्र-16 वर्ष (नाम उल्‍लेखित नहीं किया जा रहा है) ने उपस्थित होकर लिखित आवेदन दिया, कि दिनांक 09.06.16 को शाम 06:30 बजे अपने मामा की लडकी के साथ साइकिल से मंदिर दर्शन करने के लिये गयी थी एवं दर्शन करने के बाद दोनो रोड पर खडी थी तभी आरोपीगण महेन्‍द्र कोंदर एवं उसका साथी बजारी लाल कोंदर निवासी राजापुर अपने गांव राजापुर की तरफ से आये और उसके पास आकर आरोपी महेन्‍द्र कोंदर ने बुरी नियत से उसके दाहिनी हाथ की कलाई पकड ली और जबरन जंगल तरफ ले जाने लगा, जिसपर पीडिता एवं उसकी बहिन चिल्‍लाई कि कहॉं ले जा रहे हो, आरोपी बजारी कोंदर थोडी दूर जाकर खडा हो गया और आरोपी महेन्‍द्र कोंदर लगभग 100 फीट दूर झाडियों तरफ पीडिता को ले जाकर उसके साथ अश्‍लील हरकत करने लगा। तभी आहता/पीडिता के परिवारवाले आ गये जिनकी आवाज सुनकर आरोपीगण वहां से भाग गये,पीडिता की लिखित शिकायत के आधार पर थाना-अजयगढ में अपराध क्र. 134/2016 पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया,विवेचना के दौरान पीडिता के कथन धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के अन्‍तर्गत माननीय न्‍यायालय के समक्ष कराये गये, विवेचना उपरांत, अभियोग-पत्र माननीय न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया।
प्रकरण का विचारण माननीय न्‍यायालय श्री अमिताभ मिश्रा, विशेष न्‍यायाधीश पन्‍ना के न्‍यायालय में हुआ जिसमें अभियोजन के द्वारा प्रस्‍तुत साक्ष्‍य और न्‍यायिक-दृष्‍टांतों के आधार पर माननीय न्‍यायालय ने आरोपी महेन्‍द्र कोंदर को दोषी पाया। माननीय न्‍यायालय ने साक्ष्‍य के अभाव में आरोपी बजारी कोदर उम्र-21 वर्ष पिता भगौना कोंदर को दोषमुक्‍त किया गया। माननीय न्‍यायालय से अभियोजन के द्वारा अभियुक्‍त महेन्‍द्र कोंदर को कठोर से कठोर दंड से दंडित किये जाने का निवेदन किया गया। माननीय न्यायालय के द्वारा अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए अभियुक्‍त महेन्‍द्र कोंदर उम्र-22 वर्ष,पिता बलवान कोंदर निवासी ग्राम राजापुर थाना अजयगढ जिला पन्‍ना म.प्र. को धारा 354 भा.द.वि. व धारा 8 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 2000/- रूपये का अर्थदण्‍ड से दंडित किया गया।अर्थदण्‍ड की सम्‍पूर्ण राशि 2000 रू. अपील अवधि पश्‍चात् पीडिता को देने के लिये माननीय न्‍यायालय ने आदेशित किया। माननीय न्‍यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्‍चों अवयस्‍क बालिकाओ के साथ हो रहे लैंगिक हमलों की अपराधिक घटनाओं में वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुये ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जाना आवश्‍यक है ऐसी स्थिति में अपराध की गंभीरता को देखते हुये दोषी को कठोर दंड देना उचित होगा। प्रकरण में शासन की ओर से जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री प्रवीण कुमार सिंह के द्वारा पैरवी की गई।

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