गंगा दशहरा आज , सेठानी घाट सहित नर्मदा सभी घाटों के हर हर गंगे, हर हर नर्मदे की लगे जय जयकारे  

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मनीष मालवीय जिला ब्यूरों  

होशंगाबाद// गंगा दशहरा हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है।इस वर्ष गंगा दशहरा 12 जून बुधवार को मनाया जा रहा है। स्कन्द पुराण में वर्णित है कि ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान करने पर पापों से मुक्ति मिलती है। होशंगाबाद सहित समस्त नर्मदा तटों पर बसे शहरों में नर्मदा स्नान करने वालो का मेला लगा हुआ है।

251 दीपों से होगी महाआरती

गंगा दशहरा पर सेठानीघाट पर शाम को माँ नर्मदा की महाआरती 251 दीपों से की जाएगी।

गंगा दशहरा की प्राचीन कथाएं

प्राचीन काल में अयोध्या में सगर नामक एक प्रतापी राजा रहता था। जिसने सात समुद्र को जीत लिया था। उनकी दो रानियां थी एक रानी से एक पुत्र तथा दूसरे रानी से 60 हजार पुत्र की प्राप्ति हुई थी। एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया तथा यज्ञ को सफल करने के लिए उन्होंने एक अश्व को छोड़ा। किन्तु स्वर्ग के स्वामी ने इस यज्ञ को भंग करने के लिए उस अश्व का हरण कर लिया और कपिल मुनि के आश्रम में बांध आए। अश्व की खोज के लिए राजा सगर ने अपने 60 हजार पुत्रो को भेजा।जब राजा के पुत्रो ने पिता द्वारा छोड़े गए अश्व को कपिल मुनि के आश्रम में देखा तो सभी लोग चोर-चोर चिल्लाने लगे। इस कोताहुल से कपिल मुनि की तपस्या भंग हो गयी। कपिल मुनि ने ज्योही अपने आंखे खोली तो सब कुछ जलकर भष्म हो गया।
इसके बाद राजा सगर के पौत्र ने गरुड़ देव से इस सन्दर्भ में जानकारी हासिल की। गरुड़ जी ने कहा कि यदि अपने पूर्वजो की मुक्ति चाहते हो तो गंगा नदी को मृत्यु लोक में लाओ। जिसके बाद राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ ने कठिन तपस्या कर गंगा नदी को धरातल पर आने विवश कर दिया। जब गंगा नदी धरातल पर आई तो समस्त पृथ्वी लोक में हाहाकार मच गया। सब कुछ डूब गया। तब भगवान शिव जी ने गंगा मां को अपने जटाओं में समेट लिया। इस तरह भागीरथ के पूर्वजो को मृत्यु लोक से मुक्ति मिल गई।

गंगा दशहरा का महत्वहिन्दू धर्म में गंगा जी का विशेष महत्व है। गंगा दशहरा के दिन लाखों लोग गंगा नदी की पवित्र जलधारा में आस्था की डुबकी लगाते है। भविष्य पुराण में मां गंगा के प्रादुर्भाव एवं महत्व का उल्लेख मिलता है। इस पुराण के अनुसार जो मनुष्य गंगा दशहरा के दिन नदी में खड़ा होकर….’नमो भगवती हिलि-हिलि, मिलि-मिलि गंगे मां पावय स्वाहा’ मंत्र का उच्चारण दस बार कर अघ्र्य देता है। ना केवल उसके पापों का नाश होता है अपितु उसके समस्त पितरों को भी मुक्ति मिल जाती है। गंगा दस प्रकार के पापों का नाश करती है। इसलिए इसे गंगा दशहरा कहा जाता

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