उर नदी के पुनर्जीवन से बदलेगी जिले की तस्वीर: कलेक्टर जिले के 173 ग्राम होंगे लाभान्वित

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अभिषेक जैन संभाग ब्यूरों 

टीकमगढ़ :मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं प्रभारी कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने बताया कि जिले में नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत उर नदी को पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि उर नदी के पुनर्जीवन से जिले की तस्वीर बदलेगी। इससे भू-जल स्तर बढ़ेगा, जिससे किसानों को तथा ग्रामीणों को लाभ होगा। इससे जिले के 173 ग्राम लाभान्वित होंगे। श्रीमती माथुर ने संबंधित अधिकारियों के साथ उर नदी पुनर्जीवन कार्य योजना मंे शामिल स्थलों का निरीक्षण किया तथा आवष्यक निर्देष भी दिये। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक ग्रामीणों को इसका लाभ मिले यह सुनिष्चित किया जाये। इस दौरान उन्होंने ग्राम बड़माड़ई खास, बहादुरपुर सहित अनेके ग्रामों का निरीक्षण किया।

 


ज्ञातव्य है कि प्रदेष में सूख रही नदियों का पुनर्जीवन करने की शासन की मंषा को अंजाम देने हेतु राज्य स्तर पर पदस्थ्य अनुभवी/विषेषज्ञ अधिकारियों द्वारा खेत का पानी खेत मंे और गांव का पानी गांव में ही रोक कर नदियों को पुनर्जीवित करने हेतु म.प्र. में नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिला टीकमगढ़ में उर नदी के पुनर्जीवन की योजना तैयार की गई है। जिले की उर नदी विकासखण्ड टीकमगढ़, बल्देवगढ़, जतारा एवं पलेरा में से होकर गुजरती है। इस नदी का जलग्रहण क्षेत्र 97895 हेक्टेयर है। नदी के जलग्रहण क्षेत्र में आने वाले ग्रामों में खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में ही रोकने के सिद्धांत के तहत क्षेत्र में मिट्टी के स्ट्रेटा एवं साईट्स की उपयुक्तता के अनुसार कंटूर टेªेंच, बोल्डर वाॅल, सोकपिट, अर्द्धन गली प्लग, लूज बोल्डर चैक, ग्रेबियन संरचना, वृक्षारोपण, परकोलेषन पिट, कंटूर बंडिंग, परकोलेषन पौंड, मेंडबंधान, डगबैल, रिचार्ज साफ्ट, रिचार्ज बैल, डाइक, चैक डेम जैसे जीर्णोधार के कार्य एवं और भी अन्य पानी का संचय करने वाली आवष्यक संरचानाओं का निर्माण शासन की विभिन्न योजनाओं से अवसरण के माध्यम से वित्तीय नियोजन कर किया जायेगा।
इन कार्याें के संपादन से जहां 97895 हैक्टेयर के जलग्रहण क्षेत्र में पूर्व से स्थापित कूप एवं टय्ूबबैल इत्यादि का जलस्तर बढ़ने के साथ ही क्षेत्र का वाटरलेबल बढ़ेगा तो वहीं इस क्षेत्र में रहने वाले कृषकों को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध होने के साथ ही पानी की अन्य आवष्यकताओं की पूर्ति हो सकेगी। इससे एक तरफ कृषक की कृषि भूमि की उत्पादकता क्षमता बढ़ेगी तो वहीं कृषक की आर्थिक समृद्धि भी होगी। इन कार्याें के पूर्ण होने के उपरांत जहां गांव में नवम्बर माह तक सूख जाने वाले नालों की अवधि बढ़ेगी तो वहीं नदी का प्रवाह अविरल 12 महीने बना रहेगा।
इन कार्याें का चयन जिले से लेकर ग्राम स्तर तक पदस्थ अनुभवी विषय विषेषज्ञ तकनीकि दल/रिसोर्स टीम/मास्टर टेªनर/वन विभाग के अधिकारियों द्वारा किया गया है। इसका कलेक्टर जिला टीकमगढ़ एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत टीकमगढ़ श्रीमती नीतू माथुर द्वारा कुषल नेतृत्व प्रदान करते हुये निरंतर प्रक्षेत्र भ्रमण किया जा रहा है। वहीं जिले में पदस्थ तकनीकि विषेषज्ञ सहित परियोजना अधिकारी मनरेगा, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, सहायक यंत्री मनरेगा, एपीओ जनपद पंचायत द्वारा भी निरंतर प्रक्षेत्र भ्रमण कर दल को मार्गदर्षन प्रदान करने के साथ नियमित रूप से समीक्षा बैठक एवं प्रषिक्षण कार्यषाला का भी आयोजन किया जा रहा है। अभी तक इस कार्यक्रम के तहत 8126 कार्याें का चयन किया जा चुका है।

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