आरक्षक ने पत्नी को निकला घर से , पत्नी ने खोली पोल

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मनोहर

ग्वालियर – “शीशे की घरों में रहने वाले दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते ”  ये डायलॉग  फिल्मों तो कई बार सुना होगा और अमूमन लोगों को एक दूसरे को नीचा दिखने के लिए प्रयोग करते देखा होगा ।  लेकिंन साहित्य की नगरी ग्वालियर में ये कहावत चरितार्थ हो गई , वो भी एक पुलिस आरक्षक को , अब पुलिस के  खिलाफ  ही पुलिस में FRI दर्ज हो गई है।  और वो भी उसकी पत्नी की वजह से।

दरअसल पूरा ग्वालियर शिवपुरी के बेहट थाना क्षेत्र का है।  जहाँ तैनात एक पुलिस आरक्षक को अपनी पत्नी को प्रताड़ित कर दहेज़ महंगा पड़ गया। आरक्षक ने युवती से प्रेम विवाह किया था , कुछ दिनों तक सब ठीक चला ,जब प्यार का बुखार उतरा तो आरक्षक ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया , और पत्नी को घर से पैसे मांगने का दबाव बनाने लगा। जब पत्नी ने विरोध किया तो से रौब दिखते हुए घर से निकाल दिया। शायद अबला नारी समझ कर , लेकिन इस अबला ने उसका तबला बजा दिया।

कभी दारु के नशे व  बड़बोले पन में आरक्षक ने अपनी शेखी बघारने पत्नी को राज की बात बता दी , राजदार पत्नी ने उसी राज यानी आरक्षक के द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी पाने की पोल पट्टी खोलने  सीधे जिले के पुलिस कप्तान के पास जा पंहुची।

शिवपुरी नरवर निवासी युवती रजनी बाथम  ने  पुलिस कप्तान नवनीत भसीन से शिकायत की थी कि उसका पति राकेश मांझी नकली जाति प्रमाण पत्र की मदद से आरक्षक बना है और अभी वह  बेहट थाने में पदस्थ है। जिस पर मामले को गंभीरता से लेते हुए  पुलिस अधीक्षक  ने शिकायत की जांच SDOP बेहट को सौंपी  और जांच में रजनी की शिकायत की पुष्टि हो गई , जिस पर पीडि़ता रजनी की शिकायत आरोपी आरक्षक राकेश मांजी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।  इसे कहते है “अब ना हाथ की रही ना तवे की ” .

 

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