अलसुबह से तामिया मे हुई गिद्ध ग़णना गिद्ध गणना के लिये पहुंचे सीएसीएफ डीएफओ

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नितिन दत्ता,

तामिया – प्रदेश स्तर पर गिद्ध गणना 12 जनवरी की अलसुबह से शुरु हो गयी वन बिभाग का अमला सुबह छह बजे से वन क्षेत्र मे गणना करने क्षेत्र मे मुस्तैद रहा | वन क्षेत्र मे वन विभाग के अमले ने बैठे हुये गिद्धो के प्राकृतिक आवास्थ स्थल की अक्षांश देशांश के चित्र संग्रहित किये | मध्यप्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वनसंरक्षक वन्य प्राणी ) आलोक कुमार के निर्देशन में सीसी एफ केके गुरवानी डीफओ डॉ किरण बिसेन वन प्राणी संरक्षण से जुडे | स्वयसेवी संगठन के पदाधिकारियो की उपस्थिति गिद्ध गणना की गई इस अवसर पर उपवनमंडल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान, तामिया रेंजर आरपी श्रीवास्तव मौजूद रहे |

तामिया मे सुबह छह बजे से ही गिद्धगणना के लिये डिप्टी रेंजर मनोज पवार वनरक्षक राजेश पंद्राम संजय धुर्वे, संतोष भलाबी, अनिल परतेती, सहित पूरा अमला वन क्षेत्र तथा चौडा बखारी पहाडी पर पहुंचा| तामिया रेंजर आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि तामिया मे कुल 37 गिद्ध पाये गये | गणना के दौरान तामिया वन परिक्षेत्र के कक्षा क्रमांक पी 16 घोंसलो पाये गये वही इस मे 3 अव्ययस्क एंव 32 इंडियन वल्चर पाये गये इसी तरह तामिया रेंज के प्रतापगढ बादला कक्ष क्रमांक पी 212 मे एक घोंसला एंव दो वयस्क गिद्ध मिले है वही श्रीझौंत कक्ष क्रमांक पी 203 मे गिद्धो के प्राकृतिक निवास स्थल वाले तीन घोंसले पाये गये है | तामिया वन परिक्षेत्र में गणना के दौरान कुल 37 इंडियन वल्चर पाये गये है | वही तामिया मुख्यमार्ग तामिया से छिंदवाडा रोड पर दादाजी धुनी मंदिर के पास कोमल सूर्यवंशी के मकान के सामने जामुन के पेड मे एक घोंसला देखा गया है |

 

गौरतलब है कि बीते 29 दिसंबर 2018 को तामिया के सामुदायिक भवन मे छिंदवाडा एंव बैतूल के 150 वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियो को वृहद स्तर पर गिद्ध गणना के लिए प्रशिक्षित किया गया था | गिद्ध एक ऐसा पक्षी जिसने भारत की सामाजिक आर्थिक व्यवस्था मे दिया दखन – गौरतलब है कि प्रदेश स्तर पर 12 जनवरी 2019 में होने वाली गिद्ध गणना से पहले बैतूल और छिंदवाडा वन वृत के अधिकारी कर्मचारीयो को अमले को प्रशिक्षित करने कार्यशाला का आयोजन स्थानीय सामुदायिक भवन तामिया में किया गया था| वनविहार भोपाल के डॉ केके यादव ने छिंदवाडा बैतूल के सौ से अधिक कर्मचारी अधिकारियो को प्रशिक्षण दिया था| डॉ यादव ने के मुताबिक पूरे विश्व मे 23 प्रजाति के गिद्ध पाये जाते है वही देश मे 9 प्रजाति के गिद्ध है मध्यप्रदेश में इन्डियन वल्चर, सफेद पीठ राजगिद्ध, सफेद इजीशियन गिद्ध,काला सिनेरियस , यूरेशियन गिद्ध, पाये जाते है |

डॉ यादव ने बताया कि वास्तविक गणना के लिये सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप सभी हर बिंदु का ध्यान रखे उन्होने बताया कि यहा पाये जाने वाले व्हाइट बैल्ड वल्चर घोंसला बनाता वयस्क के पंखो पर रिंग होते है लोंग बिल वल्चरचटानो मे रहता है जिसके सिर पर बाल होते है वही इजीप्शियन वल्चर पुराने खंडहर मे रहता है |जटाऊ के पौराणिक महत्व से जुडे गिद्ध एक मात्र देश का ऐसा पक्षी है जिससे हमारे देश की आर्थिक सामाजिक व्यवस्था को जमकर प्रभावित किया है गिद्ध पक्षी ने हमारी आर्थिक व्यवस्था पर दखल दिया है |

पारसी और जाटव समाज का वर्ग सीधे सामाजिक रूप से प्रभावित हुआ | गिद्ध के विलुप्ति के कारण आर्थिक सामाजिक एंव पर्यावरणीय प्रभाव पडे है एक तरफ श्वानो की संख्या में वृद्धि,व्यवहार परिवर्तन हुआ है वही मानव मृत्युदर बढ रहा है रेबीज कालराकेरोगी बढ रहे है जल भूजल वायू प्रदुषण बढ रहा है| वही गिद्ध पक्षी के खत्म होने के कारण मे डाक्लोफेनिक भोजन, विसरल बीमारी,ड्रोपिंग हेड रोग प्राकृतिक आवास का खत्म होना, धीमी प्रजनन दर के साथ मृत्यदर मे तेजी प्रमुख है| गिद्ध गणना की कार्यशाला सीसीएफ केके गुरवानी पश्चिम वनमंडल अधिकारी डॉ किरण बिसेन दक्षिण वनमंडल वनमंडल अधिकारी आलोक पाठक बैतूल दक्षिण वनमंडल अधिकारी अशोक कुमार बैतूल उत्पादन डीएफओ पुनीत गोयल उत्पादन डीएफओ साहिल गर्ग आईएफएस श्रीमति रीता की उपस्थिति मे शुरु हुआ था |

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