खबर का असर- सतपुड़ा प्लांट में नई इकाई की ईओटी-क्रेन की केबल चोरों मामले में न्याय संगत कार्यवाही

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दीपेश दुबे-जिला ब्यूरो चीफ

सारनी । औद्योगिक नगरी सारनी के सतपुड़ा प्लांट में इन दिनों हर तरफ अव्यवस्था देखी जा रही है । सुरक्षा विभाग अधिकारी, सीआईएसएफ की मिलीभगत से सतपुड़ा प्लांट में रोज होती हैं चोरी, कभी स्टार के ताले टूटे रहे है, तो कभी नियम विरुद्ध रात 10 बजे प्लांट के मुख्य द्वार के कैमरे बंद कर स्क्रैप से भरे चार-चार ट्रक निकाले जाते हैं । इसी के चलते हुए मुख्य सुरक्षा अधिकारी का स्थानांतरण- निलंबित किसे होना था वह जनता से छुपा नहीं है ।

क्रेन केबल चोरी का क्या था पूरा मामला-

बताया जाता है कि 5 अक्टूबर की रात सतपुड़ा प्लांट की नई इकाई 10 और 11 नंबर की टरबाइन फ्लोर, मेन कंट्रोल रूम के सामने साढे 13 मीटर के ऑफिस पर लगी ( ई ओ टी- क्रेन ) जो 10 और 11 नंबर की टरबाइन उठाने के लिए ऊपर लगी हुई होती है । EOT-क्रेन की कॉपर की 2537 मीटर की केबल पर रात चोरों ने हाथ साफ कर लिया । आश्चर्य की बात है की मेन कंट्रोल रूम के ऑफिस में हर समय ही कर्मचारी-अधिकारी की ड्यूटी तैनात रहती है। चोरी हुई केबल की शिकायत सुरक्षा विभाग ने 6 अक्टूबर को सारनी थाने में दर्ज कराई है । सूत्रों की मानें तो चोरों को अंदर स्वयं अधिकारी ही प्रवेश करवाते हैं। प्लांट की सभी चोरी योजनाबद्ध व मिलीभगत से ही होती है । किंतु जवाबदार अधिकारी, सुरक्षा अधिकारी,सीआईएसएफ के अधिकारी हर चोरी से पल्ला झाड़ते हुए नजर आते हैं । अपनी नाकामी छुपाते हुए चोरी की शिकायत सारनी थाने में आकर दर्ज कराई जाती है । जबकि सतपुड़ा सुरक्षा का स्टॉप सीआईएसएफ में 68 जवान है और सुरक्षा विभाग में लगभग 82 जवान है । कुल लगभग डेढ़ सौ जवानों का सुरक्षा विभाग का खुद का स्टॉप है सतपुड़ा प्लांट का । उसके बाद भी रोज चोरी होना कहीं ना कहीं सभी की मिलीभगत का प्रमाण देता है ।

गलती तो सुरक्षा विभाग की है- निलंबित बेकसूर

गोलमाल कर मोटी जेब भरने की रेस में अधिकारी – निलंबित की कार्रवाई में बेचारा कर्मचारी। चोरी की घटना के इस पूरे मामले में सबसे बड़ी गलती तो सुरक्षा विभाग की दिख रही है। चोरों को अंदर प्रवेश कैशे मिला आखिर चोर सतपुड़ा प्लांट के अंदर कैसे आ गए यह विषय पर गौर किया जाना था । सुरक्षा में लगे सीसीटीवी कैमरे, रात्रि गश्त,अधिकारी, कर्मचारी मिलाकर डेढ़ सौ 150 सुरक्षा विभाग में तैनात है जवान । तो चोर भला अंदर कैसे घुस गए । इस पूरे मामले में प्लांट के आला अधिकारियों ने अपनी नाकामी छुपाते हुए । बड़े लोगों का बचाव कर आहुति की भेंट चढ़ा दिया छोटे कर्मचारियों को-कर दिया निलंबित । जबकि इसमें सबसे बड़ी गलती सुरक्षा विभाग की है । प्लांट प्रशासन लाखों-करोड़ों सुरक्षा विभाग पर खर्च कर रहे हैं और वह सब मिलकर चोरी करवा रहे हैं । प्रथम दृष्टि से देखा जाए तो सबसे पहला मुद्दा यही है कि लाखों करोड़ों खर्च सुरक्षा विभाग में लगे यंत्र इस्तेमाल करने के बाद भी चोर अंदर प्रवेश कैसे कर गए यह चिंतन का विषय है । योजनाबद्ध चोरी में जवाबदार अधिकारी, सुरक्षा विभाग, कर्मचारी सभी की मिलीभगत से प्लांट में होती है चोरी । जांच कर कार्रवाई होना था तो इन विभागों के कर्मचारी अधिकारी पर होना था। भला निलंबित हुए दो कर्मचारियों की क्या गलती, जब सुरक्षा में तैनात डेढ़ सौ जवानों के बाद भी चोर प्लांट में अंदर प्रवेश कर गए यह नाकामी तो सुरक्षा विभाग की है। आम जनता के लिए प्लांट में प्रवेश करने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है । प्रवेश फार्म भरकर अनुमति प्रदान कर अंदर प्रवेश दिया जाता है । चोरों को निमंत्रण तो सुरक्षा विभाग ही देता है । इससे स्पष्ट होता है कि जांच न्याय संगत हुई है । जिस पर कार्रवाई होनी थी उसका बचाव करते हुए बेकसूर कर्मचारियों को आहुति की भेंट चढ़ा दिया गया। जिसे न्याय संगत कार्यवाही माना जा रहा है। जिसे देखते हो पुनः जांच की मांग उठने लगी है ।

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