1 अक्टूबर से एकीकृत शिक्षा योजना लागू ,करीब 35 हज़ार सरकारी स्कूल मर्ज

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मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा के मामले में नया फरमान जारी किया है। १ अक्टूबर से राज्य सरकार एकीकृत शिक्षा योजना करीब 35 हज़ार सरकारी स्कूलों को मर्ज कर , एक ही स्कुल भवन में पहली से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं लगाएगी । जहां शिक्षा की सभी सुविधाएं, लाइब्रेरी, लैब एवं विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता रहेगी। जिन क्षेत्रों में स्कूल दूर होगी वहां सरकार आवागमन सुविधा उपलब्ध कराएगी , हालांकि सरकार का दावा है कि कोई स्कूल बंद नहीं होगा, बल्कि स्कूलों का विलय होगा। जो भवन खाली होंगे उनमे आंगनवाड़ी या पंचायत भवन हेतु उपयोग में लिया जायेगा , ये जानकारी स्कूली शिक्षा राजयमंत्री दीपक जोशी द्वारा दी गई।
सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा 1 अक्टूबर तक शिफ्टिंग के लिए कहा गया है| योजना लागू होने के बाद एक परिसर में संचालित स्कूलों का समय भी एक साथ होगा। स्कूल में स्टाफ रूम, बैंक अकाउंट, डाईज कोड भी एक ही हो जाएगा। प्राचार्य सुविधा के अनुसार शिक्षकों को कक्षाओं में पढ़ाने के लिए भेज सकेंगे। इससे शिक्षकों की कमी भी दूर हो सकेंगी। जो स्कूल शिफ्ट किए जा रहे हैं उनके छात्रों को आने-जाने के लिए बस या ऑटो उपलब्ध कराए जाएंगे, स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी ज़िलों के कलेक्टर्स को इस सम्बन्ध में निर्देश दे दिए हैं| यह प्रक्रिया आगामी एक अक्टूबर तक पूरी कर ली जायेगी| इन स्कूलों में मौजूदा शिक्षकों के तबादले नहीं होंगे। बल्कि उन्हें शिक्षित कर दक्ष बनाया जाएगा।

केंद्र के एकीकृत शिक्षा नीति के साथ किया बदलाव

राज्य सरकार स्कूल शिक्षा के ढांचे में बदलाव केंद्र की मोदी सरकार की एकीकृत शिक्षा योजना के तहत कर रही है। जिसके तहत ‘सबको शिक्षा-अच्छी शिक्षा” के उद्देश्य को ले कर बनाई गई नीति के अंतर्गत इसमें नर्सरी से 12वीं तक लागू सर्व-शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षा शामिल होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना, विद्यार्थियों की शिक्षा-अर्जन की क्षमता में वृद्धि करना, स्कूली शिक्षा में सामाजिक असमानता को दूर करना, स्कूली शिक्षा व्यवस्था में न्यूनतम मानक निर्धारित करना, शिक्षा के साथ व्यवसायीकरण परीक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। खास बात तो यह है कि मोदी सरकार की इस एकीकृत शिक्षा योजना तत्कालीन यूपीए सरकार के कार्यकाल में तैयार की गई थी, लेकिन तब मप्र ने इस योजना को लागू करने से साफ इंकार कर दिया था। जिसके परिपालन के आदेश 1 अक्टूबर से सभी जिला कलेक्टर्स को भेज दिए गए है।

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