मुनि तरुण सागर ने त्यागी देह

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जैन मुनि और राष्ट्र संत तरुण सागर जी ने देह त्याग दी , आज दोपहर लगभग 3 बजे होगा अंतिम संस्कार।  दरअसल, 20 दिन पहले उन्हें पीलिया हुआ था, जिसके बाद उन्हें मैक्स अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। कहा जा रहा है कि जैन मुनि ने इलाज कराने से इन्कार कर दिया था  और कृष्णा नगर (दिल्ली) स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर जाने का निर्णय लिया था ।

मुनिश्री अपने अनुयायियों के साथ दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर हैं। बताया जा रहा है कि मुनिश्री अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराजजी की स्वीकृति के बाद संलेखना (आहार-जल न लेना) कर रहे थे । तरुण सागर महाराज जी के गुरु पुष्पदंत सागर महाराज जी ने भी एक वीडियो जारी किया था । इसमें उन्होंने बताया था कि उनके शिष्य की हालत गंभीर है। मुनि तरुणसागर जी का जन्म दमोह जिले के हटा में गांव गुहजी में 26 जून, 1967 को हुआ था। जिन्हे कड़वे प्रवचनों की वजह से ख्याति मिली थी।

क्या है संलेखना
जैन धर्म के मुताबिक, मृत्यु को समीप देखकर धीरे-धीरे खानपान त्याग देने को संथारा या संलेखना (मृत्यु तक उपवास) कहा जाता है। इसे जीवन की अंतिम साधना भी माना जाता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने 2015 में इसे आत्महत्या जैसा बताते हुए उसे भारतीय दंड संहिता 306 और 309 के तहत दंडनीय बताया था। दिगंबर जैन परिषद ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।

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